कानून / कोर्ट 3 MIN READ

हाईकोर्ट ने जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रामनाथ सिंह को अयोग्य किया

प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के विभाजन के बाद प्रतिनिधि पद समाप्त होने पर हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक की प्रबंध समिति के गठन में विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के वैधानिक विभाजन के बाद पुराने प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया और वे प्रबंध समिति में बने रहने के पात्र नहीं हैं।
AI सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन रामनाथ सिंह को प्रबंध समिति में अयोग्य घोषित किया है क्योंकि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के विभाजन के बाद वे प्रतिनिधि पद पर बने नहीं रह सकते। अदालत ने फैसला दिया कि विभाजन के कारण पुराने प्रतिनिधि प्रबंध समिति के सदस्य नहीं हो सकते और रामनाथ सिंह सहित छह से आठ प्रतिनिधि पद से अयोग्य हुए हैं। रामनाथ सिंह ने फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की बात कही है।

AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें

मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक विवाद
मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक विवाद / सोशल मीडिया

निहारिका टाइम्स को Google पर अपना पसंदीदा सोर्स बनाए

Follow us on Google

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मुजफ्फरनगर जिला सहकारी बैंक की प्रबंध समिति के गठन में विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के वैधानिक विभाजन के बाद पुराने प्रतिनिधियों का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया और वे प्रबंध समिति में बने रहने के पात्र नहीं हैं।

हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ ने रिट याचिका संख्या 7367/2026 में यह निर्णय दिया। याचिका बुढ़ाना निवासी सचिन कुमार जैन ने दाखिल की थी। जिला सहकारी बैंक मुजफ्फरनगर की प्रबंध समिति के सदस्यों का चुनाव 20 जून 2023 को हुआ था। इसके बाद 23 जून 2023 को बैंक के चेयरमैन, उपाध्यक्ष और प्रतिनिधियों का चुनाव संपन्न हुआ। रामनाथ सिंह को बैंक की प्रबंध समिति का अध्यक्ष चुना गया था। पंकज पाल और बृजेंद्र सिंह भी प्रबंध समिति के सदस्य निर्वाचित हुए थे। तीनों अलग-अलग प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (बी पैक्स) के प्रतिनिधि के तौर पर बैंक की सामान्य निकाय के सदस्य बने थे।

बाद में संबंधित बी पैक्स के कार्यक्षेत्र में बदलाव और विभाजन के आदेश जारी किए गए। सहायक आयुक्त/जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियों ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 126 के तहत विभाजन के आदेश दिए। 23 अप्रैल 2025 के आदेश से बी पैक्स को दो समितियों में बांटा गया। कुरालसी क्षेत्र में कुछ गांव शामिल किए गए, जबकि खेड़ा मस्तान क्षेत्र में अन्य गांव रखे गए। इसी तरह बी पैक्स मुजफ्फरनगर पश्चिमी से पांच गांव अलग कर नवगठित बी पैक्स वहलना में शामिल किए गए। बी पैक्स पिनना में भी कुछ गांव अलग कर बी पैक्स लंगड़ सांधा बनाया गया।

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी पुरानी समिति का नाम या पंजीकरण नंबर बनाए रखने मात्र से वैधानिक विभाजन नहीं टला जाता। विभाजन के कारण नई समितियों की कानूनी पहचान बनती है और पुराने पंजीकरण नंबर का बने रहना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है।

उत्तर प्रदेश सहकारी समिति नियमावली, 1968 के नियम 87(ix) के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जिस समिति का प्रतिनिधित्व करता है वह दो या अधिक समितियों में विभाजित हो जाती है तो वह व्यक्ति उस समिति का प्रतिनिधि नहीं रहता। नियम 453(1)(h) के तहत प्रबंध समिति का सदस्य बने रहने के लिए सामान्य निकाय का सदस्य होना जरूरी है। हाईकोर्ट ने निष्कर्ष निकाला कि विभाजन के कारण रामनाथ सिंह समेत उत्तरदाता संख्या छह से आठ पुरानी समितियों के प्रतिनिधि नहीं रहे।

इस फैसले का सबसे बड़ा असर जिला सहकारी बैंक के चेयरमैन ठाकुर रामनाथ सिंह पर पड़ा है। कोर्ट ने रिट याचिका स्वीकार कर उन्हें प्रबंध समिति में बने रहने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। मामले में लागत के संबंध में कोई आदेश नहीं दिया गया।

ठाकुर रामनाथ सिंह ने हाईकोर्ट के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अपील करने और अपना पक्ष रखने की बात कही है। चेयरमैन पद छोड़ने के विषय में विधिक निर्णयानुसार ही फैसला लिया जाएगा।

अधिनियम की धारा 126 के तहत किसी सहकारी समिति को दो या अधिक समितियों में विभाजित करने का आदेश दिया जा सकता है, लेकिन इसके बाद धारा 16 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है

