11 साल बाद डीयू छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई को करारी हार
विद्यार्थी परिषद ने तीन सीटें जीतीं, एनएसयूआई का कोई प्रत्याशी नहीं जीता
दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में 11 साल बाद एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिली, जबकि विद्यार्थी परिषद ने तीन सीटें और एक निर्दलीय ने एक सीट जीती। यह परिणाम राहुल गांधी के छात्र अभियान के दौरान आया है और अन्य कई विश्वविद्यालयों में भी एनएसयूआई का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव में 11 वर्ष बाद पहली बार एनएसयूआई को एक भी सीट नहीं मिली। विद्यार्थी परिषद ने तीन सीटें जीतकर बाज़ी मारी जबकि चौथी सीट एक निर्दलीय के खाते में गई। यह परिणाम राहुल गांधी के छात्र अभियान के बीच आया है।
एनएसयूआई ने चुनाव प्रचार में सभी सीटों पर जीत का दावा किया था, लेकिन परिणाम उलट रहे। यह पहली बार है जब 2014 और 2015 के बाद से एनएसयूआई को डीयू छात्रसंघ चुनाव में इतनी बड़ी हार का सामना करना पड़ा है। इस हार के राजनीतिक निहितार्थ गहराई से समझे जा रहे हैं।
देश के कई विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में भी एनएसयूआई का प्रदर्शन निराशाजनक रहा है। गुजरात विश्वविद्यालय, एमएस यूनिवर्सिटी वडोदरा, और दक्षिण गुजरात विश्वविद्यालय से जुड़े कई कॉलेजों में विद्यार्थी परिषद ने बढ़त बनाई। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और राज्य के 60 प्रतिशत से अधिक राजकीय महाविद्यालयों में भी विद्यार्थी परिषद ने जीत दर्ज की।
मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तराखंड में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला है। असम और अरुणाचल प्रदेश में भी एनएसयूआई का प्रदर्शन कमजोर रहा है। इस बार छात्रों के मिजाज में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन डीयू में भगवा रंग का प्रभुत्व साफ नजर आया।
राहुल गांधी देश में छात्र सियासत को सक्रिय करने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और हाल ही में इंदौर में 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए युवाओं को साधने की कोशिश की गई थी। लेकिन डीयू के चुनाव परिणाम ने इस अभियान को झटका दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- विद्यार्थी परिषद का प्रदर्शन कहाँ अच्छा रहा?
- विद्यार्थी परिषद ने गुजरात विश्वविद्यालय, एमएस यूनिवर्सिटी वडोदरा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय और 60% से अधिक राजकीय महाविद्यालयों में जीत दर्ज की।
- राहुल गांधी ने छात्र राजनीति को कैसे सक्रिय करने की कोशिश की?
- राहुल गांधी ने 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के जरिए युवाओं को साधने का प्रयास किया।
- देश के अन्य राज्यों में चुनावी परिणाम कैसे रहे?
- मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी विद्यार्थी परिषद मजबूत रही जबकि एनएसयूआई कमजोर प्रदर्शन दिखाया।
- दी यू छात्रसंघ चुनाव में इस बार क्या बदलाव दिखा?
- छात्रों के मिजाज में बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन डीयू में विद्यार्थी परिषद का प्रभुत्व साफ देखा गया।
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