भाजपा ने सुशीला गुप्ता को सभापति का अधिकृत प्रत्याशी बनाया
प्रभु पंड्या निर्दलीय बने, भाजपा में सस्पेंस खत्म, बहुमत के बावजूद खींचतान
भाजपा ने डूंगरपुर नगर परिषद सभापति पद के लिए सुशीला गुप्ता को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है, जबकि पूर्व जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या अब निर्दलीय उम्मीदवार हैं। इससे पार्टी के अंदर मतभेद उभरे हैं और सभापति चुनाव में भाजपा के अंदरूनी समीकरण महत्वपूर्ण बने हुए हैं। कांग्रेस ने भरत नागदा को उम्मीदवार बनाया है।
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डूंगरपुर। डूंगरपुर नगर परिषद सभापति पद के लिए भाजपा ने सुशीला गुप्ता को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है। पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष प्रभु पंड्या अब निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। इससे पार्टी के भीतर खींचतान की स्थिति बन गई है।
भाजपा के दो दावेदार प्रभु पंड्या और सुशीला गुप्ता ने सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। दोनों ने पार्टी और संगठन के आदेश पर नामांकन भरने का दावा किया। बुधवार को भाजपा के सह संगठन प्रभारी ने करीब 2.30 बजे निर्वाचन अधिकारी को पार्टी का सिंबल बंद लिफाफे में सौंपा, लेकिन अधिकृत प्रत्याशी का नाम घोषित नहीं किया गया। शाम करीब 3 बजे निर्वाचन विभाग ने सूचना बोर्ड पर भाजपा के दो और कांग्रेस के एक नामांकन की जानकारी चस्पा की।
गुरुवार को नामांकन पत्रों की जांच के दौरान बंद लिफाफा खोला गया और सुशीला गुप्ता को भाजपा का अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया गया। भाजपा के पास नगर परिषद में 24 वार्डों में जीत दर्ज है, जिनमें दो निर्विरोध हैं। वार्ड 31 से भाजपा से बागी होकर निर्दलीय चुनाव जीत चुके सुनील जैन ने भी भाजपा का समर्थन दिया है। ऐसे में भाजपा के पास सभापति बनाने के लिए पर्याप्त संख्या है।
हालांकि, प्रभु पंड्या ने अपना नामांकन वापस नहीं लिया है, इसलिए वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में भाजपा के सामने चुनौती बने रहेंगे। इससे सभापति चुनाव में पार्टी के अंदरूनी समीकरण महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कांग्रेस की ओर से भरत नागदा ने सभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया है। डूंगरपुर निकाय में कांग्रेस के 12 पार्षद हैं, जबकि बीएपी के पास 3 पार्षद हैं। दोनों दलों के आंकड़े मिलाकर भी संख्या 15 ही होती है।
सुशीला गुप्ता पार्टी में सक्रिय चेहरा नहीं हैं, लेकिन उनके पति केके गुप्ता के पूर्व सभापति के अनुभव को उनके टिकट के पीछे अहम माना जा रहा है। केके गुप्ता के कार्यकाल में डूंगरपुर नगर परिषद को स्वच्छता के क्षेत्र में देशभर में कई पुरस्कार मिले थे। छोटे शहरों की श्रेणी में नगर परिषद लगातार पांच साल तक शीर्ष पर रहा। स्वच्छता के क्षेत्र में गुप्ता की पहचान और नगर परिषद का अनुभव सुशीला गुप्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण रहा।
प्रभु पंड्या करीब 40 वर्षों से भाजपा और संगठन से जुड़े हैं। वे भाजपा युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री, जिलाध्यक्ष, किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष और भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य जैसे पदों पर रह चुके हैं। आरएसएस से उनके जुड़ाव के कारण भी संगठन में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। सभापति पद के लिए उनका नाम मजबूत दावेदारों में था, लेकिन पार्टी ने सुशीला गुप्ता को अधिकृत प्रत्याशी बनाया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्रभु पंड्या ने अपना नामांकन वापस क्यों नहीं लिया?
- वे भाजपा के अंदरूनी समीकरण को चुनौती देते हुए निर्दलीय प्रत्याशी बने हुए हैं।
- सुशीला गुप्ता को अधिकृत प्रत्याशी क्यों चुना गया?
- उनके पति केके गुप्ता के स्वच्छता क्षेत्र के अनुभव और पुरस्कारों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
- डूंगरपुर नगर परिषद में भाजपा की स्थिति क्या है?
- भाजपा के पास 24 वार्डों में जीत है जिनमें 2 निर्विरोध शामिल हैं।
- कांग्रेस ने सभापति पद के लिए कौन नामांकन दाखिल किया है?
- कांग्रेस की ओर से भरत नागदा ने नामांकन दाखिल किया है।
- प्रभु पंड्या का भाजपा संगठन में योगदान कैसा रहा है?
- वे युवामोर्चा जिलाध्यक्ष, जिला महामंत्री, किसान मोर्चा प्रदेश उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं।
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