निर्दलीय दीपांशु शौकीन ने DUSU उपाध्यक्ष पद पर ABVP-NSUI को पछाड़ा
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार ने बड़ी बढ़त बनाई
दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने ABVP और NSUI के उम्मीदवारों को हराया है। दीपांशु पिछले पांच साल से छात्रों के बीच सक्रिय हैं और उन्होंने छात्रों की आवाज उठाने को प्राथमिकता बताया है। अध्यक्ष और सचिव पदों पर ABVP, जबकि संयुक्त सचिव पद पर NSUI उम्मीदवार आगे चल रहे हैं।
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दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ चुनाव में उपाध्यक्ष पद पर निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने ABVP और NSUI के उम्मीदवारों को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की है। वोटों की गिनती के दौरान उन्होंने शुरू से ही बढ़त बनाए रखी।
दीपांशु शौकीन पिछले पांच साल से छात्रों के बीच सक्रिय हैं और इसी दौरान उन्हें छात्रों का समर्थन मिला है। उन्होंने बताया कि उनका मकसद पद हासिल करना नहीं, बल्कि छात्रों की आवाज बनना था। उन्होंने कहा, "मेरा उद्देश्य पिछले चार वर्षों में छात्रों द्वारा मुझ पर जताए गए भरोसे और हमारे बीच बने रिश्ते का सम्मान करना था।"
शौकीन ने बताया कि दिल्ली यूनिवर्सिटी उन्हें ऐसा मंच देती है, जहां वे देशभर के छात्रों की आवाज उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लगातार दबाव बनाया जाता था कि उनकी गाड़ियां नहीं दिखतीं, उनका माहौल नहीं है और वे चुनाव में पैसा खर्च नहीं कर रहे हैं। पहले उनसे एक पद पर चुनाव लड़ने की बात कही गई, लेकिन बाद में तीनों प्रमुख पदों के उम्मीदवारों को लेकर बदलाव हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे जीतते हैं तो सबसे पहले कैंपस में जवाबदेही सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे। उनका कहना है कि जो छात्र किसी समस्या का सामना कर रहा है, उसकी आवाज उठाना और उसके अधिकारों के लिए लड़ना उनकी प्राथमिकता होगी।
दीपांशु ने सत्या निकेतन में हुए हादसे का जिक्र करते हुए बताया कि घटना के बाद उन्होंने छात्रों को न्याय और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर अपना 'न्याय सत्याग्रह' शुरू किया। वे चुनाव प्रचार के दौरान नंगे पैर नजर आए, क्योंकि उनका मानना है कि नंगे पैर चलने से होने वाला दर्द उन्हें उन छात्रों की परेशानियों की याद दिलाता है, जिनकी आवाज वे उठाना चाहते हैं।
ABVP के इशु मौर्या और NSUI के वीर चतरथ शुरू से ही दीपांशु से काफी पीछे थे और अंत तक पीछे ही रहे। 15वें राउंड की मतगणना के बाद अध्यक्ष और सचिव पद पर ABVP के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं, जबकि संयुक्त सचिव पद पर NSUI बढ़त बनाए हुए है।
अध्यक्ष पद पर ABVP के यश डबास को 17,315 वोट मिले हैं, जबकि NSUI के विजय मीणा को 17,021 वोट मिले हैं। सचिव पद पर ABVP की रिया छावड़ी 14,731 वोटों के साथ आगे हैं, जबकि NSUI की नम्रता चौधरी को 11,301 वोट मिले हैं। संयुक्त सचिव पद पर NSUI के गोपाल चौधरी 11,912 वोटों के साथ बढ़त पर हैं।
अध्यक्ष अरुण हुड्डा ने कहा, "मुकाबला कांटे का नहीं है, बल्कि बीजेपी और एबीवीपी चुनाव हार रही हैं।" दीपांशु ने युवाओं से कई वादे किए थे, जैसे 2 लाख नौकरियां देना, नए शैक्षणिक कोर्स शुरू करना और हॉस्टल बनाना, लेकिन ये वादे पूरे नहीं हुए। उन्होंने फीस माफी और छात्राओं की सुरक्षा पर सवाल उठाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- दीपांशु शौकीन ने चुनाव जीतने के बाद क्या प्राथमिकताएं बताई?
- उन्होंने कहा कि कैंपस में जवाबदेही सुनिश्चित करना और छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ना उनकी प्राथमिकता होगी।
- दीपांशु शौकीन ने चुनाव प्रचार में क्या विशेष किया?
- उन्होंने नंगे पैर चुनाव प्रचार किया क्योंकि यह उन्हें छात्रों की परेशानियों की याद दिलाता है।
- दीपांशु शौकीन ने किस घटना का जिक्र करते हुए न्याय की मांग की?
- उन्होंने सत्या निकेतन में हुए हादसे का जिक्र किया और प्रभावित परिवारों को मुआवजा दिलाने की मांग की।
- ABVP अध्यक्ष अरुण हुड्डा ने चुनाव परिणाम को कैसे बताया?
- उन्होंने कहा कि चुनाव का मुकाबला कड़ा नहीं था, बल्कि बीजेपी और ABVP चुनाव हार रही हैं।
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