इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस और अभियोजन को फोरेंसिक प्रशिक्षण का आदेश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर जलभराव पर एजेंसियों को फटकार लगाई, सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स और श्रम मामलों में अहम फैसले दिए
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को फोरेंसिक विज्ञान में प्रशिक्षण देने का आदेश दिया है और पूरे उत्तर प्रदेश में पुलिस केस डायरी तक न्यायालय की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए पायलट प्रोजेक्ट लागू करने को कहा है। कोर्ट ने नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराने और कार्यशालाएं करने के निर्देश भी दिए हैं।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
राज्य ब्यूरो। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को फोरेंसिक विज्ञान में प्रशिक्षण देने का आदेश दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर इलाके में जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया समेत एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई। सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स डिडक्शन और श्रम विवादों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने पुलिस और अभियोजन अधिकारियों को फोरेंसिक विज्ञान में कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया। कोर्ट ने तिलहर थाना में पायलट प्रोजेक्ट के तहत पुलिस केस डायरी तक न्यायालय की पूरी पहुंच वाली व्यवस्था पूरे उत्तर प्रदेश में लागू करने को कहा। प्रयागराज के तत्कालीन पुलिस आयुक्त और जिला जज की फोरेंसिक विज्ञान पर कार्यशालाओं के आयोजन की सराहना की गई। कोर्ट ने प्रमुख सचिव विधि एवं न्याय और डीजीपी को नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराने और जिला न्यायाधीशों को कार्यशालाएं कराने के निर्देश दिए। अधिकांश निर्देशों के पालन के बाद 17 सितंबर 2026 को मामले का अंतिम निस्तारण किया गया।
दिल्ली हाईकोर्ट का महिपालपुर जलभराव पर आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर इलाके में लगातार हो रहे जलभराव और ट्रैफिक जाम की समस्या पर नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया, दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड और अन्य एजेंसियों को फटकार लगाई। कोर्ट ने मुख्य सचिव को 15 अक्टूबर तक दो बैठकें बुलाकर फैसले लेने और 30 अक्टूबर तक एजेंसियों से स्टेटस रिपोर्ट मांगी। संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने और जवाबदेही तय करने को कहा गया। कोर्ट ने एनएचएआई के लापरवाह रवैये को स्वीकार्य नहीं बताया।
सुप्रीम कोर्ट के टैक्स और श्रम संबंधी फैसले
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के सर्कुलर कोर्ट पर बाध्यकारी नहीं होते। कोर्ट ने एक्सपोर्ट कोटा बेचने से मिले प्रीमियम को 'एक्सपोर्ट से इनकम' नहीं माना, इसलिए इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80HHC के तहत डिडक्शन का दावा अस्वीकार किया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब मुख्य नियोक्ता और कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों के बीच नियोक्ता-कर्मचारी संबंध न हो, तो मुख्य नियोक्ता को ग्रेच्युटी का भुगतान करने के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कंट्रोलिंग अथॉरिटी यह तय नहीं कर सकती कि भुगतान की जिम्मेदारी किसकी है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पहले हुए 'स्पेसिफिक परफॉर्मेंस' के आदेश के तहत हुई बिक्री को रिफंड का आदेश देकर रद्द करना गलत बताया।
दिल्ली हाईकोर्ट का अंतरिम भरण-पोषण आदेश
दिल्ली हाईकोर्ट ने नौकरी करने वाली पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण नहीं मिलने का आदेश दिया है। कोर्ट ने देखा कि आठ जनवरी 2021 से जून 2024 तक की अवधि के लिए महिला अंतरिम भरण-पोषण की हकदार नहीं हैं।
इससे सरकारी वकील मामलों में उचित सहयोग नहीं कर पाते
न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल, इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश
बहुत ज़्यादा कागज़ी कार्रवाई के बावजूद कोई ज़िम्मेदारी तय नहीं की गई और न ही कोई समय-सीमा तय की गई
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीज़न बेंच
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फोरेंसिक प्रशिक्षण के लिए क्या व्यवस्था की है?
- कोर्ट ने तिलहर थाना में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसमें पुलिस केस डायरी तक न्यायालय की पूरी पहुंच होगी।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने महिपालपुर जलभराव के संबंध में क्या कार्रवाई का निर्देश दिया?
- कोर्ट ने मुख्य सचिव को 15 अक्टूबर तक दो बैठकें बुलाकर फैसला लेने और 30 अक्टूबर तक स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
- सुप्रीम कोर्ट ने टैक्स डिडक्शन मामले में कौन सा मुख्य निर्णय दिया?
- कोर्ट ने एक्सपोर्ट कोटा बेचने से मिले प्रीमियम को 'एक्सपोर्ट से इनकम' नहीं माना और इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80HHC का दावा अस्वीकार किया।
- सुप्रीम कोर्ट ने श्रम विवादों में किन हालात में ग्रेच्युटी भुगतान से छूट दी है?
- जब मुख्य नियोक्ता और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों के बीच नियोक्ता-कर्मचारी संबंध नहीं होता, तो मुख्य नियोक्ता ग्रेच्युटी भुगतान के लिए जिम्मेदार नहीं रहता।
- दिल्ली हाईकोर्ट के अंतरिम भरण-पोषण आदेश में क्या खास है?
- कोर्ट ने देखा कि 8 जनवरी 2021 से जून 2024 तक पत्नी को भरण-पोषण का हकदार नहीं ठहराया गया है।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद





Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.