हाईकोर्ट ने एसएसबी अधिकारी रोहित पांडेय की बर्खास्तगी रद्द की
आर्य समाज मंदिर का प्रमाणपत्र अकेले हिंदू विवाह का वैध साक्ष्य नहीं माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एसएसबी अधिकारी रोहित पांडेय की बर्खास्तगी रद्द कर दी है क्योंकि कोर्ट ने वैध हिंदू विवाह के लिए आवश्यक संस्कारों के प्रमाण नहीं मिलने को माना। कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को उन्हें तुरंत ड्यूटी पर वापस लेने का आदेश दिया और 28 अप्रैल 2022 से फैसले तक की अवधि को 'नो वर्क, नो पे' माना।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सशस्त्र सीमा बल के अधिकारी रोहित पांडेय की बर्खास्तगी रद्द कर दी है।
कोर्ट का फैसला और कारण
न्यायमूर्ति राजीव सिंह की पीठ ने 28 अप्रैल 2022 को पांडेय की बर्खास्तगी आदेश को चुनौती पर सुनवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वैध हिंदू विवाह साबित करने के लिए अधिनियम में निर्धारित आवश्यक वैवाहिक संस्कारों का संपन्न होना भी प्रमाणित होना चाहिए।
इसलिए बर्खास्तगी आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारियों को उन्हें तुरंत ड्यूटी पर वापस लेने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने 28 अप्रैल 2022 से फैसले की तारीख तक की अवधि को 'नो वर्क, नो पे' माना, लेकिन इस अवधि को सेवा में अवरोध या ब्रेक नहीं माना जाएगा।
विभागीय जांच और विवाद
विभागीय कार्रवाई सुचेता तिवारी की शिकायत के बाद शुरू हुई थी। तिवारी ने दावा किया था कि वर्ष 2007 में आर्य समाज मंदिर में उनका विवाह रोहित पांडेय से हुआ था। विभाग ने इस विवाह को वैध मानते हुए निष्कर्ष निकाला कि पांडेय ने बाद में नौकरी के समय स्वयं को अविवाहित बताकर गलत घोषणा की।
पांडेय ने विवाह से इनकार किया और कहा कि हिंदू विवाह के लिए जरूरी संस्कार, विशेष रूप से सप्तपदी, संपन्न होने का कोई प्रमाण नहीं है। उन्होंने आपराधिक मामले की सुनवाई के दौरान सुचेता के बयान का हवाला दिया, जिसमें विवाह हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार न होने की बात कही गई थी।
हालांकि विभागीय जांच में सुचेता के बयान पर भरोसा किया गया था, लेकिन कोर्ट ने इस आधार पर वैध विवाह नहीं माना। मंदिर के पुजारी ने भी जांच में कहा था कि उनकी मौजूदगी में विवाह संपन्न हुआ था।
केवल आर्य समाज मंदिर का प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर देने से यह साबित नहीं होता कि विवाह हिंदू विवाह अधिनियम के अनुसार संपन्न हुआ था
इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ
जब विवाह ही वैध साबित नहीं हुआ तो उसके आधार पर पांडेय को सेवा के लिए अनुपयुक्त मानना या सेवा से हटाना उचित नहीं था
इलाहाबाद हाईकोर्ट, लखनऊ खंडपीठ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- आगे ऐसी स्थितियों में न्यायालय का क्या रुख हो सकता है?
- न्यायालय वैध हिंदू विवाह के संस्कारों के प्रमाण के बिना बर्खास्तगी को सही नहीं मानता है, इसलिए भविष्य में भी संस्कारों के प्रमाण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
- क्या अधिकारी रोहित पांडेय को तुरंत सेवा में वापसी मिलेगी?
- हाँ, हाईकोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को उन्हें तुरंत ड्यूटी पर वापस लेने का निर्देश दिया है।
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