झारखंड के किसान ने मचान और मल्चिंग से नेनुआ की खेती से कमाया 1.35 लाख
नेनुआ की खेती में मक्खी का प्रकोप बड़ी चुनौती, विशेषज्ञों ने की कीटनाशक छिड़काव की सलाह
झारखंड के बोकारो जिले के किसान विष्णु कुमार महतो ने मचान और मल्चिंग विधि से 70 डिसमिल जमीन में नेनुआ की खेती कर 1.35 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया है। उन्होंने बताया कि नेनुआ की पहली तोड़ाई 45 से 50 दिनों में होती है और मक्खी के प्रकोप से बचाव के लिए उचित कीटनाशक छिड़काव आवश्यक है। उनकी खेती का तरीका आसपास के युवाओं को भी सब्जी खेती के लिए प्रेरित कर रहा है।
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झारखंड के बोकारो जिले के चास प्रखंड के कुशल बांधा गांव के किसान विष्णु कुमार महतो ने मचान और मल्चिंग विधि से नेनुआ की खेती कर अपनी किस्मत बदली है। करीब 70 डिसमिल जमीन में 25 हजार रुपये की लागत से 80 से 100 क्विंटल उत्पादन से उन्हें 1.35 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा हुआ।
विष्णु कुमार महतो ने बताया कि उन्हें खेती की प्रेरणा अपने बाप-दादा से मिली है। मचान और मल्चिंग विधि से तैयार की गई नेनुआ की फसल 45 से 50 दिनों में पहली तोड़ाई के लिए तैयार हो जाती है। इसके बाद किसान दो से तीन महीने तक लगातार तोड़ाई कर बाजार में बेच सकते हैं।
किसान के अनुसार स्थानीय बाजार में नेनुआ का औसत भाव 20 से 25 रुपये प्रति किलो तक मिलता है। 80 क्विंटल उत्पादन और 20 रुपये प्रति किलो के हिसाब से करीब 1 लाख 60 हजार रुपये की आमदनी होती है। लागत घटाने के बाद करीब 1 लाख 35 हजार रुपये का शुद्ध मुनाफा बचता है।
किसान ने बताया कि नेनुआ की खेती में सबसे बड़ी समस्या मक्खी का प्रकोप है, जो सब्जियों को नुकसान पहुंचाती है और उत्पादन प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा, "नेनुआ की खेती में सबसे बड़ी समस्या मक्खी का प्रकोप है।" विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि किसानों को उचित कीटनाशक का प्रयोग करना चाहिए और जरूरत के अनुसार करीब 15 दिनों के अंतराल पर छिड़काव कर फसल को फल मक्खी से बचाया जा सकता है।
विष्णु कुमार महतो की खेती का तरीका और बेहतर आमदनी आसपास के युवा किसानों को भी सब्जी की खेती के लिए प्रेरित कर रहा है। कई लोग उनसे सीखकर खेती से अच्छी कमाई कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मचान और मल्चिंग विधि क्या है?
- यह दोनों खेती की तकनीकें हैं जो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन बढ़ाने में मदद करती हैं।
- नेनुआ की फसल कब तक तोड़ी जा सकती है?
- पहली कटाई के बाद किसान दो से तीन महीने तक लगातार तोड़ाई कर सकते हैं।
- नेनुआ की खेती में मक्खी के प्रकोप से कैसे बचा जा सकता है?
- किसानों को कीटनाशक का उपयोग करना चाहिए और 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करना चाहिए।
- इस खेती से आसपास के किसान कैसे प्रभावित हुए हैं?
- विष्णु कुमार महतो की सफलता ने युवा किसानों को सब्जी खेती के लिए प्रेरित किया है।
- नेनुआ की खेती के कौन-कौन से नुकसान हो सकते हैं?
- मुख्य समस्या फल मक्खी का प्रकोप है, जो फसल को नुकसान पहुंचाता है।
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