सेड़वा के स्कूलों में 80 पानी के कैंपर भेंट
गर्मी में विद्यार्थियों को ठंडा पानी उपलब्ध कराने की पहल
सेड़वा के विभिन्न सरकारी स्कूलों में एडवोकेट मोहनलाल हुड्डा ने भीषण गर्मी के बीच करीब 80 पानी के कैंपर दान किए, जिससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को पेयजल की सुविधा मिली। क्यामसर गांव में राहगीरों और ग्रामीणों के लिए एक वाटर कूलर भी भेंट किया गया, जिसे समाज के लिए सार्वजनिक उपयोग हेतु प्रदान किया गया।
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डीडवाना। सेड़वा में भीषण गर्मी के बीच विद्यार्थियों और शिक्षकों को पेयजल सुविधा देने के लिए एडवोकेट मोहनलाल हुड्डा ने करीब 80 पानी के कैंपर सरकारी स्कूलों में भेंट किए। इससे स्कूलों में लंबे समय से महसूस हो रही पेयजल की जरूरत को राहत मिली है।
एडवोकेट मोहनलाल हुड्डा ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय झड़पा, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भाड़ा, मेघवालों का पाड़ा भाड़ा, देहवा, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय एकल, रते का तला, वांभुओं की ढाणी, राजकीय प्राथमिक विद्यालय धुड़ावा सहित अन्य विद्यालयों में कैंपर उपलब्ध करवाए। तेज गर्मी में स्कूलों में पेयजल की जरूरत बढ़ गई है। कैंपर मिलने से छात्र-छात्राओं को ठंडा और स्वच्छ पानी मिल सकेगा।
क्यामसर गांव में राहगीरों और ग्रामीणों के लिए भी एक वाटर कूलर भेंट किया गया है। यह कूलर गर्मी के दिनों में शीतल पानी उपलब्ध कराएगा। श्रीमती पताशी देवी और स्वर्गीय मोहनरामजी सैनी के बेटों ने यह वाटर कूलर सार्वजनिक उपयोग के लिए दिया।
वाटर कूलर लगाने के दौरान रामचंद्र सैनी, मोतीराम सैनी और चंद्र मिस्त्री ने बिना कोई पैसा लिए निस्वार्थ भाव से कूलर की फिटिंग और उसे लगाने का काम किया। उन्होंने अपने काम को समाज सेवा का हिस्सा माना और श्रमदान किया। इस पहल से दान और श्रमदान दोनों की एक अच्छी मिसाल सामने आई है।
ग्रामीणों ने कूलर भेंट करने वाले परिवार और उसे लगाने में मदद करने वाले सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि जल सेवा सबसे बड़ी सेवा है। ऐसे अच्छे काम से गर्मी में आम लोगों को राहत मिलती है और समाज में सेवा, सहयोग और परोपकार की भावना बढ़ती है।
एडवोकेट मोहनलाल हुड्डा ने कहा कि बच्चे देश का भविष्य हैं और शिक्षा के साथ जरूरी मूलभूत सुविधाएं भी मिलनी चाहिए। भीषण गर्मी में विद्यार्थियों को पानी के लिए परेशानी न हो, इसी भावना से कैंपर भेंट किए गए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ग्रामीणों का इस सेवा पर क्या कहना था?
- ग्रामीणों ने सेवा के लिए आभार जताया और कहा कि जल सेवा सबसे बड़ी सेवा है।
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