अनूपगढ़ में किसानों का आंदोलन तेज, 24 सितंबर को चक्का जाम
किसानों ने रबी सीजन के स्थायी रेगुलेशन और मुआवजे की मांग की
राजस्थान के अनूपगढ़ में सिंचाई पानी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है और 24 सितंबर को चक्का जाम का आयोजन किया जाएगा। किसानों की मुख्य मांग स्थायी छह माह का रेगुलेशन और फसल नुकसान का उचित मुआवजा है, जबकि सिंचाई विभाग के साथ वार्ता विफल रही है। आंदोलन के समर्थन में आसपास की मंडियां बंद रखी गई हैं और 22 सितंबर को होने वाली बीबीएमबी बैठक में पानी के शेयर पर फैसला लिया जाएगा।
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अनूपगढ़। राजस्थान के अनूपगढ़ क्षेत्र में सिंचाई पानी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज हो गया है। 24 सितंबर को चक्का जाम का ऐलान किया गया है। किसानों की मुख्य मांग रबी सीजन के लिए स्थायी छह माह का रेगुलेशन और फसल नुकसान का उचित मुआवजा है।
किसानों और सिंचाई विभाग के बीच देर रात तक चली वार्ता विफल रहने के बाद आंदोलन तेज हो गया है। किसान नेताओं ने बताया कि चार प्रमुख मांगों पर प्रशासन से कोई लिखित सहमति नहीं बनी है। आंदोलन स्थल पर ही रात गुजारी जाएगी और अगले दिन व्यापक बैठक कर रणनीति तय की जाएगी।
किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि सावनी सीजन में नहरों को तीन में से केवल एक समूह में चलाया गया, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ। रबी सीजन के लिए केवल तीन बारियां दिए जाने की व्यवस्था किसानों को स्वीकार नहीं है। वे छह माह का स्थायी रेगुलेशन चाहते हैं।
किसान नेताओं ने सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि जल उपलब्धता के आंकड़े वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। इससे खरीफ फसलें सूखकर खराब हो गईं। वे खराब फसलों के मुआवजे और फसल बीमा क्लेम की भी मांग कर रहे हैं।
किसानों के समर्थन में खाजूवाला, रावला, घड़साना और अनूपगढ़ की मंडियां बंद रखी गई हैं। बाजारों में व्यापारिक गतिविधियां ठप हैं और दुकानों के शटर बंद हैं। स्थानीय व्यापारियों ने बंद का समर्थन किया है।
22 सितंबर को होने वाली बीबीएमबी बैठक में पानी के शेयर पर फैसला होगा। इसके बाद किसानों के साथ फिर से वार्ता कर उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा। बैठक में सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता प्रदीप रस्तोगी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहेंगे।
किसान आंदोलन को प्रथम चरण के अन्य क्षेत्रों तक फैलाने की रणनीति भी बनाई जा रही है। वे सरकार और प्रशासन पर दबाव बढ़ाने के लिए तैयार हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अगले चरण में आंदोलन का क्या प्लान है?
- अंदाजा है कि आंदोलन को प्रथम चरण के अन्य क्षेत्रों तक फैलाया जाएगा।
- नीर उपलब्धता को लेकर किसान क्या समस्या बता रहे हैं?
- किसान सिंचाई विभाग के जल उपलब्धता के आंकड़ों को वास्तविक स्थिति से अलग बता रहे हैं।
- क्या प्रशासन और किसान नेताओं के बीच बातचीत सफल रही?
- नहीं, देर रात तक चली बातचीत विफल रही, कोई लिखित सहमति नहीं बनी।
- किसानों की समर्थन में स्थानीय व्यापारियों की भूमिका क्या है?
- स्थानीय व्यापारियों ने किसानों के बंद का समर्थन किया है और दुकानों के शटर बंद रखे हैं।
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