प्याज की खुदरा कीमत 53.92 रुपये प्रति किलो, थोक में 9% गिरावट
सरकार ने 35 रुपये प्रति किलो दर से प्याज की बिक्री शुरू की, 48 शहरों तक पहुंचाई
देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत 53.92 रुपये प्रति किलो है, जो एक महीने पहले से 48% अधिक है। सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत 24 अगस्त से नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से प्याज का भंडार बाजार में उपलब्ध कराना शुरू किया है ताकि कीमतों में राहत मिल सके। थोक कीमतों में 9% की गिरावट आई है, जिसका असर जल्द ही खुदरा बाजार में भी दिखने की संभावना है।
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देश में प्याज की औसत खुदरा कीमत मंगलवार को 53.92 रुपये प्रति किलो रही, जो एक महीने पहले से 48 फीसदी अधिक है। सरकार ने 24 अगस्त से मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत प्याज के भंडार को बाजार में उतारना शुरू किया है।
सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं तक किफायती दर पर प्याज पहुंचाना है। इसके लिए नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के आउटलेट्स के साथ मोबाइल वैन के जरिए भी प्याज उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकार ने इस साल 1.21 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक रखा है। 24 अगस्त से नेफेड और एनसीसीएफ के माध्यम से प्याज की खुदरा बिक्री शुरू की गई, जिससे अब तक देश के करीब 48 शहरों में सस्ती प्याज पहुंचाई जा चुकी है।
रेल और सड़क दोनों माध्यमों से प्याज की आपूर्ति की जा रही है। रेल से भेजी जाने वाली विशेष ट्रेनों को 'कांदा एक्सप्रेस' कहा जाता है। इसका मकसद बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाना और मौसम के कारण कीमतों में तेजी को रोकना है।
अगस्त में प्याज की महंगाई दर 48.27 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि जुलाई में यह 22.54 फीसदी थी। यह कीमतें एक महीने पहले की तुलना में 48 फीसदी और एक साल पहले के मुकाबले 94 फीसदी ज्यादा हैं।
पिछले साल के 307.67 लाख टन के मुकाबले वर्ष 2025-26 में देश में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख टन रहा। अगस्त और सितंबर के महीनों में त्योहारों के कारण मांग बढ़ जाती है, जबकि मानसूनी बारिश और मौसम की खराबी से सप्लाई प्रभावित होती है।
सरकार मंडियों में प्याज की कीमतों पर लगातार नजर रख रही है ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके।
थोक कीमतों में गिरावट का असर जल्द ही खुदरा कीमतों पर भी दिख सकता है.
निधि खरे, उपभोक्ता मामलों की सचिव
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सरकार ने प्याज की कीमतें नियंत्रण में कैसे रखने की योजना बनाई?
- सरकार ने नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार के माध्यम से मोबाइल वैन के जरिए प्याज बाजार में उतारकर कीमतें किफायती रखने की योजना बनाई है।
- कांदा एक्सप्रेस का क्या महत्व है?
- कांदा एक्सप्रेस विशेष ट्रेनें हैं जो रेल से प्याज आपूर्ति बढ़ाने और मौसम की वजह से कीमतों की बढ़ोतरी को रोकने के लिए चलाई जाती हैं।
- प्याज की उत्पादन संख्या में पिछले वर्ष के मुकाबले क्या बदलाव आया?
- पिछले वर्ष के 307.67 लाख टन के मुकाबले 2025-26 में प्याज उत्पादन 307.37 लाख टन रहा, जो लगभग समान है।
- अगस्त और सितंबर में प्याज की मांग क्यों बढ़ती है?
- त्योहारों के कारण अगस्त और सितंबर में प्याज की मांग बढ़ जाती है, लेकिन मानसूनी बारिश और खराब मौसम सप्लाई को प्रभावित करते हैं।
- सरकार खुदरा प्याज की कीमतों पर कैसे निगरानी रखती है?
- सरकार मंडियों में प्याज की कीमतों पर नजर रखती है ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और समय पर हस्तक्षेप किया जा सके।
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