औरंगाबाद में 18 पुलिस अधिकारियों का तबादला, नए थानाध्यक्ष नियुक्त
एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने थानाध्यक्षों समेत कई पदाधिकारियों को नए पदस्थापन स्थल पर 24 घंटे में योगदान का आदेश दिया
औरंगाबाद जिले में पुलिस विभाग ने 18 अधिकारियों का स्थानांतरण किया है और नए थानाध्यक्ष नियुक्त किए हैं। सभी अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर नए पदस्थापन स्थल पर कार्यभार संभालने और प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, जिसमें उनके खिलाफ किसी प्रकार के निवारक आरोपों का न होना सुनिश्चित किया जाएगा।
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औरंगाबाद जिले में पुलिस पदाधिकारियों का बड़ा फेरबदल किया गया है। एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने 18 पुलिस अधिकारियों का तबादला करते हुए कई थानाध्यक्षों को नई जिम्मेदारी सौंपी है। सभी को 24 घंटे के भीतर नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।
एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा ने नरोत्तम को ओबरा का थानाध्यक्ष बनाया है, जबकि ओबरा के थानाध्यक्ष नीतीश कुमार को रिसियप की जिम्मेदारी दी गई है। कासमा थानाध्यक्ष अक्षयबर सिंह को पुलिस कार्यालय में आरटीपीएस, एफएस, आरटीआई, एससी-एसटी आयोग एवं मानवाधिकार आयोग का प्रभारी बनाया गया है। वहीं रूपेश कुमार को कासमा का थानाध्यक्ष नियुक्त किया गया है।
उमेश कुमार को सिमरा, चन्द्रहास सिंह को कुटुंबा, दीपक कुमार राय को जम्होर, अमरजीत कुमार को फेसर, वर्षा कुमारी को बड़ेम, संजीत राम को माली, पवन कुमार को अंबा और कुणाल कुमार को पौथु का थानाध्यक्ष बनाया गया है। प्रशांत कुमार को जिला सूचना इकाई का प्रभारी बनाया गया है।
इमरान अली को ओबरा थाना अनुसंधान इकाई, अभिषेक कुमार को टंडवा थाना अनुसंधान इकाई, राहुल राज को अंबा थानाध्यक्ष एवं नगर थाना अनुसंधान इकाई, सूर्यवीर कुमार गुप्ता को कुटुम्बा थाना अनुसंधान इकाई और संजय कुमार को नगर थाना अनुसंधान इकाई में पदस्थापित किया गया है।
आदेश में थानाध्यक्षों को योगदान से पहले प्रमाण पत्र देने का निर्देश दिया गया है। प्रमाण पत्र में यह सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित अधिकारी किसी न्यायालय से दोषसिद्ध न हों, किसी कांड के अनुसंधान के दौरान पुलिस द्वारा अभियुक्त न ठहराए गए हों तथा महिलाओं से दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार या अभिरक्षा में हिंसा जैसे नैतिक अधमता संबंधी आरोपों में विभागीय कार्रवाई में दोषी न पाए गए हों।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- थानाध्यक्ष नियुक्ति के लिए क्या प्रमाण पत्र आवश्यक हैं?
- प्रमाण पत्र में अधिकारी का न्यायालय से दोषमुक्त होना जरूरी है।
- कौन-कौन से थानों के अनुसंधान इकाई में अधिकारी नियुक्त हुए?
- ओबरा, टंडवा, अंबा, कुटुम्बा और नगर थाना अनुसंधान इकाई के अधिकारियों को पदस्थ किया गया।
- प्रमाण पत्र में किन नैतिक आरोपों का उल्लेख होता है?
- महिलाओं से दुर्व्यवहार, भ्रष्टाचार और अभिरक्षा में हिंसा जैसे आरोपों की जांच शामिल है।
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