हाईकोर्ट ने बिना वजह गिरफ्तारी पर चार पुलिसकर्मियों को तलब किया
फतेहपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र में गिरफ्तारी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन, आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू
फतेहपुर हाईकोर्ट ने बिना वजह गिरफ्तारी के मामले में चार पुलिस अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। अदालत ने पुलिस की गिरफ्तारी के समय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन करने पर आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।
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फतेहपुर हाईकोर्ट ने बिना वजह गिरफ्तारी के मामले में चार पुलिस अधिकारियों को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई कल्याणपुर थाना क्षेत्र के ग्राम पहुर निवासी अंकित सिंह परिहार की गिरफ्तारी से जुड़ी है। कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है।
गिरफ्तारी के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन
सुप्रीम कोर्ट के अर्नेश कुमार बनाम स्टेट ऑफ बिहार मामले में तय दिशा-निर्देशों के अनुसार सात वर्ष तक की सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी स्वतः या यांत्रिक तरीके से नहीं की जा सकती। पुलिस को गिरफ्तारी से पहले कानून में निर्धारित शर्तों और आवश्यकता पर विचार करना जरूरी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल पुलिस की शक्ति होने के कारण गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। मौजूदा मामले में इन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन होने का आरोप है।
कोर्ट का आदेश और पुलिस अधिकारियों की उपस्थिति
हाईकोर्ट ने फतेहपुर के डीएसपी सुशील कुमार दुबे, थाना कल्याणपुर के एसएचओ रामाशंकर सरोज, एसआई चंद्रपाल और चौकी प्रभारी चौडगरा को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है। न्यायमूर्ति एसडी सिंह और न्यायमूर्ति संदीप जैन की खंडपीठ ने अंकित सिंह की याचिका पर यह आदेश दिया। आरोप है कि नोटिस जारी होने के बावजूद अधिकारी न्यायालय के समक्ष उपस्थित नहीं हुए।
गिरफ्तारी की आवश्यकता और उसके औचित्य का निर्धारण कानून में तय मानकों के अनुसार किया जाना चाहिए।
अधिकारी न्यायालय
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन किस प्रकार हुआ?
- यह आरोप है कि पुलिस ने बिना आवश्यक कानूनी मानदंडों का पालन किए यांत्रिक तरीके से गिरफ्तारी की, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के खिलाफ है।
- पुलिस अधिकारियों की अदालत में उपस्थिति क्यों महत्वपूर्ण है?
- उनकी उपस्थिति से कोर्ट जांच सकती है कि गिरफ्तारी में कानूनी नियमों का उल्लंघन हुआ या नहीं और उसके आधार पर उचित कार्रवाई कर सकती है।
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