दोहरीघाट में गणपति पंडालों की सजावट लगभग पूरी
बप्पा की बड़ी और छोटी मूर्तियों के साथ पूजा-अर्चना का खास महत्व
दोहरीघाट में गणेशोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं और पंडालों की सजावट लगभग पूरी हो चुकी है। इस बार भी बड़ी मूर्ति के साथ छोटी मूर्ति रखने की परंपरा निभाई जा रही है, जो गणपति बप्पा के स्थायी निवास का प्रतीक है।
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दोहरीघाट। दोहरीघाट में गणेशोत्सव की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कोषाध्यक्ष विशाल खत्री ने बताया कि विभिन्न क्षेत्रों में पंडालों की सजावट लगभग पूर्ण हो चुकी है। इस दौरान बड़ी मूर्ति के साथ छोटी मूर्ति रखने की परंपरा भी निभाई जा रही है।
गणेशोत्सव पूरे दस दिनों तक चलता है, जिसमें भक्त गणपति की पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं। जगह-जगह पंडाल सजाए जाते हैं और घरों में भी गणपति की स्थापना होती है। सुबह-शाम आरती और प्रसाद वितरण के साथ भक्त भक्ति में झूमते हैं।
पंडालों में बड़ी मूर्ति के साथ छोटी मूर्ति भी रखी जाती है, जो गणपति बप्पा के स्थायी निवास का प्रतीक है। बड़ी मूर्ति का विसर्जन होता है, लेकिन छोटी मूर्ति घर में बनी रहती है। यह परंपरा इस विश्वास को दर्शाती है कि गणपति बप्पा केवल कुछ दिनों के मेहमान नहीं, बल्कि सदैव घर के सदस्य हैं।
छोटी मूर्ति की पूजा से घर में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है। जब बड़ी मूर्ति का विसर्जन होता है, तब भक्त भावुक हो जाते हैं, लेकिन छोटी मूर्ति उन्हें यह विश्वास देती है कि बप्पा उनके आस-पास ही हैं और अगले वर्ष फिर से आएंगे।
गणपति की पूजा और भक्ति का यह उत्सव देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। भक्तों के बीच 'गणपति बप्पा मोरया' के जयकारे गूंजते हैं, जो भक्ति की गहराई को दर्शाते हैं।
महाराष्ट्र के मोरया गोसावी को भगवान गणेश का परम भक्त माना जाता है। उनकी भक्ति की कथा चिंचवड़ और मोरगांव के गणेश मंदिरों से जुड़ी है। करीब 14वीं शताब्दी में वे नियमित रूप से चिंचवड़ से मोरगांव तक लंबी यात्रा कर गणपति की आराधना करते थे। उनकी आस्था इतनी प्रगाढ़ थी कि उम्र बढ़ने के बावजूद वे यह यात्रा करते रहे।
यह परंपरा और भक्ति आज भी गणेशोत्सव के दौरान जीवित है, जो भक्तों को भगवान गणेश के प्रति गहरा विश्वास और प्रेम प्रदान करती है।
कोषाध्यक्ष विशाल खत्री ने कहा, "गणेशोत्सव को लेकर विभिन्न क्षेत्रों में पंडालों की सजावट लगभग पूर्ण हो चुकी है।"
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेशोत्सव के दौरान छोटी मूर्ति का क्या महत्व है?
- छोटी मूर्ति गणपति का स्थायी निवास दर्शाती है और घर में बनी रहती है जिससे भक्तों को उनके आस-पास होने का विश्वास मिलता है।
- गणेशोत्सव में भक्त कैसे भाग लेते हैं?
- भक्त सुबह-शाम आरती करते हैं, प्रसाद वितरण में हिस्सा लेते हैं और गणपति की पूजा-अर्चना में लीन रहते हैं।
- मोऱया गोसावी कौन थे और उनकी भक्ति क्यों महत्वपूर्ण है?
- मोऱया गोसावी 14वीं शताब्दी के भगवान गणेश के परम भक्त थे जो चिंचवड़ से मोरगांव तक लंबी यात्राएं कर आराधना किया करते थे।
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