कोटा में जन्माष्टमी पर मंदिरों में भजन-कीर्तन और झांकियों की सजावट
मंदिरों में वैदिक अभिषेक, 50 किलो दूध की खीर का वितरण भी हुआ
कोटा में जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना करके भजन-कीर्तन और झांकियों की सजावट की गई। रात 12 बजे श्रीकृष्ण के जन्म के समय जयकारे गुंजाए, आतिशबाजी हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। विभिन्न मंदिरों में धार्मिक झांकियां सजाई गईं और कई स्थानों पर महाआरती का आयोजन हुआ।
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कोटा। कोटा में शुक्रवार को जन्माष्टमी का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। मंदिरों और घरों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय जयकारे गूंजे। शहर के प्रमुख मंदिरों में आकर्षक झांकियां सजाई गईं और देर रात तक भजन-कीर्तन का सिलसिला चला।
शहर के राधे-कृष्ण मंदिर सहित अन्य मंदिरों में आकर्षक सजावट की गई। श्री रामलीला नवयुवक मंडल ने रामलीला मैदान में भगवान श्रीनाथजी की झांकी सजाई और छप्पन भोग अर्पित किया। अस्पताल परिसर के सामने स्थित गायत्री मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ केदारनाथ और अन्य धार्मिक झांकियां भी सजाई गईं, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। सेन समाज सहित अन्य मंदिरों में भी झांकियां सजीं।
जन्माष्टमी के मौके पर कई घरों में बच्चों को राधा-कृष्ण की वेशभूषा पहनाकर पूजा-अर्चना करवाई गई। बच्चे कृष्ण और राधा का रूप धरकर मंदिरों में भी पहुंचे। जन्मोत्सव से पहले पुजारियों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ भगवान की प्रतिमाओं का अभिषेक किया और उन्हें नवीन वस्त्र धारण कराए।
रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय मंदिरों और घरों में 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' के जयकारे गूंजे। कई जगह आतिशबाजी हुई, इसके बाद महाआरती हुई और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। मंदिरों में देर रात तक भजन-कीर्तन और जन्मोत्सव का सिलसिला चलता रहा।
इटावा के सरोवर नगर में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर वासुदेव नवयुवक मंडल की ओर से 50 किलो दूध की खीर बनाई गई, जिसे बाद में श्रद्धालुओं में बांटा गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- जन्माष्टमी के दौरान बच्चों की क्या भूमिका रही?
- कई घरों में बच्चों को राधा-कृष्ण की वेशभूषा पहनाकर पूजा-अर्चना करवाई गई और बच्चे मंदिरों में भी कृष्ण और राधा का रूप धरकर पहुंचे।
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