ब्लड शुगर घटाने वाली दवा से कीटोएसिडोसिस का खतरा बढ़ा
स्वीडन के शोध में SGLT2 इन्हिबटर दवाओं से गंभीर साइड इफेक्ट्स का खुलासा
हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि ब्लड शुगर घटाने वाली SGLT2 इन्हिबिटर दवाओं से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का खतरा बढ़ सकता है, खासकर उन मरीजों में जिनका वजन कम हो या जिनकी किडनी में पहले से समस्या हो। शोध के अनुसार, डायबिटीज़ के मरीजों को कीटोएसिडोसिस के लक्षणों पर सावधानी रखनी चाहिए और डॉक्टर से समय पर सलाह लेनी चाहिए। डॉक्टरों को इन दवाओं को सुरक्षित उपयोग के लिए मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति का मूल्यांकन करना आवश्यक है।
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दुनियाभर में लगभग 83 करोड़ लोग टाइप-2 डायबिटीज़ से पीड़ित हैं, जो इस आयु वर्ग की आबादी का 11.1% है। हालिया अध्ययन में ब्लड शुगर घटाने वाली SGLT2 इन्हिबटर दवाओं से कीटोएसिडोसिस नामक जानलेवा स्थिति का खतरा बढ़ने की चेतावनी दी गई है।
SGLT2 इन्हिबटर दवाएं टाइप-2 डायबिटीज़ में अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती हैं। ये दवाएं हार्ट फेलियर और किडनी की बीमारी से जुड़े मरीजों को भी लाभ पहुंचाती हैं। स्वीडन के कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोध में करीब 2.8 लाख मरीजों के हेल्थ रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। शोध में पाया गया कि कुछ परिस्थितियों में इन दवाओं से डायबिटिक कीटोएसिडोसिस का खतरा हो सकता है, खासकर उन लोगों में जिनके पहले से किडनी की समस्या है या जिनका वजन कम है।
कीटोएसिडोसिस एक गंभीर स्थिति है जिसमें खून में कीटोन्स नामक हानिकारक पदार्थ जरूरत से ज्यादा जमा हो जाते हैं। यह तब होता है जब शरीर ऊर्जा के लिए ग्लूकोज की जगह फैट को जलाने लगता है। कीटोन्स का स्तर बढ़ने से शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है और स्थिति जानलेवा हो सकती है।
शोध में यह भी बताया गया कि डायबिटीज़ के दौरान संक्रमण कीटोएसिडोसिस शुरू होने का सबसे आम कारण था। इसके अलावा, कीटोएसिडोसिस से किडनी फेलियर और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ जाता है।
इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोध के अनुसार, 2015 से 2023 के बीच कई देशों में कीटोएसिडोसिस के मामले 81 फीसदी बढ़े हैं। इस स्थिति में मरीज को अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, पेट दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और धुंधला दिखाई देना जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डायबिटीज़ के मरीजों को इन लक्षणों को सामान्य कमजोरी या शुगर की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और इलाज से इस स्थिति की गंभीरता कम की जा सकती है।
कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट के असिस्टेंट प्रोफेसर पीटर उएडा ने कहा कि SGLT2 इन्हिबटर दवाओं से कई मरीजों को लाभ होता है, लेकिन डॉक्टरों को मरीज की पूरी हिस्ट्री जांचकर जोखिम वाले मरीजों की पहचान करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रिसर्च इन दवाओं के इस्तेमाल को बंद करने की सलाह नहीं देती, बल्कि सुरक्षित उपयोग पर जोर देती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- SGLT2 इन्हिबटर दवाएं क्या करती हैं?
- ये दवाएं टाइप-2 डायबिटीज़ में अतिरिक्त शुगर को पेशाब के जरिए बाहर निकालने में मदद करती हैं।
- कीटोएसिडोसिस के सामान्य लक्षण क्या हैं?
- अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, पेट दर्द, जी मिचलाना, उल्टी और धुंधला दिखाई देना।
- कीटोएसिडोसिस के बढ़ने का सबसे आम कारण क्या है?
- डायबिटीज़ के दौरान संक्रमण कीटोएसिडोसिस शुरू होने का सबसे आम कारण है।
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