मंत्री संजय निषाद ने फूलन देवी हत्या मामले में सपा पर सवाल उठाए
मछुआरा समाज से सतर्क रहने की अपील, सपा की निष्पक्ष जांच न करने पर तीखा हमला
उत्तर प्रदेश के मंत्री डॉ. संजय निषाद ने फूलन देवी हत्या मामले में सपा पर निष्पक्ष जांच न कराने का आरोप लगाया और मछुआरा समाज को चुनाव में सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने सपा के प्रदर्शन और कांग्रेस पर भी आरोप लगाते हुए मछुआरा समाज की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान की बात कही। इसके साथ ही उन्होंने फूलन देवी की सुरक्षा और मौत से जुड़ी विवादों पर ध्यान दिलाया।
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उत्तर प्रदेश के मंत्री डॉ. संजय निषाद ने शुक्रवार को कहा कि फूलन देवी की हत्या कराने वालों से सावधान रहना चाहिए। उन्होंने सपा पर आरोप लगाया कि जब फूलन देवी ने सपा से मोहभंग किया और अपनी पार्टी बनाई, तब उनकी हत्या कर उनकी आवाज दबा दी गई। मंत्री ने मछुआरा समाज से विधानसभा चुनाव में सतर्क रहने की अपील की।
मंत्री संजय निषाद ने सवाल उठाया कि सपा ने फूलन देवी की मौत की निष्पक्ष जांच क्यों नहीं की। उन्होंने कहा कि मछुआरा समाज अब ऐसे राजनीतिक धोखों को नहीं भूलेगा। मंत्री ने बताया कि जो साढ़े चार साल आपके सुख-दुख में नहीं आए, वे अब दरी बिछाने वाले की तरह आपके आसपास कूदने लगे हैं। उनका इशारा सपा प्रमुख अखिलेश यादव की ओर था, जिन्होंने हाल ही में निषाद समाज को सच्चा हितैषी बताया था।
संजय निषाद ने कहा कि सपा सरकार में निषाद समाज को मान-सम्मान, पहचान और अधिकार दिया गया, जबकि फूलन देवी को सपा ने ही रिहा करवाया और दो बार सांसद बनाया था। मंत्री ने फूलन देवी को विद्रोह और न्याय की प्रतीक बताया और कहा कि उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री से सुरक्षा की मांग की थी। फूलन देवी ने कहा था कि वे उत्तर प्रदेश में असुरक्षित हैं और दूसरे प्रदेश में रहेंगी। उन्होंने गारंटी मांगी कि तभी वे सरेंडर करेंगी, नहीं तो अपने हथियार से न्याय करेंगी।
मंत्री ने कांग्रेस पर भी आरोप लगाया कि उसने वादा किया था लेकिन उसे भूल गई। उन्होंने पूछा कि सपा ने फूलन देवी को नेता और सांसद बनाया, लेकिन बदले में क्या मिला। जब फूलन देवी का सपा से मोहभंग हुआ तो उन्होंने ‘एकलव्य सेना’ बनाई। मंत्री ने कहा कि मोहभंग की वजह और दूसरी पार्टी बनाने की जरूरत का जवाब भी मिलना चाहिए।
संजय निषाद ने यह भी बताया कि फूलन देवी की प्रॉपर्टी पर सपा से जुड़े एक चौरसिया ने कब्जा कर रखा है। उन्होंने चेतावनी दी कि मल्लाह, निषाद, केवट, कश्यप, बिंद, धीवर, कहार, बाथम, रायकवार और माझी समेत पूरे मछुआरा समुदाय को ऐसे लोगों से सावधान रहना होगा जो घड़ियाली आंसू बहाकर वोट लेकर सत्ता में जाते हैं और फिर मछुआरा समाज को भूल जाते हैं। मंत्री ने कहा कि मछुआरा समाज अब स्वतंत्र राजनीतिक पहचान निषाद पार्टी के रूप में रखता है और यह किसी की दरी बिछाने वाली कौम नहीं, बल्कि ओबीसी समाज के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाली कौम है।
एक अन्य मामले में, मुजफ्फरनगर के जज रवि कुमार दिवाकर ने गुरुवार को 10 साल पुराने एनडीपीएस एक्ट के एक मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि एक जज का काम न्याय करना होता है, लेकिन अगर उसके साथ अन्याय हो तो वह कहां जाए। उन्होंने पूछा कि क्या जिला जज के प्रशासनिक नियंत्रण में काम कर रहा जज ऐसे आदेशों को मानने के लिए बाध्य है जो कानून के खिलाफ हों। जज ने लंबे समय से कोर्ट के चक्कर काट रहे आरोपी को बरी कर दिया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- फूलन देवी ने सुरक्षा क्यों माँगी थी?
- फूलन देवी ने तत्कालीन प्रधानमंत्री से सुरक्षा मांगकर असुरक्षा जताई थी।
- मंत्री संजय निषाद ने मछुआरा समाज को क्या सलाह दी?
- उन्होंने कहा कि मछुआरा समाज को राजनीतिक धोखों से सावधान रहना चाहिए।
- फूलन देवी का सपा से मोहभंग होने का कारण क्या था?
- मंत्री ने कहा कि मोहभंग की वजह और दूसरी पार्टी बनाने की जरूरत का जवाब चाहिए।
- संजय निषाद ने कांग्रेस पर क्या आरोप लगाए?
- उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने वादा किया था लेकिन उसे भूल गई।
- जज रवि कुमार दिवाकर का एनडीपीएस एक्ट मामले में क्या निर्णय था?
- उन्होंने आरोपी को आरोपों से बरी करते हुए न्याय और न्यायाधीश की भूमिका पर सवाल उठाए।
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