एनएसई के 22,569 करोड़ रुपये के आईपीओ को पूर्ण अभिदान मिला
रूस-ईरान प्रतिबंधों से बाजार में अनिश्चितता, विदेशी निवेशकों ने निकाला 20,974 करोड़
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के 22,569 करोड़ रुपये के आईपीओ को दूसरे दिन ही पूर्ण अभिदान मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा रूस और ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसके कारण विदेशी निवेशकों की भारत से निकासी जारी है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक भू-राजनीतिक स्थिति और अमेरिकी नीतियां आगामी दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा निर्धारित करेंगी।
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एजेंसी। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के 22,569 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम को दूसरे दिन ही पूर्ण अभिदान मिल गया है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में अबतक भारतीय शेयरों से करीब 20,974 करोड़ रुपये की निकासी की है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा रूस और ईरान पर नए प्रतिबंधों से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।
प्रतिबंधों का असर और बाजार की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 'ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' पर हस्ताक्षर किए हैं, जो रूस और ईरान पर मौजूदा प्रतिबंधों का विस्तार करता है। यह कानून रूस से कच्चा तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देता है। हालांकि, शुल्क की दर और किन देशों पर लागू होगी, इस पर अमेरिकी प्रशासन के पास व्यापक अधिकार हैं। इसलिए भारत पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है। विश्लेषकों के अनुसार, इस नए कानून से भारतीय बाजार के लिए व्यापार मोर्चे पर नई अनिश्चितता पैदा हुई है।
बाजार के प्रमुख कारक और निवेशकों की गतिविधि
पिछले सप्ताह बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 486.8 अंक यानी 0.65 प्रतिशत टूटा, जबकि एनएसई निफ्टी में 51.7 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने सितंबर में अबतक 20,974 करोड़ रुपये की निकासी की है। ऊंची कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिका में ऊंची ब्याज दरें, बॉण्ड बाजार और वैश्विक अनिश्चितताएं बाजार के लिए महत्वपूर्ण कारक बनी हुई हैं। भारतीय शेयर बाजार की दिशा इस सप्ताह मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों, पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और वैश्विक बाजार के रुख से तय होगी।
विशेषज्ञों की राय और आगामी घटनाक्रम
घरेलू बाजार में 24 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की सूचीबद्धता भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम होगी। स्टॉक मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, इसलिए निवेश करने से पहले किसी सर्टिफाइड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर से परामर्श जरूर करें।
वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और अमेरिकी बॉण्ड पर प्रतिफल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे
अजित मिश्रा, रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (शोध)
आने वाले दिनों में भारत, अमेरिका और यूरो क्षेत्र के पीएमआई आंकड़ों के साथ-साथ अमेरिका के आगामी श्रम बाजार आंकड़ों पर निवेशकों की नजर रहेगी
संतोष मीणा, स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के शोध प्रमुख
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- अमेरिकी राष्ट्रपति के नए कानून का भारतीय बाजार पर क्या प्रभाव हो सकता है?
- कानून के तहत कच्चे तेल और गैस पर शुल्क लगाने का अधिकार अमेरिकी प्रशासन को मिलने से भारत के लिए व्यापारिक अनिश्चितता बढ़ी है, विशेषकर कच्चे तेल आयात पर।
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी क्यों हो रही है?
- इसका कारण ऊँची ब्याज दरें, कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि, वैश्विक अनिश्चितताएं और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़े जोखिम माने गए हैं।
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