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गोविंद नामदेव ने 42 की उम्र में किया डेब्यू, बने मोस्ट वांटेड विलेन

एनएसडी से ग्रेजुएशन के बाद थिएटर में 12-15 साल, फिर फिल्मों में निगेटिव किरदारों से मिली पहचान

गोविंद नामदेव ने 42 साल की उम्र में बॉलीवुड में डेब्यू किया और विलेन के किरदारों से दर्शकों के दिलों में खौफ भर दिया। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से 1977 में ग्रेजुएशन के बाद करीब 12-15 साल थिएटर में काम किया।
AI सार

गोविंद नामदेव ने 42 की उम्र में बॉलीवुड में डेब्यू किया और अपने प्रभावशाली विलेन किरदारों के लिए मशहूर हुए। थिएटर से करियर की शुरुआत करने के बाद उन्होंने फिल्म 'शोला और शबनम' से फ़िल्मी दुनिया में कदम रखा और 'बैंडिट क्वीन', 'विरासत', 'सत्या' जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण रोल निभाया। 70 के पार की उम्र में भी वह ओटीटी प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं, जो उनके समर्पण और प्रतिभा को दर्शाता है।

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गोविंद नामदेव मुंबई में शूटिंग के दौरान
गोविंद नामदेव मुंबई में शूटिंग के दौरान / IANS

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 गोविंद नामदेव ने 42 साल की उम्र में बॉलीवुड में डेब्यू किया और विलेन के किरदारों से दर्शकों के दिलों में खौफ भर दिया। उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से 1977 में ग्रेजुएशन के बाद करीब 12-15 साल थिएटर में काम किया।

गोविंद नामदेव का बचपन एक साधारण परिवार में बीता। उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़-लिखकर नौकरी करें, लेकिन उनका मन अभिनय में लगा था। एनएसडी से ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने दिल्ली के मंचों पर कई बड़े नाटकों में काम किया। इस दौरान उनकी मुलाकात दिग्गज निर्देशकों से हुई, लेकिन फिल्मों में ब्रेक आसानी से नहीं मिला।

उनका पहला बड़ा मौका 1992 में डेविड धवन की फिल्म 'शोला और शबनम' में मिला। इसके बाद उन्होंने 'बैंडिट क्वीन' में ठाकुर का किरदार निभाया, जिसे उनकी सबसे यादगार भूमिकाओं में गिना जाता है। 40 साल की उम्र तक उन्होंने फिल्मों के बारे में सोचा भी नहीं था।

गोविंद नामदेव ने 'विरासत', 'सत्या', 'सरफरोश', 'पुकार', 'लज्जा' और 'कसम' जैसी फिल्मों में निगेटिव किरदार निभाए। 'सरफरोश' में सुल्तान के रोल के लिए उन्हें आज भी याद किया जाता है। आमिर खान के सामने उनकी आंखों से डर पैदा करने वाली एक्टिंग ने उन्हें बॉलीवुड का मोस्ट वांटेड विलेन बना दिया।

उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि वह कभी हीरो बनने नहीं आए थे, बल्कि एक अभिनेता बनना चाहते थे। उनका मानना था कि किरदार बड़ा-छोटा नहीं होता, बल्कि उसका दम बड़ा होना चाहिए। उन्हें 'सत्या' और 'विरासत' में दमदार अभिनय के लिए कई अवॉर्ड्स और नॉमिनेशन मिले। 1999 में फिल्म 'समर' के लिए उन्हें बेस्ट विलेन का स्क्रीन अवॉर्ड भी मिला।

70 साल की उम्र के बाद भी गोविंद नामदेव सक्रिय हैं और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर 'अभय', 'द कश्मीर फाइल्स' और कई वेब सीरीज में काम कर रहे हैं। सागर के एक छोटे शहर से निकलकर एनएसडी और फिर मुंबई तक का उनका सफर युवा कलाकारों के लिए प्रेरणा है। वह इस बात के जीते-जागते सबूत हैं कि अगर टैलेंट है तो उम्र सिर्फ एक नंबर है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

गोविंद नामदेव को किस फिल्म के लिए बेस्ट विलेन का स्क्रीन अवॉर्ड मिला?
उन्हें 1999 में फिल्म 'समर' के लिए बेस्ट विलेन का स्क्रीन अवॉर्ड मिला।
गोविंद नामदेव का पहला बड़ा फिल्म प्रोजेक्ट कौन सा था?
उनका पहला बड़ा मौका 1992 में डेविड धवन की फिल्म 'शोला और शबनम' में मिला।

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Published3 सितंबर 2026, 14:06 IST IST
Last updated3 सितंबर 2026, 14:06 IST IST
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