भारत में चार साल में बढ़ा चीतों का कुनबा, 52 चीते अब मौजूद
मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से आए चीते सफलतापूर्वक ढले
भारत में चार साल के संरक्षण प्रयासों के बाद वर्तमान में कुल 52 चीते हैं, जिनमें से 49 कूनो राष्ट्रीय उद्यान और तीन गांधी सागर अभयारण्य में हैं। तीन अफ्रीकी देशों से लाए गए चीतों की प्रजनन सफलता के कारण चीता जनसंख्या बढ़ी है और उन्हें नए बाड़ों से मुक्त कर प्राकृतिक जंगलों में छोड़ा जा रहा है। प्रोजेक्ट का अगला उद्देश्य भारत में टिकाऊ मेटा-पॉपुलेशन विकसित करना और उनके रहने के लिए नए क्षेत्रों का विस्तार करना है।
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17 सितंबर 2022 को भारत के वन्यजीव संरक्षण के इतिहास में एक महत्वपूर्ण दिन था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया से लाए गए आठ चीतों को छोड़ा। इसके बाद फरवरी 2023 और 2026 में दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से चीते भारत लाए गए, जिससे संरक्षण कार्यक्रम को विस्तार मिला।
प्रोजेक्ट चीता केवल जानवरों को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया नहीं था, बल्कि यह भारत की परिस्थितियों में चीतों के व्यवहार, स्वास्थ्य और नए परिवेश में ढलने की वैज्ञानिक परीक्षा थी। टीम ने भारतीय वातावरण, मौसम और परभक्षी तंत्र के अनुसार चीतों के स्वास्थ्य प्रबंधन और व्यवहार में बदलावों को समझा।
दूसरे वर्ष का पूरा ध्यान भारत में जन्मे शावकों के विकास और उनके जीवित रहने पर था। डॉक्टरों और ट्रैकिंग टीमों की निगरानी में 13 शावकों ने एक साल से अधिक समय तक सफल जीवन बिताया। 2025 में चीतों को कूनो के बाड़ों से निकालकर खुले जंगलों में छोड़ा गया, जहां मध्य प्रदेश के 12 जिलों में फैले भू-भाग में 24 घंटे उनकी मॉनिटरिंग की गई।
चीते धीरे-धीरे नए परिवेश में पूरी तरह ढल गए और प्राकृतिक रूप से शिकार करने तथा विचरण करने में सक्षम हुए। प्रोजेक्ट के चौथे वर्ष में प्रजनन करने वाली मादा चीतों का स्थापित होना और भारत में जन्मी दूसरी पीढ़ी के शावकों का जीवित रहना बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
चीते कूनो से आगे बढ़कर गांधी सागर अभयारण्य तक पहुंच गए। भारत में चीतों की आनुवंशिक वंशावली मजबूत बनाए रखने के लिए तीन अफ्रीकी देशों से चीतों को लाया गया। नामीबिया से लाए गए आठ चीतों में से तीन जीवित हैं, जिनके 22 शावकों के जन्म के साथ इस कुनबे की संख्या 25 हो गई है। दक्षिण अफ्रीका से आए 12 चीतों में से आठ जिंदा हैं, और भारत में पैदा हुए 10 शावकों के साथ इस समूह की कुल संख्या 18 है।
फरवरी 2026 में बोत्सवाना से नौ और चीते भारत लाए गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय चीता पुनर्स्थापना का आधार और मजबूत हुआ। फिलहाल भारत में कुल 52 चीते हैं, जिनमें से 49 कूनो राष्ट्रीय उद्यान और तीन गांधी सागर अभयारण्य में हैं।
प्रोजेक्ट का अगला चरण केवल चीतों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका लक्ष्य भारत में टिकाऊ मेटा-पॉपुलेशन तैयार करना है। इसके लिए चीतों के रहने के लिए नए और उपयुक्त इलाकों का विस्तार किया जाएगा। कूनो से गांधी सागर और मध्य प्रदेश-राजस्थान की सीमा से लगे जंगलों को जोड़ना योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिससे चीते बिना बाधा के बड़े प्राकृतिक क्षेत्र में विचरण कर सकेंगे और अपनी आबादी बढ़ा सकेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्रोजेक्ट चीता का मुख्य उद्देश्य क्या था?
- यह केवल चीते स्थानांतरित करने का काम नहीं था, बल्कि उनकी भारतीय पर्यावरण में स्वास्थ्य, व्यवहार और जीवित रहने की वैज्ञानिक जांच भी थी।
- भारत में चीतों की आबादी कैसे बढ़ी?
- अफ्रीका के तीन देशों से चीते लाकर और उनके सफल प्रजनन से भारत में चीतों की संख्या में वृद्धि हुई।
- प्रोजेक्ट का अगला चरण क्या है?
- चेते के लिए नए और उपयुक्त क्षेत्र बनाने, मेटा-पॉपुलेशन तैयार करने तथा जंगलों को जोड़ने का योजना है जिससे आबादी बढ़े।
- चीता बच्चों का बचपन कैसा रहा?
- विशेष निगरानी के तहत 13 शावकों ने एक साल से अधिक सफल जीवन बिताया, जो संरक्षण के लिए अहम है।
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