प्रधानमंत्री योजना से बंजर जमीन पर झींगा पालन से किसान को लाखों का मुनाफा
हरियाणा के किसान ने खारे पानी वाली जमीन पर झींगा पालन शुरू कर आर्थिक मजबूती पाई
हरियाणा के किसान श्यामपाल चौहान ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बंजर जमीन पर झींगा पालन शुरू करके 15.90 से 17 लाख रुपये की शुद्ध आय कमाई है। उन्होंने विभागीय प्रशिक्षण के बाद लगभग 40 लाख रुपये निवेश कर 2025-26 में 20 टन झींगा उत्पादन किया। तेलंगाना में भी किसानों द्वारा नारियल की खेती के लिए सितंबर-अक्टूबर को उपयुक्त समय माना जा रहा है।
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जागरण संवाददाता। हरियाणा के किसान श्यामपाल चौहान ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत झींगा पालन शुरू कर बंजर जमीन को सोने में बदल दिया है। उन्होंने करीब 40 लाख रुपये निवेश कर वर्ष 2025-26 में 20 टन झींगा उत्पादन कर 15.90 से 17 लाख रुपये तक की शुद्ध आय कमाई। यह सफलता सेवा संकल्प अभियान के तहत मिली सही मार्गदर्शन का परिणाम है।
श्यामपाल चौहान के पास करीब 2 हेक्टेयर खारे पानी से प्रभावित जमीन थी, जो खेती के लिए उपयुक्त नहीं थी। उन्होंने जमीन को बेकार छोड़ने के बजाय झींगा पालन की संभावनाओं पर ध्यान दिया और मत्स्य विभाग से तालाब निर्माण, बीज डालने, पानी की गुणवत्ता नियंत्रित रखने और रखरखाव का प्रशिक्षण लिया। शुरुआती तकनीकी चुनौतियों के बावजूद विभागीय सलाह के अनुसार काम करते हुए उन्होंने झींगा पालन शुरू किया।
वर्ष 2024-25 में 18 टन झींगा उत्पादन हुआ, जो अगले वर्ष बढ़कर 20 टन तक पहुंच गया। बाजार में उन्हें 380 से 480 रुपये प्रति किलोग्राम तक का दाम मिल रहा है। तमाम खर्चे निकालने के बाद श्यामपाल को सालाना 15.90 लाख से 17 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी मार्गदर्शन और योजना ने उनकी जमीन को आर्थिक मजबूती का आधार बनाया है, जो जिले के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा है।
तेलंगाना के किसान भी अब पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी में तेजी से हाथ आजमा रहे हैं। खासकर हैदराबाद और आसपास के जिलों में नारियल की बागवानी को लेकर रुझान बढ़ा है। कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर इंजिनियरिंग हैदराबाद के अनुसार सितंबर और अक्टूबर का महीना नारियल की रोपाई के लिए बेहद मुफीद होता है। मानसूनी बारिश के बाद मिट्टी में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जो पौधों को तेजी से जमीन में पकड़ बनाने में मदद करती है।
स्थानीय किसान चिनवेनी रामुलु ने बताया कि भारी बारिश वाले महीनों में खेतों में पानी जमा होने से पौधों की नाजुक जड़ें सड़ने का खतरा रहता है, खासकर चिकनी या भारी मिट्टी वाले इलाकों में। सितंबर-अक्टूबर में तेज बारिश का दौर थम जाता है, जिससे जलभराव का खतरा खत्म हो जाता है। अक्टूबर के बाद मौसम में हल्की ठंडक होती है, जिससे पौधों को ट्रांसप्लांट शॉक नहीं लगता और वे सुरक्षित विकसित होते हैं।
नारियल की रोपाई के लिए गड्ढे 1 मीटर लंबा, 1 मीटर चौड़ा और 1 मीटर गहरा तैयार किए जाते हैं। इनमें सड़ी हुई गोबर की खाद, बालू और उपजाऊ मिट्टी मिलाकर भरना चाहिए। स्थानीय मौसम के अनुकूल ईस्ट कोस्ट टॉल, गंगाबोंडम या हाइब्रिड किस्में चुननी चाहिए। बारिश रुकने के बाद मिट्टी की नमी बचाने के लिए सूखे पत्तों या नारियल के छिलकों से मल्चिंग जरूरी है। सिंचाई के लिए नवंबर से नियमित पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए ड्रिप सिस्टम या हल्की सिंचाई की व्यवस्था पहले से करनी चाहिए।
एक एकड़ में 60 पेड़ों से पांचवें साल के बाद सालाना लगभग 6,000 नारियल मिलते हैं। रखरखाव खर्च काटकर किसान प्रति एकड़ 1.4 से 1.5 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा 50 से 60 साल तक कमा सकते हैं।
नारियल की खेती के टिप्स
नारियल की खेती के लिए सितंबर और अक्टूबर का महीना बेहतर माना जाता है क्योंकि मानसूनी बारिश के बाद मिट्टी में नमी बनी रहती है और तेज धूप या लू का असर कम होता है। इससे पौधों को ट्रांसप्लांट शॉक नहीं लगता और वे सुरक्षित विकसित होते हैं। गड्ढे 1 मीटर लंबा, चौड़ा और गहरा तैयार कर उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद, बालू और उपजाऊ मिट्टी मिलाकर भरना चाहिए। स्थानीय मौसम के अनुसार किस्मों का चुनाव करना जरूरी है। मल्चिंग से मिट्टी की नमी बनी रहती है और सिंचाई के लिए ड्रिप सिस्टम या हल्की सिंचाई की व्यवस्था करनी चाहिए।
झींगा पालन से आर्थिक लाभ
श्यामपाल चौहान ने झींगा पालन के लिए करीब 40 लाख रुपये का निवेश किया। उन्होंने मत्स्य विभाग से तालाब निर्माण और रखरखाव का प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2024-25 में 18 टन और 2025-26 में 20 टन झींगा उत्पादन हुआ। बाजार में 380 से 480 रुपये प्रति किलोग्राम तक दाम मिलने से उन्हें सालाना 15.90 लाख से 17 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो रही है। यह सफलता सरकारी योजनाओं और सही मार्गदर्शन का परिणाम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- श्यामपाल चौहान ने झींगा पालन कैसे शुरू किया?
- उन्होंने मत्स्य विभाग से तालाब निर्माण, बीज डालने, पानी की गुणवत्ता नियंत्रण और रखरखाव का प्रशिक्षण लिया।
- झींगा पालन में श्यामपाल को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा?
- शुरुआती तकनीकी चुनौतियां थीं, लेकिन विभागीय सलाह पर काम करके उन्होंने सफलता पाई।
- नारियल की खेती के लिए सर्वोत्तम समय कब है?
- सितंबर और अक्टूबर का महीना क्योंकि मानसूनी बारिश के बाद मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों को ट्रांसप्लांट शॉक नहीं लगता।
- नारियल की खेती में किस प्रकार की मिट्टी और खाद का उपयोग किया जाना चाहिए?
- गड्ढे में सड़ी हुई गोबर की खाद, बालू और उपजाऊ मिट्टी मिलाकर भरना चाहिए।
- नारियल की खेती से किसानों को कितनी आय संभावित है?
- प्रति एकड़ 50 से 60 साल तक प्रति वर्ष 1.4 से 1.5 लाख रुपये शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
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