बिजुआ में नवभारत साक्षरता परीक्षा में 261 ने दी भागीदारी
15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाने का प्रयास जारी
बिजुआ में नवभारत साक्षरता परीक्षा में 261 परीक्षार्थियों ने भाग लिया, जिसमें 67 पुरुष और 194 महिलाएं शामिल थीं। यह परीक्षा भारत सरकार के उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत असाक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाने के उद्देश्य से 30 केंद्रों पर आयोजित की गई थी। परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई और इसमें भाग लेने वालों को प्रमाण पत्र प्रदान किए जाएंगे।
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बिजुआ खीरी। बिजुआ में रविवार को नवभारत साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 261 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। खंड शिक्षा अधिकारी नागेंद्र चौधरी ने बताया कि परीक्षा 30 केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
परीक्षा में 67 पुरुष और 194 महिला परीक्षार्थी शामिल थे, जिनमें महिलाओं की अधिक भागीदारी इस कार्यक्रम की सफलता को दर्शाती है। भारत सरकार के उल्लास-नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत यह परीक्षा असाक्षरों को साक्षर बनाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
खंड शिक्षा अधिकारी नागेंद्र चौधरी ने बताया कि जो लोग किसी कारणवश पढ़ाई नहीं कर पाए, उन्हें इस कार्यक्रम के माध्यम से पढ़ना-लिखना सिखाया जा रहा है ताकि वे अपने दैनिक कार्यों में आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा, "साक्षरता सिर्फ पढ़ने-लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाने और समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम है।"
अधिकारी कोमल चौधरी ने बताया कि नवभारत साक्षरता कार्यक्रम उन लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने की अहम पहल है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए हैं। जिले में 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षरों को साक्षर बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।
परीक्षा के लिए ब्लॉक के विभिन्न ग्राम पंचायतों में 30 केंद्र बनाए गए थे, जहां शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई थी। सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाएं की गईं और शिक्षकों ने परीक्षार्थियों को आवश्यक जानकारी दी। परीक्षा में सफल होने वाले परीक्षार्थियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए जाएंगे।
परीक्षा में प्रतिभागियों ने पढ़ने-लिखने के साथ-साथ दैनिक जीवन से जुड़े बुनियादी ज्ञान का प्रदर्शन किया। खंड शिक्षा अधिकारी विमल तिवारी के निर्देशन में परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए शिक्षकों और विभाग के कर्मचारियों ने व्यवस्थाएं संभालीं।
परीक्षा के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विभिन्न केंद्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के समय विद्यालयों में परीक्षा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार संचालित होती मिली और सभी शिक्षक उपस्थित थे। परीक्षार्थी शांतिपूर्ण वातावरण में परीक्षा दे रहे थे।
साक्षरता केवल पढ़ना-लिखना सीखना नहीं, बल्कि व्यक्ति को आत्मनिर्भर, जागरूक और अपने अधिकारों व दायित्वों के प्रति सजग बनाने का माध्यम है। परीक्षा से नवसाक्षरों के ज्ञान और कौशल का आकलन कर उन्हें आगे की सीखने की प्रक्रिया से जोड़ा जाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नवभारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
- यह कार्यक्रम असाक्षरों को पढ़ना-लिखना सिखाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहता है।
- परीक्षा के दौरान किन व्यवस्थाओं का ध्यान रखा गया?
- शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई और सभी केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्था एवं निरीक्षण किया गया।
- साक्षरता का सामाजिक महत्व क्या है?
- साक्षरता से व्यक्ति समाज की मुख्यधारा से जुड़ता है और अपने अधिकारों-दायित्वों को समझता है।
- परीक्षा में बुनियादी ज्ञान का क्या रोल था?
- प्रतिभागियों ने पढ़ने-लिखने के साथ दैनिक जीवन से जुड़े बुनियादी ज्ञान का भी प्रदर्शन किया।
- कौन परीक्षा का संचालन कर रहा था?
- खंड शिक्षा अधिकारी विमल तिवारी के निर्देशन में शिक्षकों और विभाग के कर्मचारियों ने परीक्षा आयोजित की।
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