इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवेचना में गवाहों के बयान रिकॉर्डिंग अनिवार्य की
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद हाईकोर्ट ने गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग का आदेश दिया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवेचना के दौरान गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य कर दी है, जिससे झूठी शिकायतों से बचाव हो सकेगा। यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवेचना के दौरान गवाहों के बयान की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। आदेश में कहा गया है कि इससे ईमानदार अधिकारियों को झूठी शिकायतों से बचाया जा सकेगा।
हाईकोर्ट के आदेश का मकसद
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब शिकायतकर्ता स्वयं बाद में यह स्वीकार कर चुका है कि शिकायत गलतफहमी के कारण की गई थी, तो उस शिकायत के आधार पर आगे बढ़ाई गई कार्यवाही का आधार समाप्त हो जाता है।
यह आदेश सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के अनुरूप है, जो गवाहों के बयान की रिकॉर्डिंग को जरूरी मानता है। इससे न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
सैनिक की विधवा को 42 साल बाद पेंशन
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सैनिक की विधवा को 42 साल बाद पेंशन लाभ दिलाने के लिए न्यूनतम सेवा शर्त हटाई है। केंद्र सरकार का दावा था कि हाकम ने 10 साल की सेवा पूरी नहीं की थी, इसलिए वह पेंशन के पात्र नहीं थे।
कोर्ट ने कहा कि कानून की स्थापित स्थिति के अनुसार, अमान्य पेंशन के लिए 10 साल की सेवा पूरी होना अनिवार्य बाधा नहीं है, जिसके आधार पर पात्र सैनिक को पेंशन लाभ से वंचित किया जाए। इस फैसले से विधवा को पेंशन का लाभ मिलेगा।
महिला न्यायाधीश को ओडिशा हाईकोर्ट से राहत
एक महिला न्यायाधीश ने ऑटिज्म से पीड़ित बेटे के इलाज के लिए नौकरी से इस्तीफा दिया था, जिसे बाद में वापस ले लिया। राज्य सरकार ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया था, जबकि न्यायाधीश ने वापस लेने का दावा किया।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द करते हुए पुनः नियुक्ति का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि जितने समय तक न्यायाधीश नौकरी में नहीं थीं, उस अवधि की तनख्वाह नहीं मिलेगी, लेकिन नौकरी की अवधि पेंशन और तरक्की के लिए मान्य होगी।
जबलपुर हाईकोर्ट के रिटायर जज का देहदान
जबलपुर हाईकोर्ट के रिटायर जज अवनींद्र सिंह और उनकी पत्नी ने दो दिन पूर्व मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीयन कराया है। उन्होंने पीएम केयर्स फंड को एक करोड़ एक लाख रुपये दान किए हैं। यह कदम मानवता और समाज सेवा की मिसाल है।
चूंकि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर स्थिति स्पष्ट कर चुका है
इलाहाबाद हाईकोर्ट
सरकारी आदेशों के तहत ग्रुप-ए अधिकारियों के खिलाफ शिकायत के साथ शपथपत्र की व्यवस्था इसलिए की गई थी, ताकि ईमानदार अधिकारियों को फर्जी या झूठी शिकायतों के आधार पर प्रताड़ित होने से बचाया जा सके
इलाहाबाद हाईकोर्ट
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गवाहों के बयान की रिकॉर्डिंग अनिवार्य क्यों की?
- इससे ईमानदार अधिकारियों को झूठी शिकायतों से बचाया जा सकेगा और न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता बढ़ेगी।
- सैनिक की विधवा को पेंशन मिलने के लिए सेवा की न्यूनतम अवधि क्यों हटाई गई?
- क्योंकि कोर्ट ने माना कि 10 साल की सेवा पूरी होना पेंशन पात्रता के लिए बाधा नहीं हो सकती।
- महिला न्यायाधीश की पुनः नियुक्ति के बाद क्या बदलाव होंगे?
- न्यायाधीश को नौकरी न करने के दौरान वेतन नहीं मिलेगा, लेकिन उस अवधि को पेंशन और पदोन्नति के लिए माना जाएगा।
- रिटायर जज अवनींद्र सिंह ने देहदान के लिए कैसे पंजीयन कराया?
- उन्होंने मेडिकल कॉलेज जबलपुर में अपनी और पत्नी की पंजीयन करवाई है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद






Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.