भारत ने अमेरिका के रूस प्रतिबंध कानून पर जताई चिंता
विदेश मंत्रालय ने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा पर जोर दिया
भारत ने अमेरिका के रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध कानून पर चिंता व्यक्त की है और अपने व्यापार व आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने को तैयार है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने इस कानून के द्विपक्षीय संबंधों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर प्रभाव को अमेरिका के अधिकारियों के साथ साझा किया है।
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भारत ने अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने व्यापार और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने को तैयार है। यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति को रूस के तेल और गैस पर निर्भर देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि हाल के महीनों में रूस के साथ भारत के तेल व्यापार के मुद्दे पर अमेरिका के विभिन्न अधिकारियों के साथ उच्च स्तर पर बातचीत हुई है। मंत्रालय ने कहा कि भारतीय पक्ष ने द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर इसके संभावित प्रभाव को स्पष्ट रूप से बताया है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर इन घटनाक्रमों के असर से निपटने के लिए काम करेगी।
अमेरिकी कांग्रेस ने 'ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को हाउस में 262-159 मतों से मंजूरी दी है। अब यह कानून अमेरिकी राष्ट्रपति के पास अनुमोदन के लिए जाएगा। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को चीन, भारत और अन्य देशों पर 100 प्रतिशत तक भारी टैरिफ लगाने का अधिकार मिलेगा, ताकि रूसी तेल और गैस पर उनकी निर्भरता कम की जा सके।
हालांकि, भारतीय निर्यात पर नए टैरिफ का असली असर तब ही आंका जा सकेगा जब अमेरिका टैरिफ की दरें और लागू करने की समय-तालिका घोषित करेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या भारत और अमेरिका के बीच इस विषय पर बातचीत हुई है?
- हाँ, हाल के महीनों में रूस के साथ तेल व्यापार को लेकर अमेरिका के अधिकारियों के साथ उच्च स्तर की बातचीत हुई है।
- भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करेगा?
- भारत सरकार व्यापार और उद्योग संगठनों के साथ मिलकर इन प्रतिबंधों के असर से निपटने के लिए काम करेगी।
- अमेरिका में इस कानून के मंजूर होने के बाद क्या होगा?
- अब यह कानून राष्ट्रपति के अनुमोदन के लिए जाएगा, उसके बाद टैरिफ की दरें और लागू करने की समय-तालिका घोषित होगी।
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