मध्य प्रदेश में मानसून का कोटा 89.3 प्रतिशत पूरा
प्रदेश में अब तक 33.2 इंच बारिश, मानसूनी सीजन में 11 दिन बाकी
मध्य प्रदेश में मानसून का कुल कोटा 89.3 प्रतिशत पूरा हो चुका है और प्रदेश में अब तक औसत 33.2 इंच बारिश दर्ज हुई है। मौसम विभाग ने बताया कि मानसून सीजन में कई जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है, जबकि कुछ जिलों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई है। आगामी दिनों में हल्की बारिश के आसार हैं, जिससे बारिश का कोटा पूरा हो सकता है।
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मध्य प्रदेश में मानसून अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और प्रदेश में अब तक औसत 33.2 इंच बारिश हो चुकी है, जो कुल कोटे की 89.3 प्रतिशत है। मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सीजन को 11 दिन बाकी हैं, जिनमें बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है।
मौसम विभाग ने बताया है कि प्रदेश के कई जिलों में अब तक सामान्य बारिश का आंकड़ा कम ही रहा है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में सामान्य का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। वहीं, मऊगंज और निवाड़ी में कोटे से दोगुना बारिश दर्ज की गई है। भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश हुई है।
मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक ने बताया कि पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम सक्रिय है, जिसके कारण इन जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जो दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ेगा। यह सिस्टम मध्य प्रदेश के मौसम में एक और बदलाव ला सकता है।
मौसम विभाग के अनुसार जून में प्रदेश में 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी, जबकि जुलाई और अगस्त में बारिश का कोटा पूरा हो गया। हालांकि, जून की कमी पूरी नहीं हो पाई है, इसलिए अब तक प्रदेश में सात प्रतिशत कम पानी गिरा है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जिलों की सामान्य बारिश 38 से 39 इंच तक होती है।
भोपाल में पिछले पांच साल से सितंबर महीने में कोटे से अधिक बारिश हो रही है। सितंबर 1961 में पूरे महीने में 30 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई थी। 2 सितंबर 1947 को 24 घंटे में 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड बना था। इंदौर में सितंबर महीने में रिकॉर्ड 30 इंच बारिश हो चुकी है और इस बार यहां 15 या उससे अधिक दिन तक बारिश हो सकती है।
ग्वालियर में सितंबर 1990 में 25 इंच बारिश हुई थी, जो मासिक बारिश का ओवरऑल रिकॉर्ड है। इस बार अगस्त में ही ग्वालियर में बारिश का कोटा पूरा हो गया था, इसलिए सितंबर में होने वाली बारिश बोनस की तरह मानी जाएगी। जबलपुर में भी सितंबर महीने में 24 घंटे में साढ़े आठ इंच बारिश का रिकॉर्ड है। उज्जैन में वर्ष 1961 में सितंबर की बारिश ने पूरे मानसून का कोटा पूरा कर दिया था।
मौसम विभाग ने अगले चार दिन तक हल्की बारिश की संभावना जताई है, जो 22 सितंबर तक जारी रह सकती है। इससे प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो सकता है, लेकिन सभी जिलों में सामान्य आंकड़ा हासिल करना आसान नहीं होगा। इसके लिए मानसून के बचे दिनों में लगातार बारिश जरूरी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- मौसम विभाग ने मानसून की भविष्यवाणी क्या की है?
- मौसम विभाग ने अगले चार दिन तक हल्की बारिश की संभावना जताई है जो 22 सितंबर तक जारी रह सकती है।
- पश्चिमी हिस्से में बारिश क्यों जारी है?
- पश्चिमी हिस्से में एक साइक्लोनिक सकुर्लेशन सिस्टम सक्रिय है, जिससे बारिश बनी हुई है।
- क्या जून में बारिश सामान्य थी?
- जून में प्रदेश में 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी, जिसके कारण कुल मानसूनी कोटे में कमी रह गई।
- संतुलित बारिश वाले जिले कौन से हैं?
- भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर जैसे जिलों में सामान्य या अधिक बारिश हुई है।
- सितंबर महीने में रिकॉर्ड बारिश की जानकारी क्या है?
- भोपाल में 2 सितंबर 1947 को 24 घंटे में 9.2 इंच बारिश का रिकॉर्ड बना था, जबकि इंदौर में सितंबर में 30 इंच बारिश हो चुकी है।
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