इलाहाबाद हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ

एक बार रामनाथ सिंह प्रतिनिधि का पद खो देते हैं तो वह चेयरमैन पद पर नहीं रह सकते

इलाहाबाद हाईकोर्ट, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला और न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर की पीठ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों के विभाजन का आदेश किसने दिया?
सहायक आयुक्त/जिला सहायक निबंधक सहकारी समितियों ने उत्तर प्रदेश सहकारी समिति अधिनियम, 1965 की धारा 126 के तहत विभाजन के आदेश दिए।
क्या पुरानी समिति का नाम या पंजीकरण नंबर बनाए रखने से विभाजन रोका जा सकता है?
हाईकोर्ट ने कहा कि पुराने नाम या पंजीकरण नंबर बनाए रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया है, इससे वैधानिक विभाजन नहीं टलता।
प्रबंध समिति का सदस्य बने रहने के लिए क्या आवश्यक शर्त है?
नियम 453(1)(h) के तहत प्रबंध समिति का सदस्य बनने के लिए सामान्य निकाय का सदस्य होना जरूरी है।
विभाजन के बाद कितनी समितियाँ बनीं?
बी पैक्स को दो या अधिक नई समितियों में बांटा गया, जैसे वहलना और लंगड़ सांधा।

AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें

Member Access

50 free articles left today

0 of 50 free reads used today.

Go Unlimited
📲 हमसे जुड़ें ताज़ा खबरें सीधे आपके फोन पर — तुरंत, मुफ़्त
Telegram Channel

पाठकों की पसंद

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं

01 टेक्नोलॉजी Infinix Hot 70 Pro 5G भारत में लॉन्च, कीमत 22,999 रुपये से शुरू
02 राजनीति गौरीपुर-खेकड़ा हाईवे की मरम्मत पूरी, पुल निर्माण जल्द शुरू
03 शिक्षा चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ वॉकाथॉन, प्रशासन ने हरी झंडी दिखाई
04 स्वास्थ्य पाली में जातरुओं से भरी पिकअप पलटी, 9 गंभीर घायल
Trust & Transparency

How this story was handled

Published16 सितंबर 2026, 11:32 IST IST
Last updated16 सितंबर 2026, 11:32 IST IST
Latest newsroom actionnews-desk (section_editor)
Story lifecyclePublish
Methodology

How to read this report

Coverage is filed under कानून / कोर्ट and aligned with that desk's editorial standards.
Key topic markers used in this story: कानून-अदालत.
Update Log

Recent newsroom changes

The Editorial Desk published this story as published

Continuing Coverage

More on this story

Latest context and follow-up reading from कानून / कोर्ट.

कानून / कोर्ट

31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त टीईटी पास शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित

कानून / कोर्ट

स्वतंत्र भारद्वाज को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया

शिक्षा

यूपी में नीट यूजी राउंड 1 की काउंसलिंग रद्द, फिर से च्वाइस भरें

क्राइम

मुजफ्फरनगर हिस्ट्रीशीटर के लापता होने पर CBI जांच का आदेश

31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त टीईटी पास शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित
कानून / कोर्ट
इससे जुड़ी ख़बरें

31 मार्च 2015 से पहले नियुक्त टीईटी पास शिक्षकों की नौकरी सुरक्षित

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क• 13 सितंबर 2026
स्वतंत्र भारद्वाज को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया
कानून / कोर्ट
इससे जुड़ी ख़बरें

स्वतंत्र भारद्वाज को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क• 18 सितंबर 2026
यूपी में नीट यूजी राउंड 1 की काउंसलिंग रद्द, फिर से च्वाइस भरें
शिक्षा
इससे जुड़ी ख़बरें

यूपी में नीट यूजी राउंड 1 की काउंसलिंग रद्द, फिर से च्वाइस भरें

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क• 19 सितंबर 2026
मुजफ्फरनगर हिस्ट्रीशीटर के लापता होने पर CBI जांच का आदेश
क्राइम
इससे जुड़ी ख़बरें

मुजफ्फरनगर हिस्ट्रीशीटर के लापता होने पर CBI जांच का आदेश

निहारिका टाइम्स न्यूज़ डेस्क• 3 सितंबर 2026

पाठकों की पसंद

सबसे ज़्यादा पढ़ी गईं

01 टेक्नोलॉजी Infinix Hot 70 Pro 5G भारत में लॉन्च, कीमत 22,999 रुपये से शुरू
02 राजनीति गौरीपुर-खेकड़ा हाईवे की मरम्मत पूरी, पुल निर्माण जल्द शुरू
03 शिक्षा चंडीगढ़ में नशे के खिलाफ वॉकाथॉन, प्रशासन ने हरी झंडी दिखाई
04 स्वास्थ्य पाली में जातरुओं से भरी पिकअप पलटी, 9 गंभीर घायल

Comments

0 threads
Join the discussion
Staff comments are highlighted. Verified readers receive a trust badge.
Sign in to comment

No approved comments yet. Start the discussion.