इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कर्मचारियों को सैंटा क्लॉज की टोपी पहनाने से रोका
कोर्ट ने कहा, लोकतांत्रिक व्यवस्था में आस्था का सम्मान जरूरी, जबरन टोपी पहनाना गलत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर कर्मचारियों को सैंटा क्लॉज की लाल टोपी पहनाने के आदेश को अवैध ठहराया है और कहा है कि हर नागरिक को अपनी आस्था का पालन करने की स्वतंत्रता है। कोर्ट ने चार्जशीट और समन आदेश को रद्द करते हुए मामले को शिकायत के रूप में आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर कर्मचारियों को सैंटा क्लॉज की लाल टोपी पहनाने के आदेश को अवैध करार दिया है। कोर्ट ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी आस्था और विश्वास का पालन करने की स्वतंत्रता है और इस तरह की बाध्यता स्वीकार्य नहीं।
यह मामला आगरा के सदर बाजार थाने में दर्ज एक शिकायत से जुड़ा है, जिसमें विक्रम सिंह उर्फ विश्व विक्रम सिंह पर धार्मिक भावनाएं आहत करने और जानबूझकर अपमान करने के आरोप थे। पुलिस ने 20 सितंबर 2023 को चार्जशीट दाखिल की और 21 दिसंबर 2023 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने विक्रम सिंह को समन जारी किया। इसके बाद विक्रम सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार्जशीट, समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने दस्तावेजों की जांच में पाया कि 'V Bazar' के वरिष्ठ अधिकारियों ने कर्मचारियों के लिए सैंटा क्लॉज की लाल टोपी पहनना अनिवार्य किया था। अदालत ने कहा कि इस तरह की बाध्यता से विभिन्न धर्मों और आस्थाओं के लोगों की भावनाएं आहत हो सकती हैं और इस प्रकार की अनुमति लोकतांत्रिक व्यवस्था में नहीं दी जा सकती।
याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि आरोप गैर-संज्ञेय अपराध हैं और पुलिस की रिपोर्ट को शिकायत माना जाना चाहिए था, न कि चार्जशीट के रूप में। हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट द्वारा मामले को राज्य मामले के तौर पर लेने को कानूनी गलती बताया और 21 दिसंबर 2023 के समन आदेश को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह आदेश आरोपों की सच्चाई या मामले की आगे की कार्रवाई को प्रभावित नहीं करता। अदालत ने संबंधित अदालत को निर्देश दिया कि वह मामले को शिकायत के रूप में आगे बढ़ाए। याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार कर लिया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सैंटा क्लॉज टोपी पहनाने का आदेश क्यों रोका गया?
- कोर्ट ने इसे कर्मचारियों की आस्था के खिलाफ बताया और बाध्यता को अवैध माना।
- यह मामला किस पुलिस थाने से जुड़ा है?
- यह आगरा के सदर बाजार थाना क्षेत्र से संबंधित है।
- हाईकोर्ट ने चार्जशीट को कैसे देखा?
- कोर्ट ने चार्जशीट को चुनौती देने वाले पहलुओं को मान्यता देते हुए समन आदेश रद्द किया।
- अदालत ने मामले को किस तरह आगे बढ़ाने को कहा?
- अदालत ने संबंधित अदालत को इसे शिकायत के रूप में निपटाने के निर्देश दिए।
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