हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रामनाथ सिंह को अयोग्य किया
प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के विभाजन के बाद प्रतिनिधि पद समाप्त होने पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रामनाथ सिंह को प्रबंध समिति में अयोग्य घोषित किया है क्योंकि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के विभाजन के बाद वे प्रतिनिधि पद पर बने नहीं रह सकते। अदालत ने फैसला दिया कि विभाजन के कारण पुराने प्रतिनिधि प्रबंध समिति के सदस्य नहीं हो सकते और रामनाथ सिंह सहित छह से आठ प्रतिनिधि पद से अयोग्य हुए हैं। रामनाथ सिंह ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक की प्रबंध समिति के गठन में विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के वैधानिक विभाजन के बाद पुराने प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया और वे प्रबंध समिति में बने रहने के पात्र नहीं हैं।
हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ ने रिट याचिका संख्या 7367/2026 में यह निर्णय दिया। याचिका बुढ़ाना निवासी सचिन कुमार जैन ने दाखिल की थी। जिला सहकारी बैंक मुजफ्फरनगर की प्रबंध समिति के सदस्यों का चुनाव 20 जून 2023 को हुआ था। इसके बाद 23 जून 2023 को बैंक के चेयरमैन, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधियों का चुनाव संपन्न हुआ। रामनाथ सिंह को बैंक की प्रबंध समिति का अध्यक्ष चुना गया था। पंकज पाल और बृजेंद्र सिंह भी प्रबंध समिति के सदस्य निर्वाचित हुए थे। तीनों अलग-अलग प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (बी पैक्स) के प्रतिनिधि के तौर पर बैंक की सामान्य निकाय के सदस्य बने थे।
बाद में संबंधित बी पैक्स के कार्यक्षेत्र में बदलाव और विभाजन के आदेश जारी किए गए। सहायक आयुक्त/जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियों ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 126 के तहत विभाजन के आदेश दिए। 23 अप्रैल 2025 के आदेश से बी पैक्स को दो समितियों में बांटा गया। कुरालसी क्षेत्र में कुछ गांव शामिल किए गए, जबकि खेड़ा मस्तान क्षेत्र में अन्य गांव रखे गए। इसी तरह बी पैक्स मुजफ्फरनगर पश्चिमी से पांच गांव अलग कर नवगठित बी पैक्स वहलना में शामिल किए गए। बी पैक्स पिनना में भी कुछ गांव अलग कर बी पैक्स लंगड़ सांधा बनाया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी पुरानी समिति का नाम या पंजीकरण नंबर बनाए रखने मात्र से वैधानिक विभाजन नहीं टला जाता। विभाजन के कारण नई समितियों की कानूनी पहचान बनती है और पुराने पंजीकरण नंबर का बने रहना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है।
उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 87(ix) के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जिस समिति का प्रतिनिधित्व करता है वह दो या अधिक समितियों में विभाजित हो जाती है तो वह व्यक्ति उस समिति का प्रतिनिधि नहीं रहता। नियम 453(1)(h) के तहत प्रबंध समिति का सदस्य बने रहने के लिए सामान्य निकाय का सदस्य होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि विभाजन के कारण रामनाथ सिंह समेत उत्तरदाता संख्या छह से आठ पुरानी समितियों के प्रतिनिधि नहीं रहे।
इस फैसले का सबसे बड़ा असर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन ठाकुर रामनाथ सिंह पर पड़ा है। कोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार कर उन्हें प्रबंध समिति में बने रहने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। मामले में लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया।
ठाकुर रामनाथ सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने और अपना पक्ष रखने की बात कही है। चेयरमैन पद छोड़ने के विषय में विधिक निर्णयानुसार ही फैसला लिया जाएगा।
अधिनियम की धारा 126 के तहत किसी सहकारी समिति को दो या अधिक समितियों में विभाजित करने का आदेश दिया जा सकता है, लेकिन इसके बाद धारा 16 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है
इलाहाबाद हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ
एक बार रामनाथ सिंह प्रतिनिधि का पद खो देते हैं तो वह चेयरमैन पद पर नहीं रह सकते
इलाहाबाद हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के विभाजन का आदेश किसने दिया?
- सहायक आयुक्त/जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियों ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 126 के तहत विभाजन के आदेश दिए।
- क्या पुरानी समिति का नाम या पंजीकरण नंबर बनाए रखने से विभाजन रोका जा सकता है?
- हाईकोर्ट ने कहा कि पुराने नाम या पंजीकरण नंबर बनाए रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया है, इससे वैधानिक विभाजन नहीं टलता।
- प्रबंध समिति का सदस्य बने रहने के लिए क्या आवश्यक शर्त है?
- नियम 453(1)(h) के तहत प्रबंध समिति का सदस्य बनने के लिए सामान्य निकाय का सदस्य होना जरूरी है।
- विभाजन के बाद कितनी समितियाँ बनीं?
- बी पैक्स को दो या अधिक नई समितियों में बांटा गया, जैसे वहलना और लंगड़ सांधा।
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