रूस-चीन ने ईरान प्रतिबंधों की निगरानी प्रस्ताव पर लगाया वीटो
अमेरिका का प्रस्ताव गिरा, 11 देशों ने समर्थन दिया, सोमालिया-पाकिस्तान मतदान से बाहर
रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी के लिए अमेरिका के प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया, जिसके कारण प्रस्ताव असफल रहा। यह प्रतिबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर लगाए गए हैं और इनमें हथियार सौदों पर रोक तथा विदेशी संपत्तियों को फ्रीज करना शामिल है।
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डिजिटल डेस्क। रूस और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिका के उस प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया जो ईरान पर लगे प्रतिबंधों की निगरानी के लिए विशेषज्ञों को अधिकृत करता था। इस प्रस्ताव को 11 देशों का समर्थन मिला, लेकिन रूस और चीन के वीटो से यह असफल रहा। सोमालिया और पाकिस्तान ने मतदान में भाग नहीं लिया।
ये प्रतिबंध ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पिछले साल फिर से लागू किए गए थे। इनमें ईरान की विदेश में संपत्तियों को फ्रीज करना, हथियार सौदों पर रोक और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर दंड शामिल है। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने 2015 के परमाणु समझौते के स्नैपबैक प्रावधान का इस्तेमाल करते हुए 27 सितंबर 2025 को इन प्रतिबंधों को फिर लागू किया था।
अमेरिका ने विशेषज्ञ पैनल का जनादेश एक साल बढ़ाने का प्रस्ताव रखा था। मतदान में 11 देश पक्ष में थे, लेकिन रूस और चीन के वीटो के कारण प्रस्ताव गिर गया। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने रूस और चीन का आभार जताया कि उन्होंने अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा सुरक्षा परिषद का राजनीतिक दुरुपयोग करने के प्रयास को रोका।
एंबेसडर जेनिफर लोसेटा ने कहा, "वीटो से प्रतिबंध उल्लंघन पर स्वतंत्र रिपोर्टिंग बाधित होगी।" वहीं राजदूत वसीली नेबेंजिया ने बताया, "स्नैपबैक अवैध था, इसलिए प्रस्ताव का कोई कानूनी आधार नहीं है।" फ्रांसीसी राजदूत ने प्रतिबंधों को लागू करने को महत्वपूर्ण बताया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- ईरान पर लगे प्रतिबंधों में क्या शामिल है?
- प्रतिबंधों में ईरान की विदेश में संपत्तियों को फ्रीज करना, हथियार सौदों पर रोक और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर दंड शामिल हैं।
- रूस और चीन ने प्रस्ताव पर वीटो क्यों लगाया?
- रूस और चीन ने माना कि स्नैपबैक अवैध था और इसलिए प्रस्ताव का कोई कानूनी आधार नहीं था।
- ईरान ने रूस और चीन के वीटो पर क्या प्रतिक्रिया दी?
- ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने रूस और चीन का सुरक्षा परिषद के राजनीतिक दुरुपयोग को रोकने के लिए आभार व्यक्त किया।
- फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन ने प्रतिबंधों के बारे में क्या कहा?
- फ्रांसीसी राजदूत ने प्रतिबंधों को लागू करने को महत्वपूर्ण बताया।
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