मेरठ के 74 साल पुराने मंदिर में शोभायात्रा निकली
थापरनगर मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति के साथ भक्तिमय उत्सव हुआ
मेरठ के थापरनगर स्थित 74 साल पुराने श्रीकृष्ण मंदिर से जन्माष्टमी पर शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं ने भगवान की मूर्ति को फूलों से सजी पालकी में विराजित कर भक्ति-भाव से जयकारे लगाए। मंदिर की स्थापना 1952 में बाबा अर्जुनराज ने की थी, जिन्होंने पाकिस्तान से इस मूर्ति को भारत लाकर थापरनगर में स्थापित किया था। जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का आयोजन हुआ।
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मेरठ के थापरनगर में 74 साल पुराने श्रीकृष्ण मंदिर से जन्माष्टमी पर शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धालुओं ने फूलों से सजी पालकी में भगवान की मूर्ति विराजित कर भक्ति भाव से जयकारे लगाए।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर थापरनगर मंदिर से शोभायात्रा शुरू हुई, जिसमें श्रद्धालुओं ने बैंड-बाजों की धुन और ढोल की थाप पर ठाकुर जी का गुणगान किया। 20 फीट ऊंचे पिरामिड पर युवाओं ने दही हांडी फोड़ी। मंदिर से निकली शोभायात्रा बच्चा पार्क, गुरुद्वारा रोड, गली नंबर दो और तीन से होते हुए वापस मंदिर पहुंचकर संपन्न हुई।
श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन कर जगह-जगह पुष्पवर्षा से स्वागत किया। बाल ग्वालों के संतुलन को देखकर लोगों ने तालियां बजाकर उत्साह बढ़ाया। मंदिर में दिनभर भजन, प्रवचन और कीर्तन का दौर जारी रहा।
मंदिर की स्थापना 1952 में थापरनगर में हुई थी। पाकिस्तान के पेशावर से आकर बसे बाबा अर्जुनराज ने इस मंदिर की स्थापना की थी। भारत-पाक विभाजन के बाद जब पाकिस्तान में धार्मिक हिंसा बढ़ी, तब बाबा अर्जुनराज ने इस मूर्ति को भारत लाने का निर्णय लिया। भारतीय वायु सेना की सहायता से मूर्ति को अंबाला तक लाया गया और फिर थापरनगर में स्थापित किया गया।
मंदिर के लिए 410 स्क्वायर फीट भूमि 1950 में बाबा अर्जुनराज ने खरीदी थी। मंदिर में केवल भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति विराजमान है, राधा जी की प्रतिमा नहीं है। साथ ही गोवर्धन पर्वत के 16 शिलाखंड भी यहां रखे गए हैं, जिन्हें भगवान ने इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए अपनी अंगुली पर उठाया था।
श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर एक-दूसरे को बधाई दी और प्रसाद वितरित किया। क्षेत्र के अन्य प्राचीन मंदिरों में भी रात तक भजन-कीर्तन और पूजा-अर्चना का दौर चला।
श्रीनगर के लाल चौक पर भी इस्कॉन मंदिर से निकली भव्य जन्माष्टमी शोभायात्रा हुई। कश्मीरी पंडित, मुस्लिम और पर्यटक मिलकर इस पर्व को अमन और भाईचारे का प्रतीक बना रहे हैं। शोभायात्रा में तिरंगा लहराते हुए फूलों से सजी झांकियां और भक्तिमय वातावरण रहा। पुलिस और अर्धसैनिक बलों की मुस्तैदी के बीच माहौल सौहार्दपूर्ण रहा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- पाकिस्तान से मूर्ति भारत कैसे आई थी?
- भारतीय वायु सेना की सहायता से मूर्ति को अंबाला तक लाया गया और फिर थापरनगर में स्थापित किया गया।
- श्रीनगर में जन्माष्टमी पर क्या गतिविधियां हुईं?
- श्रीनगर के लाल चौक में इस्कॉन मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकली जिसमें कश्मीरी पंडित, मुस्लिम और पर्यटक शामिल हुए।
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