ईरान ने अमेरिका से बातचीत के लिए सात शर्तें भेजीं
ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कतर के जरिए अमेरिका तक शर्तें पहुंचाईं, जवाब का इंतजार
ईरान ने अमेरिका से बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें मध्यस्थों के जरिए भेजी हैं और अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहा है। ईरान का प्रतिनिधिमंडल संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेने के लिए न्यूयॉर्क जाएगा, लेकिन इसकी पहली प्राथमिकता नहीं है। दोनों देशों के बीच तनाव जारी है, हालांकि बातचीत के प्रयास भी चल रहे हैं।
AI-निर्मित सार · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
ईरान ने अमेरिका के साथ दोबारा बातचीत शुरू करने के लिए सात शर्तें मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाई हैं। ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रेजाई ने यह जानकारी दी और बताया कि अब वे अमेरिकी जवाब का इंतजार कर रहे हैं।
ईरान के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क जाकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लेंगे, हालांकि यह उनकी पहली पसंद नहीं है। प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा, "न्यूयॉर्क जाना ईरान के प्रतिनिधियों की पहली पसंद नहीं है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा ऐसा मंच है जिसे छोड़ा नहीं जा सकता।" तेहरान का कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र का संस्थापक सदस्य है और महासभा में अपनी बात रखना उसका अधिकार है।
ईरान ने बातचीत के दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं किए हैं, लेकिन अमेरिकी वीजा को किसी तरह की रियायत के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। अमेरिका की तरफ से भी साफ किया गया है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश के तौर पर उसकी जिम्मेदारियों के तहत दिया जा रहा है। हालांकि प्रतिनिधिमंडल पर यात्रा और खरीदारी से जुड़ी कुछ पाबंदियां रहेंगी।
मोहसिन रेजाई ने कहा कि ईरान ने अमेरिका को लेकर अपनी सैन्य रणनीति में बदलाव किया है और अब वह अमेरिकी हवाई हमलों का जवाब देने के लिए पहले से ज्यादा तैयार है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो ईरान क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले तेज कर सकता है।
रेजाई ने अमेरिका की मौजूदा रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा, "जंग का आखिरी फैसला जमीन पर लड़ने वाले सैनिक करते हैं।" उन्होंने चुनौती दी कि "अगर अमेरिकी गंभीर हैं तो उनके सैनिक ईरान में आएं।" ईरान की सैन्य कमान ने भी अमेरिका और उसके सहयोगियों के किसी नए हमले की स्थिति में अमेरिकी ठिकानों और क्षेत्रीय हितों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है।
सामने आई शर्तों में सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म करना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को जारी करना और समुद्री नाकेबंदी हटाना शामिल बताया गया है। कतर के जरिए भेजी गई ये शर्तें सार्वजनिक तौर पर पूरी लिस्ट में नहीं बताई गई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान में बड़े पैमाने पर जमीनी अभियान शुरू करना युद्ध को एक नए और ज्यादा बड़े चरण में ले जा सकता है। हालांकि बड़े पैमाने पर जमीनी हमला मुश्किल हो सकता है, सीमित जमीनी अभियानों की संभावना से इनकार नहीं किया गया है।
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध जारी है और दोनों देशों के बीच तनाव बेहद उच्च स्तर पर है। इसके बावजूद बीच-बीच में युद्ध खत्म करने को लेकर बातचीत के प्रयास भी होते रहे हैं। ऐसे में ईरानी प्रतिनिधि पेजेश्कियन का न्यूयॉर्क पहुंचना कूटनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभी यह तय नहीं है कि उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या किसी वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी से सीधी मुलाकात होगी या नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या ईरानी प्रतिनिधि अमेरिका के किसी अधिकारी से मिलेंगे?
- अभी यह तय नहीं है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति या किसी वरिष्ठ अधिकारी से सीधी मुलाकात करेंगे।
- ईरान ने अमेरिकी वीजा को कैसे देखा है?
- ईरान वीजा को किसी रियायत के तौर पर नहीं देखता बल्कि इसे संयुक्त राष्ट्र के मेजबान देश की जिम्मेदारी माना गया है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरानी प्रतिनिधि क्यों हिस्सा ले रहे हैं?
- यह ईरान की पहली पसंद नहीं है, लेकिन महासभा एक आवश्यक मंच है जो छोड़ना संभव नहीं था।
AI-निर्मित · पूरी ख़बर से पुष्टि करें
50 free articles left today
0 of 50 free reads used today.
पाठकों की पसंद




Comments
0 threadsNo approved comments yet. Start the discussion.