भाकियू ने सरकार को जगाने की शुरुआत कर दी है: नरेश टिकैत
मुजफ्फरनगर में भाकियू की महापंचायत में किसानों ने 500 रुपये प्रति कुंतल गन्ने का मूल्य तय करने की मांग की
भारतीय किसान यूनियन की मुजफ्फरनगर महापंचायत में किसानों ने गन्ने के मूल्य 500 रुपये से कम न होने की मांग की और सरकार से बढ़ती लागत के अनुसार राहत देने का आग्रह किया। संगठन ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर कृषि मसौदा और ट्रेड़ डील संबंधी उनकी मांगें नहीं मानीं तो बड़े आंदोलन होंगे। उन्होंने कहा कि बातचीत से समाधान होना चाहिए और किसी राजनीतिक हित के लिए किसानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
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मुजफ्फरनगर में भारतीय किसान यूनियन की महापंचायत में विधायक उमेश शर्मा समेत कई नेताओं ने किसानों के हितों के लिए बड़े आंदोलन की बात कही। अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत ने कहा कि भाकियू ने सरकार को जगाने की शुरुआत कर दी है और इस बार गन्ने का मूल्य 500 रुपये से कम नहीं होगा।
राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर किसानों के लिए खजाने खोलने की मांग की। उन्होंने कहा कि राजा का जन्मदिन है, वे किसानों के लिए दौलत लुटाएं। महापंचायत में पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी मौजूद रहे।
चौधरी नरेश टिकैत ने बताया कि चुनाव की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन किसानों को अभी तक गन्ने के भाव का पता नहीं है। उन्होंने कहा कि इस बार गन्ना मूल्य 500 रुपये से कम पर किसान मानने वाला नहीं है। राकेश टिकैत ने कहा कि किसानों को बाजार के आधार पर मूल्य मिलना चाहिए।
विधायक उमेश शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड में किसानों के हितों के लिए भाकियू के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे। श्याम सिंह मलिक ने बताया कि सभी खाप चौधरी और थांबेदार किसान हितों की लड़ाई के लिए तैयार हैं।
किसान यूनियन ने सरकार से मांग की है कि बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों को राहत दी जाए, फसलों का उचित मूल्य तय किया जाए और लंबित मुआवजे का भुगतान कराया जाए। उन्होंने कृषि मसौदे को लेकर भारत-अमेरिका ट्रेड डील रद्द करने की भी मांग की, अन्यथा देश में बड़े आंदोलन होंगे।
किसानों ने चीनी मिलों के नए पेराई सत्र शुरू होने से पहले ही गन्ने का मूल्य घोषित करने की मांग की, ताकि किसानों को अपनी फसल के मूल्य को लेकर असमंजस न रहे।
भारतीय किसान यूनियन का कहना है कि संगठन का किसी राजनीतिक दल से कोई वास्ता नहीं है और किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत और सकारात्मक तरीके से किया जाना चाहिए। सरकार को किसी राजनीतिक दुर्भावना के तहत किसानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- भाकियू ने सरकार से क्या विशेष मांगें की हैं?
- भाकियू ने बढ़ती लागत को देखते हुए किसानों को राहत, फसलों का उचित मूल्य और लंबित मुआवजे का भुगतान करने की मांग की है।
- किस किसान मोर्चों के पदाधिकारी महापंचायत में शामिल हुए थे?
- पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारी महापंचायत में मौजूद थे।
- भारतीय किसान यूनियन का राजनीतिक दलों से संबंध क्या है?
- भारतीय किसान यूनयन का किसी राजनीतिक दल से कोई वास्ता नहीं है और वे किसानों की समस्याओं का समाधान बातचीत से चाहते हैं।
- गन्ने के मूल्य को लेकर किसानों की क्या चिंता है?
- किसानों ने चीनी मिलों के पेराई सत्र शुरू होने से पहले गन्ने के मूल्य घोषित करने की मांग की है ताकि उन्हें अपने फसल के मूल्य के बारे में स्पष्टता रहे।
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