जालोर में पुरानी बिजली राशि वसूली को उपभोक्ता आयोग ने ठुकराया
जिला उपभोक्ता आयोग ने 17,517 रुपए की अनुचित मांग को निरस्त किया
जालोर के रायथल में बिजली उपभोक्ता बाबूलाल से जोधपुर विद्युत वितरण निगम द्वारा 2014-16 के पुराने बिल के 17,517 रुपए वसूलने का नोटिस जारी किया गया, जिसे जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने अनुचित मानते हुए निरस्त कर दिया। आयोग ने बिजली विभाग को इस राशि की वसूली नहीं करने के साथ 10 हजार रुपए क्षतिपूर्ति देने और परिवाद व्यय चुकाने का आदेश दिया। उपभोक्ताओं को पुराने बिल और संबंधित दस्तावेज संभालकर रखने और विवाद होने पर लिखित शिकायत करने का सुझाव दिया गया है।
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जालोर। जालोर के रायथल में बिजली उपभोक्ता बाबूलाल को जोधपुर विद्युत वितरण निगम की ओर से साल 2014-16 के पुराने बिल के आधार पर 17,517 रुपए की राशि वसूलने का नोटिस मिला। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस मांग को अनुचित मानते हुए निरस्त कर दिया।
बाबूलाल के नाम घरेलू बिजली कनेक्शन है और वह नियमित रूप से बिजली बिल जमा करता रहा है। अगस्त 2020 में सहायक अभियंता (पवस) जोविविनिलि आहोर ने मीटर बंद या खराब रहने का हवाला देते हुए वर्ष 2014 से 2016 के दौरान की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर 17,517 रुपए का एवरेज बिल जारी किया। बाबूलाल ने इस पर आपत्ति जताई, लेकिन अक्टूबर 2020 के बिल में यह राशि जोड़कर कुल 22,308 रुपए का बिल भेज दिया गया।
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष घनश्याम यादव और सदस्य निरंजन शर्मा ने सुनवाई के बाद विद्युत विभाग की सेवा में दोष माना। आयोग ने बिजली विभाग के सहायक अभियंता, एक्सईएन और एसई को 17,517 रुपए की अनुचित मांग वसूल न करने के आदेश दिए। साथ ही 10 हजार रुपए क्षतिपूर्ति और परिवाद व्यय चुकाने का निर्देश भी दिया।
अगर बिजली कंपनी पुराने वर्षों की राशि बिल में जोड़ती है तो उपभोक्ता संबंधित अवधि का बिल, मीटर रीडिंग, मीटर जांच रिपोर्ट और राशि जोड़ने का आधार लिखित में मांग सकता है। नियमित बिल भरने वाले उपभोक्ताओं को पुराने बिल और भुगतान की रसीदें संभालकर रखना चाहिए ताकि भुगतान का प्रमाण मिल सके।
गलत या विवादित राशि जुड़ने पर उपभोक्ता बिजली निगम के कार्यालय में लिखित शिकायत या आपत्ति दर्ज करा सकता है। पुरानी ऑडिट राशि या मीटर विवाद होने पर विभाग से गणना और आधार की जानकारी मांगी जा सकती है। विवाद न सुलझने पर वैधानिक शिकायत निवारण व्यवस्था और उपभोक्ता आयोग में राहत ली जा सकती है।
बिल पर तारीख और अवधि जांचना जरूरी है कि पुरानी राशि किस अवधि की है, किस आधार पर जोड़ी गई है और पहले के बिलों में इसका उल्लेख था या नहीं। ये दस्तावेज आगे शिकायत या विवाद में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- बिजली कंपनी के पुराने बिलों पर आपत्ति कैसे जताएं?
- उपभोक्ता संबंधित अवधि का बिल, मीटर रीडिंग, जांच रिपोर्ट लिखित में मांग सकते हैं और कार्यालय में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- बिजली विभाग की सेवा में दोष पाए जाने पर क्या कार्रवाई होती है?
- उपभोक्ता आयोग दोषी विभागीय कर्मचारियों को अनुचित मांग न करने और क्षतिपूर्ति देने का आदेश देता है।
- पुराने बिजली बिलों के दस्तावेज क्यों संभालना चाहिए?
- इससे भुगतान का प्रमाण मिलता है और विवाद होने पर शिकायत के लिए आधार उपलब्ध होता है।
- अगर विवाद न सुलझे तो क्या उपाय हैं?
- उपभोक्ता वैधानिक शिकायत निवारण व्यवस्था या उपभोक्ता आयोग से राहत ले सकते हैं।
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