महेश भट्ट ने फिल्मों में दिखाई अपनी जिंदगी की सच्चाई
निर्देशक महेश भट्ट ने निजी अनुभवों को पर्दे पर बखूबी पेश किया
महेश भट्ट का जन्म 1948 में मुंबई में हुआ और उन्होंने फिल्मों में अपने जीवन के अनुभवों को दर्शाया। उन्होंने 1974 में 'मंजिलें और भी हैं' से निर्देशन की शुरुआत की और बाद में 'आशिकी', 'जख्म' जैसी फिल्मों के जरिए पहचान बनाई। महेश भट्ट ने विशेष फिल्म्स के बैनर तले कई फिल्मों का निर्माण किया और अपने करियर में कई राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्राप्त किए।
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नई दिल्ली। महेश भट्ट का जन्म 20 सितंबर 1948 को मुंबई में हुआ था। बचपन से ही आर्थिक और पारिवारिक मुश्किलों का सामना करने वाले महेश ने फिल्मों में अपनी जिंदगी की सच्चाइयों को दर्शाया। उन्होंने 1974 में 'मंजिलें और भी हैं' से निर्देशन की शुरुआत की।
महेश भट्ट के पिता नानाभाई भट्ट फिल्म निर्माता थे, लेकिन उन्होंने महेश की मां शिरीन मोहम्मद अली से शादी नहीं की थी। इस वजह से महेश को बचपन में कई तरह की तानों और मुश्किलों का सामना करना पड़ा। परिवार की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं थी, जिससे उन्हें कम उम्र में ही जिंदगी की गहराई समझ में आई।
महेश ने तय किया कि वह अपनी जिंदगी में कुछ बड़ा करेंगे। फिल्मों के प्रति उनका जुनून उन्हें महबूब स्टूडियो तक ले गया। फिल्म इंडस्ट्री में उनके पास कोई बड़ा कनेक्शन नहीं था, इसलिए शुरुआत में काम पाने के लिए उन्होंने झूठ बोला। जब उनसे सच पूछा गया तो उन्होंने ईमानदारी से बात बताई। निर्देशक राज खोसला को उनकी ईमानदारी पसंद आई और उन्होंने महेश को अपनी टीम में असिस्टेंट के तौर पर काम दिया।
साल 1974 में महेश भट्ट ने 'मंजिलें और भी हैं' से निर्देशन की शुरुआत की। उनकी फिल्मों में निजी अनुभवों और समाज से जुड़े मुद्दों की झलक देखने को मिली। इस फिल्म ने उन्हें एक ऐसे निर्देशक के रूप में पहचान दिलाई जो जिंदगी की मुश्किल सच्चाइयों को बिना बनावट के पर्दे पर पेश करते हैं।
1990 में आई फिल्म 'आशिकी' ने उनकी लोकप्रियता को नया मुकाम दिया। यह सिर्फ प्रेम कहानी नहीं थी, बल्कि इसके संगीत ने भी दर्शकों के बीच खास जगह बनाई। इसके बाद महेश भट्ट का नाम ऐसे फिल्मकारों में लिया जाने लगा जो गंभीर विषयों को मनोरंजन के साथ प्रभावी ढंग से पेश करते हैं।
1990 के दशक में महेश भट्ट ने विशेष फिल्म्स के जरिए प्रोडक्शन की दुनिया में भी कदम रखा। इस बैनर के तहत 'राज', 'मर्डर', 'जिस्म', 'जन्नत' और 'आशिकी 2' जैसी फिल्मों का निर्माण हुआ, जिन्होंने कई कलाकारों को पहचान दिलाई।
महेश भट्ट के करियर में 'जख्म' फिल्म को भी खास माना जाता है। यह फिल्म साल 1998 में रिलीज हुई और इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। 'जख्म' को राष्ट्रीय एकता पर सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म के लिए नरगिस दत्त अवॉर्ड भी मिला। यह फिल्म उनके निजी अनुभवों से जुड़ी मानी जाती है।
महेश भट्ट की निजी जिंदगी भी सुर्खियों में रही। कॉलेज के दिनों में उनकी मुलाकात लोरिएन से हुई, जो बॉम्बे स्कॉटिश अनाथालय में पढ़ती थीं। बताया जाता है कि एक बार महेश उनसे मिलने के लिए अनाथालय की दीवार कूदकर अंदर चले गए थे, लेकिन पकड़े गए। बाद में दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और शादी का फैसला किया। शादी के एक साल बाद उनकी बेटी पूजा भट्ट का जन्म हुआ।
महेश भट्ट का नाम अभिनेत्री परवीन बाबी के साथ भी जुड़ा। दोनों के रिश्ते की चर्चा हुई और एक समय वे साथ भी रहे। साल 1984 में 'सारांश' की शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात सोनी राजदान से हुई। धीरे-धीरे दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और बाद में उन्होंने शादी कर ली। दोनों की दो बेटियां शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट हैं। पहली पत्नी किरण से महेश के दो बच्चे पूजा भट्ट और राहुल भट्ट हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- महेश भट्ट की फिल्मों में कौन से विषय दिखाए जाते हैं?
- उनकी फिल्मों में निजी अनुभवों और समाज से जुड़े गंभीर मुद्दे प्रभावी ढंग से दिखाए जाते हैं।
- महेश भट्ट ने फिल्म इंडस्ट्री में शुरुआत कैसे की?
- शुरुआत में काम पाने के लिए उन्होंने झूठ बोला, लेकिन बाद में अपनी ईमानदारी से निर्देशक राज खोसला को प्रभावित किया।
- महेश भट्ट की निजी जिंदगी में कौन-कौन से रिश्ते उल्लेखनीय हैं?
- महेश भट्ट की पहली पत्नी किरण से पूजा और राहुल बच्चे हैं; बाद में सोनी राजदान से शादी की जिसमें दो बेटियां शाहीन और आलिया हैं।
- महेश भट्ट की प्रोडक्शन कंपनी विशेष फिल्म्स के तहत कौन-कौन सी फिल्में बनीं?
- इस बैनर से 'राज', 'मर्डर', 'जिस्म', 'जन्नत' और 'आशिकी 2' जैसी फिल्में बनीं।
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