राजसमंद में महर्षि दधीचि जयंती पर 43 ने किया रक्तदान
चार दंपतियों समेत लोगों ने कमला नेहरू सेटेलाइट हॉस्पिटल में रक्तदान किया
राजसमंद के कांकरोली में महर्षि दधीचि जयंती के अवसर पर कमला नेहरू सेटेलाइट हॉस्पिटल में महर्षि दधीचि सेवा संस्थान द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित किया गया, जिसमें 43 लोगों ने रक्तदान किया। शिविर में दंपतियों समेत विभिन्न समाजों के लोग शामिल हुए और रक्तदान के माध्यम से समाज को जागरूक करने का प्रयास किया गया। जयंती पर पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।
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राजसमंद। राजसमंद के कांकरोली में महर्षि दधीचि सेवा संस्थान ने महर्षि दधीचि जयंती से एक दिन पहले कमला नेहरू सेटेलाइट हॉस्पिटल में रक्तदान शिविर आयोजित किया। इस शिविर में चार दंपतियों समेत कुल 43 रक्तदाताओं ने रक्तदान किया।
शिविर की शुरुआत कांकरोली दाधीच समाज अध्यक्ष डॉ. महेशदत्त दाधीच और समाजजनों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महादानी महर्षि दधीचि एवं दधिमति माता की पूजा-अर्चना से की। शिविर प्रभारी संजय व्यास, सतीश व्यास, नरेंद्र कुमार शर्मा और गौतम शर्मा ने आरके अस्पताल के ब्लड बैंक की टीम के सहयोग से रक्तदाताओं की स्वास्थ्य जांच कर रक्तदान करवाया।
रक्तदान में रूपेश-श्वेता व्यास, विकास-चित्रा दाधीच, आकाश-वैशाली दाधीच और विनायक-दिव्या दाधीच ने दंपती के रूप में हिस्सा लिया। रक्तदान करने वालों में दाधीच समाज के साथ अन्य समाजों के लोग भी शामिल थे।
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष जगदीश पालीवाल, सीएमएचओ डॉ. हेमंत बिंदल, ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. राजकुमार खोलिया और डॉ. भूपेश परतानी मौजूद रहे। समाज अध्यक्ष डॉ. महेशदत्त दाधीच, सचिव डॉ. मुरली मनोहर आचार्य, योगेश पी., दाधीच महिला मंडल अध्यक्ष गीता दाधीच, शिवप्रसाद दाधीच, हरिशंकर व्यास, जगदीश व्यास, मधुसूदन व्यास, कमल किशोर व्यास, श्याम सुंदर जोशी, प्रकाश जोशी, महेश दाधीच जोधपुरिया और बसंत दाधीच भी उपस्थित थे।
आयोजकों ने बताया कि दंपतियों का एक साथ रक्तदान करना समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश देता है।
महर्षि दधीचि जयंती शनिवार को मुखर्जी चौराहा स्थित कुमावत समाज के नोहरे में मनाई जाएगी। सुबह 10 बजे शिव रुद्राभिषेक होगा। दोपहर 1 बजे महिला मंडल की ओर से मां भगवती दधिमथी मंगल पाठ होगा। दोपहर 2 बजे महर्षि दधीचि की पूजा-अर्चना, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम और पारितोषिक वितरण किया जाएगा।
महर्षि दधीचि भारतीय पौराणिक परंपरा में त्याग और दान के प्रतीक माने जाते हैं। मान्यता है कि देवताओं और असुरों के युद्ध के समय उन्होंने अपनी अस्थियां दान कर दी थीं। उनकी अस्थियों से भगवान इंद्र के लिए वज्र बनाया गया, जिससे वृत्रासुर का वध हुआ। उनकी कथा परोपकार, त्याग और दूसरों के हित के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने की प्रेरणा देती है। जयंती पर विभिन्न स्थानों पर पूजा-अर्चना के साथ रक्तदान जैसे सेवा कार्य भी आयोजित किए जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- महर्षि दधीचि जयंती कब मनाई जाएगी?
- जयंती शनिवार को मुखर्जी चौराहा स्थित कुमावत समाज के नोहरे में मनाई जाएगी।
- जयंती समारोह में कौन-कौन से कार्यक्रम होंगे?
- सुबह 10 बजे शिव रुद्राभिषेक, दोपहर 1 बजे मां भगवती दधिमथी मंगल पाठ, दोपहर 2 बजे पूजा-अर्चना, साहित्यिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।
- महर्षि दधीचि के त्याग का क्या इतिहास है?
- देवताओं और असुरों के युद्ध के दौरान उन्होंने अपनी अस्थियां दान कर भगवान इंद्र के लिए वज्र निर्माण में योगदान दिया था।
- रक्तदान शिविर में किन समाजों के लोग शामिल थे?
- रक्तदान में दाधीच समाज तथा अन्य समाजों के लोग शामिल थे।
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