सीकर में गणेश उत्सव का धूमधाम से समापन, प्रतिमाओं का विसर्जन
सिद्धमुख, लक्ष्मणगढ़ समेत कई मोहल्लों में पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा निकाली गई
सीकर के सिद्धमुख कस्बे और लक्ष्मणगढ़ में गणेश उत्सव का शुभारंभ पूजा और आरती के साथ कई दिनों तक मनाया गया। इन स्थानों पर गणेश प्रतिमाओं की स्थापना कर विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई और विभिन्न सामूहिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान भक्तों ने पूजा-अर्चना, भजन, अखाड़ेबाजी और लड्डुओं का भोग लगाकर उत्सव मनाया।
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सीकर। सीकर जिले के सिद्धमुख कस्बे में गणेश सेवा समिति ने सात दिन तक चले गणेश उत्सव का समापन भगवान गणेश की प्रतिमा के विसर्जन के साथ किया। इस दौरान कस्बे के मोहल्लों में प्रतिमाओं की स्थापना कर सुबह-शाम पूजा-अर्चना की गई।
सिद्धमुख में गणेश सेवा समिति ने 14 सितंबर को रोडवेज बसस्टैंड के सामने वीर तेजाजी महाराज के मंदिर के पास गणेश प्रतिमाओं की स्थापना की थी। कस्बे के सभी मोहल्लों में भी प्रतिमाएं स्थापित की गईं, जहां सात दिनों तक सुबह-शाम पूजा-अर्चना का भव्य आयोजन हुआ।
शनिवार को मोहल्लों की गणेश प्रतिमाएं डीजे की धुन पर अपने-अपने स्थानों से निकलकर वीर तेजाजी महाराज के मंदिर के सामने पहुंचीं। वहां से जुलूस मुख्य मार्गों से होते हुए श्रीनगर रोड स्थित छोटी मोरी के पास मुख्य तालाब की पाल पर पहुंचा। शाम को गणेश विसर्जन किया गया, जिसमें जेसीबी मशीन की सहायता से पुष्प अर्पित किए गए।
चमन गली में समाजसेवी अंकित लोगढ़ ने भक्तों को केले वितरित किए और जगह-जगह युवाओं ने अखाड़ेबाजी का प्रदर्शन किया। गणपति बाबा मोरिया के जयकारों से माहौल गूंज उठा। इस मौके पर विष्णु वैष्णव, दामोदर मेहर, बन्ना लाल गुर्जर, भागचंद माली, हीरालाल माली, धन्नालाल माली, सुमित कांकाणी, बंसीलाल जाटोलिया, विशाल साहू, महावीर वैष्णव, पवन सैनी, कानाराम माली, मोनू खारोल, दिनेश खारोल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
लक्ष्मणगढ़ कस्बे के न्यामा बाजार में स्थित मुनवाड़ी गणेश पूजा स्थल पर पांच दिनों तक चलने वाले गणेश महोत्सव का शनिवार को धूमधाम से समापन हुआ। महोत्सव के दौरान हर दिन सुबह-शाम विशेष पूजा और महाआरती की गई। पंडित अनिल त्रिवेदी की देखरेख में श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ हुआ। भगवान गणपति को हर दिन 1008 मोदक के लड्डुओं का भोग लगाया गया।
शनिवार शाम को पूजा स्थल से शाही लवाजमे, ढोल-नगाड़ों और भजन मंडलियों के साथ विसर्जन शोभायात्रा निकाली गई। यह यात्रा शहर के मुख्य रास्तों से होकर सेठों के जोहड़े पहुंची, जहां सामूहिक आरती और मंत्रोच्चार के साथ गणपति प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
सदाबहार मोहल्ला स्थित शिखरबंद गणेश पूजा स्थल, श्री गोपीनाथ गणेश पूजा महोत्सव, सार्वजनिक गणेश पूजा महोत्सव केड़ियों का नोहरा, माकड़िया बालाजी गणेश पूजा महोत्सव और गणपति की फौज गणेश पूजा महोत्सव 11 दिनों तक चले। इन सभी स्थलों पर सुबह और शाम पूजा-अर्चना व आरती की गई।
पक्की प्याऊ के पास आयोजित गणपति की फौज गणेश पूजा महोत्सव में शनिवार रात भजन संध्या हुई। यह 11 दिवसीय महोत्सव खास तौर पर मोहल्ले के बच्चों द्वारा मिलकर आयोजित किया जाता है। महोत्सव की पूरी व्यवस्था, पूजा और भगवान गणपति का श्रृंगार लगातार 11 दिनों तक बच्चों की टीम करती रही। भक्त भी उत्साह के साथ इस आयोजन में शामिल हुए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- गणेश उत्सव में भक्तों ने कौन-कौन सी गतिविधियां कीं?
- भक्तों ने सुबह-शाम पूजा-अर्चना, अखाड़ेबाजी प्रदर्शन और भजन संध्या में भाग लिया।
- गणपति की फौज महोत्सव का आयोजन किसने किया?
- यह महोत्सव खास तौर पर मोहल्ले के बच्चों की टीम द्वारा आयोजित और संचालित किया गया।
- लक्ष्मणगढ़ के गणेश महोत्सव में कौनसे धार्मिक अनुष्ठान हुए?
- पंडित अनिल त्रिवेदी की देखरेख में श्री गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ और रोजाना 1008 मोदक का भोग लगाया गया।
- प्रतिमाओं के विसर्जन के दौरान किन खास व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया गया?
- विसर्जन में जेसीबी मशीन से पुष्प अर्पित करने की व्यवस्था हुई और शाही लवाजमे के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
- गणेश उत्सव के दौरान कौन-कौन से पूजा स्थल प्रमुख थे?
- सिद्धमुख, लक्ष्मणगढ़ न्यामा बाजार, सदाबहार मोहल्ला के शिखरबंद, श्री गोपीनाथ, केड़ियों का नोहरा, माकड़िया बालाजी और पक्की प्याऊ के पास के स्थल प्रमुख थे।
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