दिल्ली में विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित आवास की कमी बनी चुनौती
सत्य निकेतन हादसे के बाद गैर-कानूनी इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज, आवास व्यवस्था सुधार की जरूरत
दिल्ली में विद्यार्थियों के सुरक्षित आवास की कमी बनी हुई है, जिसके कारण कई विद्यार्थी महंगे और असुरक्षित निजी आवासों में रह रहे हैं। नगर निगम ने गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है, जबकि सरकार और विश्वविद्यालय आवास परियोजनाओं में देरी से निपटने की कोशिश कर रहे हैं।
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दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में हाल ही में एक इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के बाद विद्यार्थियों के सुरक्षित आवास का मुद्दा फिर उभरा है। नगर निगम ने गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ अभियान तेज कर दिया है, लेकिन आवास की कमी बनी हुई है।
देश में विद्यार्थियों के लिए सुनियोजित आवास व्यवस्था अभी भी सीमित है। एक उद्योग अध्ययन के अनुसार, पेशेवर रूप से प्रबंधित आवास केवल नामांकित विद्यार्थियों के 0.5 फीसदी से भी कम को सेवा प्रदान करते हैं, जबकि अमेरिका और ब्रिटेन में यह आंकड़ा 13 से 19 फीसदी के बीच है।
राष्ट्रीय स्तर पर 2018-19 में 90.8 लाख प्रवासी विद्यार्थी थे, जिनमें से दिल्ली-राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 7,45,000 उच्च शिक्षा के विद्यार्थी हैं। इनमें से लगभग 50 फीसदी इस क्षेत्र के बाहर से आते हैं, जिससे अतिरिक्त 2,50,000 बिस्तरों की मांग होती है।
विश्वविद्यालयों की अपर्याप्त छात्रावास क्षमता के कारण विद्यार्थी महंगे और असुरक्षित निजी आवासों की ओर बढ़ रहे हैं, जिससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ रही हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय में लगभग 2,50,000 विद्यार्थियों के लिए केवल 7,000 छात्रावास बिस्तर उपलब्ध हैं।
दिल्ली सरकार की 10,000 बिस्तरों की योजना उपयोगी है, लेकिन स्वीकृत परियोजनाओं में देरी से इसका प्रभाव सीमित होता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली विश्वविद्यालय की एक छात्रावास परियोजना निर्माण शुरू होने से पहले ही 31 महीने विलंबित हो चुकी थी।
विश्वविद्यालयों को स्वीकृत परियोजनाओं को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए और कम उपयोग वाली संस्थागत भूमि का कुशल उपयोग करना चाहिए। जहां छात्रावास बनाना कठिन हो, वहां मान्यता प्राप्त निजी संचालकों के साथ साझेदारी कर सुरक्षित आवास की सूची बनानी चाहिए।
विदेशों में उच्च शिक्षा प्रदाताओं की जिम्मेदारी होती है कि वे अपने स्वामित्व या प्रबंधन वाले आवासों की देखरेख करें। ब्रिटेन में 2025 के आवास संहिता में सुरक्षा, स्थिरता और छात्र कल्याण को शामिल किया गया है।
सरकार को निजी आवास बाजार को विनियमित करने की आवश्यकता है। दिल्ली सरकार का पेइंग गेस्ट आवास विनियमन एवं सुरक्षा विधेयक 2026 पीजी प्रतिष्ठानों के लिए सुरक्षा, स्वच्छता, अधिभोग सीमा और शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करता है।
निगम ने सत्य निकेतन हादसे के बाद गैर-कानूनी और असुरक्षित इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। 6 से 18 सितंबर के बीच 397 संपत्तियों को तोड़ा और 152 को सील किया गया। अकेले 18 सितंबर को 41 संपत्तियों को तोड़ा गया, 10 को सील किया गया और कई कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
नगर निगम ने रिहायशी इलाकों में व्यवसायिक उपयोग की संपत्तियों का तीन महीने का सर्वे पूरा कर लिया है। यह अभियान सत्य निकेतन हादसे के बाद और तेज हुआ है।
विद्यार्थियों के आवास को शैक्षिक बुनियादी ढांचे का हिस्सा बनाना आवश्यक है। बेहतर डेटा, संस्थागत जवाबदेही और विश्वसनीय विनियमन से उच्च शिक्षा का विस्तार सुरक्षित और समावेशी होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित आवास की कमी का मुख्य कारण क्या है?
- विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ने के बावजूद विश्वविद्यालयों के छात्रावास पर्याप्त नहीं हैं, जिससे वे महंगे और असुरक्षित निजी आवासों की ओर बढ़ रहे हैं।
- नगर निगम ने असुरक्षित और गैर-कानूनी इमारतों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है?
- नगर निगम ने सत्य निकेतन हादसे के बाद व्यवसायिक उपयोग की संपत्तियों का तीन महीने का सर्वे पूरा किया और कई संपत्तियों को तोड़ा, सील किया और कारण बताओ नोटिस जारी किए।
- विदेशों में विद्यार्थियों के आवास व्यवस्था में किन सुधारों को लागू किया गया है?
- ब्रिटेन में 2025 के आवास संहिता में सुरक्षा, स्थिरता और छात्र कल्याण को शामिल किया गया है, जिससे स्वामित्व या प्रबंधित आवासों की देखरेख सुनिश्चित होती है।
- दिल्ली सरकार की छात्रावास योजना में देरी क्यों हो रही है?
- स्वीकृत परियोजनाओं में निर्माण कार्यों में विलंब के कारण, जैसे दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रावास परियोजना 31 महीने तक शुरू नहीं हो सकी।
- सरकार निजी आवास बाजार को कैसे नियंत्रित करने की योजना बना रही है?
- दिल्ली सरकार द्वारा 2026 में पेइंग गेस्ट आवास विनियमन एवं सुरक्षा विधेयक प्रस्तुत किया गया है, जो सुरक्षा, स्वच्छता और अधिभोग सीमा समेत शिकायत निवारण सुनिश्चित करता है।
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