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धौलपुर में बारिश के मौसम में पशुओं में तीन दिवसीय बुखार का खतरा

बारिश के बाद मक्खी-मच्छरों से फैलने वाली वायरल बीमारी से पशुपालकों को सतर्क रहने की जरूरत

धौलपुर में बारिश के मौसम में पशुओं में तीन दिवसीय बुखार नामक वायरल बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। यह बीमारी मक्खी और मच्छरों के काटने से फैलती है और पशुओं में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द व लंगड़ाहट जैसे लक्षण दिखाती है।
AI सार

धौलपुर में बारिश के मौसम में मक्खी और मच्छरों के काटने से पशुओं में तीन दिवसीय बुखार फैलने का खतरा बढ़ गया है, जिसमें तेज बुखार, जोड़ों में दर्द और लंगड़ाहट जैसे लक्षण होते हैं। पशुपालकों को पनपने वाले कीटों से बचाव, साफ-सुथरा वातावरण बनाए रखने और पशु चिकित्सक की सलाह से टीकाकरण कराना चाहिए।

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धौलपुर में बारिश के मौसम में पशु स्वास्थ्य
धौलपुर में बारिश के मौसम में पशु स्वास्थ्य / प्रतीकात्मक चित्र · निहारिका टाइम्स

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 धौलपुर में बारिश के मौसम में पशुओं में तीन दिवसीय बुखार नामक वायरल बीमारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। यह बीमारी मक्खी और मच्छरों के काटने से फैलती है और पशुओं में तेज बुखार, जोड़ों में दर्द व लंगड़ाहट जैसे लक्षण दिखाती है।

तीन दिवसीय बुखार एक वायरल बीमारी है जो बारिश और उसके बाद के मौसम में अधिक फैलती है। मक्खी और मच्छरों की संख्या बढ़ने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। यह बीमारी आरएनए वायरस के कारण होती है और सीधे एक पशु से दूसरे में नहीं फैलती। संक्रमित मच्छर या मक्खी जब किसी स्वस्थ पशु को काटती है, तब वायरस शरीर में पहुंचता है।

इस बीमारी का सबसे प्रमुख लक्षण अचानक तेज बुखार आना है, जिसमें पशु का शरीर 104 से 107 डिग्री फॉरेनहाइट तक गर्म हो सकता है। बुखार सामान्यतः 24 से 48 घंटे तक रहता है और फिर तापमान सामान्य हो जाता है, इसलिए इसे तीन दिवसीय बुखार कहा जाता है।

बीमारी के दौरान पशु के जोड़ों में दर्द और सूजन हो सकती है, जिससे वह लंगड़ाकर चलता है। पशु सुस्त हो जाता है और चारा खाने तथा जुगाली करने में कमी आ जाती है। दुधारू गाय-भैंसों में दूध का उत्पादन अचानक कम हो सकता है या कुछ समय के लिए बंद भी हो सकता है। नाक और आंखों से पानी या हल्का बलगम निकल सकता है, और शुरुआत में कब्ज की समस्या भी हो सकती है।

बीमार पशु को फिसलन वाले कंक्रीट फर्श से हटाकर साफ, सूखे और हवादार स्थान पर रखना चाहिए ताकि मक्खी और मच्छर पनप न सकें। गाय-भैंस को आसानी से पचने वाला हरा चारा और साफ ताजा पानी देना जरूरी है। बुखार, दर्द या सूजन होने पर बिना खुद से दवा दिए नजदीकी पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए।

बरसात शुरू होने से पहले पशु चिकित्सक की सलाह से तीन दिवसीय बुखार का टीका लगवाना चाहिए। पानी जमा न होने देना और मच्छर-मक्खियों की रोकथाम के लिए सुरक्षित उपाय अपनाना आवश्यक है। इससे पशुओं को बीमारी से बचाने में मदद मिलेगी और पशुपालकों को आर्थिक नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

तीन दिवसीय बुखार के कारण क्या हैं?
यह बीमारी आरएनए वायरस के कारण होती है और सीधे पशु से पशु में नहीं फैलती।
पशुओं में तीन दिवसीय बुखार के अन्य लक्षण क्या होते हैं?
पशु जोड़ों में दर्द, सूजन, लंगड़ाहट, दूध उत्पादन में कमी और नाक-आंखों से पानी निकलना जैसे लक्षण दिखाते हैं।
पशु पालकों को बुखार के दौरान क्या सावधानी बरतनी चाहिए?
जब बुखार, दर्द या सूजन हो तो खुद दवा न दें, बिना पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
तीन दिवसीय बुखार क्यों बारिश में ज्यादा फैलता है?
बारिश के मौसम में मक्खी और मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

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Published18 सितंबर 2026, 21:15 IST IST
Last updated18 सितंबर 2026, 21:15 IST IST
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