धौलपुर में देव छठ मेले में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा
तीर्थराज मचकुंड पर तीन किलोमीटर तक लगी श्रद्धालुओं की कतारें, नवविवाहिताएं कलिंगिया विसर्जित कर रही हैं
धौलपुर के तीर्थराज मचकुंड में देव छठ मेला राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों के श्रद्धालुओं की उपस्थिति में जारी है। मेले में सुरक्षा और व्यवस्थाओं का ध्यान रखा जा रहा है, जबकि भारी भीड़ के कारण यातायात में जाम की स्थिति बनी रही।
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धौलपुर। धौलपुर के तीर्थराज मचकुंड में देव छठ मेले का आयोजन श्रद्धा और उत्साह के साथ जारी है। मेले की व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी कर रहे मेला मजिस्ट्रेट और एसडीएम सुरेश राव ने सुरक्षा सहित आवश्यक इंतजाम किए हैं।
तीर्थराज मचकुंड पर देव छठ मेले में राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और हरियाणा समेत कई राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। पवित्र सरोवर में नहाने और पूजा-पाठ के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें तीन किलोमीटर दूर तक लगी हैं।
स्थानीय परंपरा के अनुसार नवविवाहिताएं कलिंगिया विसर्जित करती हैं, जो इस मेले की खास धार्मिक रस्म है। बड़ी संख्या में नवविवाहिताएं धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ कलिंगिया विसर्जित करने मचकुंड पहुंच रही हैं।
मचकुंड प्राचीन धार्मिक आस्था का केंद्र है, जिसका संबंध राजा मचकुंड से माना जाता है। श्रद्धालु मचकुंड सरोवर में नहाकर पूजा-पाठ करते हैं और धार्मिक परंपराओं में हिस्सा लेते हैं।
मेले में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के कारण वाटर वर्क्स चौराहे से गुलाब बाग तक दिनभर जाम की स्थिति बनी रही। यातायात व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए पुलिसकर्मी लगातार काम कर रहे हैं।
मेला मजिस्ट्रेट और एसडीएम सुरेश राव लगातार घाटों पर जाकर व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं और श्रद्धालुओं से बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "मेले में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और सुरक्षा सहित अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं।" उन्होंने श्रद्धालुओं से अपील की है कि मचकुंड में गहरे पानी में न जाएं और प्रशासन की तरफ से तय की गई जगहों पर ही स्नान करें।
मचकुंड महाराज का यह मेला धौलपुर की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। शाम को पहाड़ और अब्दाल शाह जी की मजार पर भी धार्मिक कार्यक्रम और उर्स का आयोजन होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मचकुंड का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व क्या है?
- मचकुंड प्राचीन धार्मिक आस्था का केंद्र है और इसका संबंध राजा मचकुंड से जुड़ा हुआ है।
- मेला मजिस्ट्रेट सुरेश राव ने श्रद्धालुओं को क्या निर्देश दिए?
- उन्होंने श्रद्धालुओं से गहरे पानी में न जाने और प्रशासन द्वारा निर्धारित स्नान स्थलों का ही उपयोग करने की अपील की।
- मेले में सुरक्षा व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जा रही है?
- मेले में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और मेला मजिस्ट्रेट लगातार व्यवस्थाओं का जायजा ले रहे हैं।
- धार्मिक रस्मों में नवविवाहिताओं की भूमिका क्या है?
- नवविवाहिताएं कलिंगिया विसर्जन जैसी खास धार्मिक रस्मों में भाग लेती हैं, जो मेले की विशेष परंपरा है।
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