उत्तर प्रदेश में सपा के खिलाफ माफिया पोस्टर से सियासी हमला
लखनऊ समेत कई शहरों में लगाए गए पोस्टर, सपा शासनकाल के माफियाओं पर आरोप
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के करीब समाजवादी पार्टी के खिलाफ कई जिलों में माफियाओं से जुड़े आरोपों वाले पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों में सपा शासनकाल में माफियाओं के अपराध और सपा नेताओं के उनके साथ संबंधों का उल्लेख किया गया है, जिससे चुनावी राजनीति गर्माई है। वित्तीय मंत्री एवं अन्य नेताओं ने भी इस अभियान पर प्रतिक्रिया दी है।
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के करीब आते ही सियासी हमले तेज हो गए हैं। लखनऊ, उन्नाव, इटावा, सीतापुर, बरेली, मेरठ, आजमगढ़ और गाजीपुर में सोमवार को समाजवादी पार्टी के खिलाफ पोस्टर लगाए गए। इन पोस्टरों में सपा शासनकाल के दौरान माफियाओं और उनके कृत्यों को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
राजधानी लखनऊ में एक दर्जन से अधिक जगहों पर पोस्टर लगाए गए हैं, जिनमें अवध से पूर्वांचल और पश्चिमी यूपी के कई चर्चित माफियाओं के नाम शामिल हैं। पोस्टरों में अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी, याकूब कुरैशी, अनिल दुजाना, गुलशन यादव, मित्रसेन यादव, रिजवान जहीर, नवाब सिंह यादव, राम वृक्ष यादव, वीरपाल सिंह यादव, रमाकांत यादव, मुकीम काला और संजीव जीवा जैसे नामों का उल्लेख है।
पोस्टरों में आरोप लगाया गया है कि सपा शासनकाल में ये माफिया लैंड क्रूजर में बैठकर अपहरण, आगजनी, जहरीली शराब कांड, चोरी और अन्य अपराधों में शामिल थे। एक पोस्टर में लिखा गया है कि अतीक अहमद अपहरण करता था और आजम खान भैंसों की चोरी में लिप्त था। इसके अलावा नवाब सिंह पर रेप का आरोप, दीप नारायण यादव द्वारा अपराधी को बचाने की साजिश और इरफान सोलंकी के आगजनी मामले में दोषी होने का जिक्र भी किया गया है।
सपा के माफियाओं और उनके नेताओं के बीच संबंध होने का आरोप भी पोस्टरों में लगाया गया है। रूहेलखंड, बृज क्षेत्र, बुदेलखंड और पूर्वांचल के अलग-अलग हिस्सों के माफियाओं की सूची जारी की गई है।
उत्तर प्रदेश के मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी ने बताया कि संजीव जीवा ने 1997 में पूर्व कैबिनेट मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या की थी।
राज्य में विधानसभा चुनाव की तैयारी के बीच इस तरह के पोस्टर वार से राजनीतिक माहौल गरमाया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इस अभियान पर तीखा पलटवार किया है।
राज्यमंत्री राकेश राठौर ने कहा, 'अखिलेश के पास अब कुछ नहीं बचा, चाहे कोई भी यात्रा निकाल लें।' वहीं, मंत्री संजय निषाद ने कहा, 'प्रयागराज नहीं, यह निषाद राज की धरती है।' उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भी हवाला दिया।
इन पोस्टरों के जरिए सपा शासनकाल के दौरान कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए गए हैं और सीधा संदेश दिया गया है।
इस बीच नोएडा और गाजियाबाद में 1 अक्टूबर से बिना प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) के पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा। यह कदम पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पोस्टरों में कौन-कौन से अपराधों का जिक्र है?
- पोस्टरों में अपहरण, आगजनी, जहरीली शराब कांड, चोरी और रेप के आरोपों का उल्लेख है।
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पोस्टर अभियान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
- अखिलेश यादव ने इस सियासी अभियान पर तीखा पलटवार किया है।
- उत्तर प्रदेश के मंत्रियों ने इस मुद्दे पर क्या कहा?
- मंत्री राकेश राठौर और संजय निषाद ने सपा और चुनावी यात्राओं पर टिप्पणी की है।
- संजय निषाद ने किस नेता का हवाला दिया?
- संजय निषाद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हवाला दिया है।
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