इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आयुष मलिक को दी अपनी मर्जी से रहने की स्वतंत्रता
हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर आयुष की हिरासत को अवैध माना
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली के आयुष मलिक को उसकी मर्जी से रहने और धर्म चुनने की अनुमति दी है। कोर्ट ने उसकी हिरासत को अवैध मानते हुए उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को मान्यता दी और उसे मुक्त करने का आदेश दिया। यह मामला आयुष के पिता की शिकायत पर शुरू हुआ था, जिसमें धर्मांतरण और संपत्ति हड़पने के आरोप शामिल थे।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शामली के आयुष मलिक की हिरासत को अवैध मानते हुए उसे अपनी मर्जी से रहने और धर्म चुनने की अनुमति दी है। कोर्ट ने आयुष के बयान के आधार पर उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सम्मानित किया।
शामली के चर्चित आयुष मलिक धर्मांतरण मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका की सुनवाई के दौरान बड़ा आदेश दिया। कोर्ट ने आयुष की हिरासत को अवैध मानते हुए उसे मुक्त करने का निर्देश दिया। इसके बाद आयुष को अदालत के सामने पेश किया गया, जहां उसने स्पष्ट किया कि उसने अपनी इच्छा से धर्मांतरण किया है और चांदनी कुरैशी से निकाह भी अपनी मर्जी से किया है।
आयुष ने अदालत को बताया कि उसके धर्मांतरण और निकाह में कोई दबाव, भय या जबरदस्ती नहीं थी। हाईकोर्ट ने उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए उसे अपनी पसंद के धर्म और जीवनशैली चुनने की अनुमति दी। कोर्ट ने यह भी कहा कि आयुष कहीं भी रहने के लिए स्वतंत्र है।
यह मामला आयुष के पिता देवराज मलिक की शिकायत के बाद शुरू हुआ था। छह जून को देवराज ने शामली शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि जिम ट्रेनर चांदनी कुरैशी ने आयुष को प्रेम जाल में फंसाकर उसका धर्मांतरण कराया और संपत्ति हड़पने का प्रयास किया। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर चांदनी कुरैशी, उसके पिता इस्लाम कुरैशी और तीन मौलवियों समेत आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था।
सात जून को पुलिस ने चांदनी कुरैशी और उसके पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन 24 जुलाई को जिला न्यायालय से दोनों को जमानत मिल गई। इसके बाद आयुष के दोस्त सुल्तान कारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की, जिसमें दावा किया गया कि आयुष को उसके पिता ने अवैध रूप से हिरासत में रखा है और उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता प्रभावित हो रही है।
नौ सितंबर के आदेश में हाईकोर्ट ने आयुष और उसके पिता को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश के तहत आयुष को पेश किया गया, जहां उसने अपने धर्मांतरण और निकाह को लेकर अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने उसकी स्वतंत्र इच्छा को मान्यता देते हुए उसे अपनी मर्जी से रहने और धर्म चुनने की आज़ादी दी।
शामली से शुरू हुआ यह विवाद पिता की शिकायत, पुलिस कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और जमानत के बाद हाईकोर्ट तक पहुंचा। अदालत के आदेश से आयुष की व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कानूनी संरक्षण मिला है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- आयुष मलिक ने कोर्ट में क्या बताया?
- आयुष ने बताया कि उसकी धर्मांतरण और निकाह पूरी तरह उसकी अपनी इच्छा से हुआ था, बिना किसी दबाव या भय के।
- फिर केस की शुरुआत कैसे हुई?
- आयुष के पिता ने आरोप लगाया था कि चांदनी कुरैशी ने उनके बेटे का धर्मांतरण कर संपत्ति हड़पने की कोशिश की।
- बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका किसने दायर की?
- आयुष के दोस्त सुल्तान कारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी।
- हाईकोर्ट का आदेश क्या था?
- हाईकोर्ट ने आयुष को उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए उसे आजाद रहने और धर्म चुनने की अनुमति दी।
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