कोरबा में काला नमक धान की अर्ली वैरायटी में बालियां निकलीं
दशहरा तक कटाई शुरू, कम लागत और बेहतर कीमत से किसानों को फायदा
कोरबा जिले में कम समय में पकने वाली काला नमक धान की अर्ली वैरायटी में बालियां निकलने लगी हैं और दशहरा तक कटाई शुरू हो जाएगी। युवा किसान त्रिलोकी ने 'जीरो-बजट प्राकृतिक खेती' के तहत इस धान की सफल खेती की है, जिससे लागत कम और आय अधिक होने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
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कोरबा। कोरबा जिले में कम समय में पकने वाली काला नमक धान की अर्ली वैरायटी में बालियां निकलने लगी हैं। दशहरा पर्व के दौरान ही इन खेतों में कटाई शुरू हो जाएगी। जिले में इस किस्म का लगभग 10 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल है।
मिर्जापुर गांव के युवा किसान त्रिलोकी ने पारंपरिक और प्राकृतिक खेती के जरिए काला नमक धान की सफल खेती कर एक नई राह दिखाई है। वे 'जीरो-बजट प्राकृतिक खेती' के सिद्धांतों का पालन करते हुए इस धान को उगा रहे हैं।
उनके एक एकड़ खेत में धान की रोपाई और शुरुआती देखभाल में कुल खर्च पांच हजार रुपये आया है। रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों का इस्तेमाल न करने से लागत कम रही।
काला नमक धान अपनी खुशबू, स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है। इसकी गुणवत्ता के कारण बाजार में इसकी मांग अधिक है। त्रिलोकी के अनुसार यह धान बाजार में 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिकता है।
यह किस्म जल्दी तैयार हो जाती है, इसलिए जब बाजार में अन्य धान की आवक कम होती है, तब इसकी कटाई होने से किसानों को अच्छी कीमत मिलती है।
स्थानीय विशेषज्ञ मानते हैं कि कम लागत, कम समय में तैयार होने वाली और बेहतर बाजार मूल्य वाली काला नमक धान की खेती किसानों की आय दोगुनी करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- काला नमक धान किस वजह से लोकप्रिय है?
- यह अपनी खुशबू, स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है, जिससे इसकी बाजार में मांग ज्यादा है।
- त्रिलोकी ने खेती में लागत कैसे कम की?
- उन्होंने रासायनिक खाद और महंगे कीटनाशकों का इस्तेमाल नहीं किया, जिससे लागत घट गई।
- जीरो-बजट प्राकृतिक खेती क्या है?
- यह खेती का एक तरीका है जो प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए लागत कम करके उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित है।
- काला नमक धान जल्दी तैयार होने का किसानों को क्या लाभ है?
- जब बाजार में अन्य धान की आवक कम होती है, तब इस धान की कटाई होने से किसानों को बेहतर कीमत मिलती है।
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