किसान नंद किशोर की केले की खेती से बदल गई किस्मत
देवघर के किसान ने चार एकड़ में केले की खेती कर पांच लाख रुपये कमाए
देवघर के किसान नंद किशोर ने केले की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति सुधारी है और चार एकड़ जमीन में पांच लाख रुपये की आमदनी की है। केले की खेती में लागत कम और उत्पादन अधिक होने के कारण यह तरीका किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। भारत में मिट्टी की खराब स्थिति से खेती प्रभावित हो रही है, जिससे किसान नई और टिकाऊ खेती की तकनीकों को अपनाने की जरूरत महसूस कर रहे हैं।
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देवघर के किसान नंद किशोर ने केले की खेती से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है। उन्होंने करीब चार एकड़ जमीन पर केले की खेती शुरू की और अब तक पांच लाख रुपये तक की कमाई कर चुके हैं। खेती में लागत कम और मुनाफा अधिक होने की वजह से उनकी किस्मत बदल गई है।
नंद किशोर ने बताया कि उन्होंने 2024 में खेती की शुरुआत की थी। पहले वह एक एकड़ जमीन पर सब्जी की खेती करते थे, लेकिन नुकसान होने के कारण उन्होंने केले की खेती अपनाई। एक पौधे पर करीब 200 रुपये खर्च हुए, जिसमें पौधा, खाद, सिंचाई और दवाओं का खर्च शामिल है। एक पौधे से करीब 1000 रुपये तक की कमाई हो सकती है।
उन्होंने कहा कि केले के पौधे की खासियत यह है कि एक बार लगाने के बाद इसकी जड़ से नई कोंपलें निकलती हैं, जिनसे तीन बार तक नए पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे नए पौधे खरीदने का खर्च बचता है और खेती की लागत कम होती है।
नंद किशोर ने बताया कि खेती के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके पौधों को नुकसान पहुंचाया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और फिर से मेहनत शुरू की। अब उनकी खेती से अच्छी आमदनी हो रही है और वे भविष्य में और मुनाफा होने की उम्मीद करते हैं।
एक अन्य किसान राम महाजन ने बताया कि वे करीब दस एकड़ जमीन में मिक्स खेती कर रहे हैं। एक मित्र ने कहा कि अगर जमीन समतल हो तो केले की खेती अच्छे तरीके से की जा सकती है और एक बार पौधा लगाने के बाद आगे भी उसी से फसल तैयार की जा सकती है।
भारत की करीब एक-तिहाई जमीन की मिट्टी खराब हो चुकी है, जिससे खेती की उत्पादकता और किसानों की आय प्रभावित हो रही है। एक रिपोर्ट के अनुसार, 2024 तक देश के कुल क्षेत्रफल का लगभग 33 प्रतिशत हिस्सा मिट्टी खराब होने की समस्या से प्रभावित था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मिट्टी की खराब स्थिति से कृषि उत्पादन, किसानों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। मौसम में बदलाव और भूजल की कमी भी खेती के जोखिम को बढ़ा रहे हैं।
खराब हो चुकी जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने के लिए खेती के तरीके बदलने की जरूरत है। 'रीजनरेटिव एग्रीकल्चर' को बढ़ावा देना होगा, जिसमें कम जुताई, खेत को ढकने वाली फसलें, फसल चक्र बदलना, पेड़ों के साथ खेती और पशुपालन जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है।
इन तरीकों से मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने, पोषक तत्वों और पानी के बेहतर इस्तेमाल और रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, इन तरीकों को बड़े स्तर पर लागू करना आसान नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- नंद किशोर ने केले की खेती क्यों अपनाई?
- पहले वह सब्जी की खेती करते थे लेकिन नुकसान के कारण उन्होंने केले की खेती शुरू की।
- क्या नंद किशोर को खेती में कोई बाधा आई?
- हाँ, कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके पौधों को नुकसान पहुंचाया, लेकिन उन्होंने मेहनत जारी रखी।
- मिट्टी खराब होने का कारण और असर क्या है?
- मौसम में बदलाव और भूजल की कमी मिट्टी खराब होने के कारण हैं, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा प्रभावित होती है।
- मिट्टी सुधारने के लिए कौन से कृषि तरीके अपनाने चाहिए?
- 'रीजनरेटिव एग्रीकल्चर' जैसे कम जुताई, फसल चक्र बदलना और पेड़ों के साथ खेती मदद कर सकते हैं।
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