नागौर में पंचगव्य से बनी इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं तैयार
गोबर, गौमूत्र और मिट्टी से बनी प्रतिमाएं प्रदूषण मुक्त विसर्जन का संदेश देती हैं
नागौर के जयप्रकाश शर्मा ने पंचगव्य से प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से मुक्त इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बनाई हैं, जिनमें देसी गाय के गोबर, गौमूत्र, घी, लाल मिट्टी और बिल्व पत्र के बीज का उपयोग होता है। इन प्रतिमाओं का विसर्जन घर पर गमले में किया जाता है, जहां वे धीरे-धीरे खाद में बदल जाती हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
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नागौर। नागौर के शारदा पुरम कॉलोनी निवासी जयप्रकाश शर्मा पिछले एक महीने से पंचगव्य से इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बना रहे हैं। ये प्रतिमाएं प्लास्टर ऑफ पेरिस और रासायनिक रंगों से मुक्त हैं, जिससे पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
जयप्रकाश बताते हैं कि इन प्रतिमाओं को बनाने में देसी गाय के गोबर, गौमूत्र, देसी घी, लाल मिट्टी और बिल्व पत्र के बीज जैसी प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। उन्होंने कहा, "प्रतिमाओं को आकर्षक और सुंदर रूप देने के लिए भी किसी तरह के केमिकल रंगों का उपयोग नहीं किया जाता।" गोबर को सुखाकर पाउडर बनाया जाता है, फिर उसमें मिट्टी, गौमूत्र और घी मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है जो प्रतिमा को मजबूती देता है।
प्रतिमा बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है और इसमें गंगाजल भी मिलाया जाता है। जयप्रकाश का उद्देश्य धार्मिक पर्व गणेश चतुर्थी के माध्यम से लोगों को पर्यावरण और गाय संरक्षण के प्रति जागरूक करना है।
छोटी प्रतिमाएं घरों में स्थापित करने के लिए खास पसंद की जा रही हैं और इनकी मांग नागौर के साथ राजस्थान के अन्य शहरों से भी आ रही है। पंचगव्य से बनी ये प्रतिमाएं गुजरात, यूके और लंदन तक भेजी जा चुकी हैं।
इन प्रतिमाओं की सबसे बड़ी खासियत उनका विसर्जन है। पारंपरिक प्रतिमाओं की तरह इन्हें नदी या तालाब में विसर्जित करने की जरूरत नहीं होती। श्रद्धालु इन्हें घर पर गमले में रखकर विसर्जित कर सकते हैं। गमले की मिट्टी में पानी डालने पर प्रतिमा धीरे-धीरे घुलकर खाद में बदल जाती है, जो पौधों की बढ़वार में मदद करती है।
जयप्रकाश कहते हैं कि यह पहल इको-फ्रेंडली गणेश उत्सव को बढ़ावा देने की मिसाल बन सकती है। धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का यह अनूठा संदेश प्रदूषण कम करने में सहायक होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पंचगव्य से बनी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कैसे किया जाता है?
- इन प्रतिमाओं को घर पर गमले में रखकर विसर्जित किया जा सकता है, जहां मिट्टी में पानी डालने से वे धीरे-धीरे घुलकर खाद बन जाती हैं।
- जयप्रकाश शर्मा का इस पहल का उद्देश्य क्या है?
- जयप्रकाश का उद्देश्य गणेश चतुर्थी के माध्यम से पर्यावरण और गाय संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
- क्या इन प्रतिमाओं में रासायनिक रंगों का इस्तेमाल होता है?
- नहीं, इन प्रतिमाओं को आकर्षक बनाने के लिए भी किसी तरह के केमिकल रंगों का उपयोग नहीं किया जाता।
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