सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् के छह अंतरे गाने पर जवाब मांगा
राष्ट्रीय गीत को लेकर याचिका पर सुनवाई, केंद्र सरकार से दो सप्ताह में जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् के छह अंतरे अनिवार्य करने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है और यह जांचने को कहा है कि वंदे मातरम् न गाने पर कानूनी या आपराधिक कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। मामला कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है, जिसमें इसे देश के धर्मनिरपेक्ष संविधान के खिलाफ बताया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून के दंड प्रावधानों की समीक्षा संविधान के मौलिक अधिकारों के संदर्भ में करने का निर्देश दिया है।
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नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् के छह अंतरे अनिवार्य करने वाले संशोधन बिल को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा और यह जांचने को कहा कि वंदे मातरम् न गाने पर कानूनी या आपराधिक सजा दी जा सकती है या नहीं।
याचिका और विवाद
कर्नाटक के संगीतकार टीएम कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर केंद्र सरकार के उस सर्कुलर को चुनौती दी है, जिसमें वंदे मातरम् के छह अंतरे गाने को अनिवार्य किया गया है। याचिका में कहा गया है कि वंदे मातरम् के चार अंतरों में हिंदू देवी-देवताओं के प्रति भक्ति का स्पष्ट उल्लेख है, जिसे गाना देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप के खिलाफ है। इस संशोधन बिल को 29 जुलाई को राज्यसभा और 30 जुलाई को लोकसभा से पारित किया गया था, तथा 6 अगस्त को राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन गया।
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने यह तय करने से इनकार किया कि राष्ट्रीय गीत के अंतरे दो तक सीमित रहेंगे या छह तक बढ़ेंगे, लेकिन इस बात पर सहमति जताई कि वंदे मातरम् न गाने को दंडनीय अपराध बनाया जा सकता है या नहीं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से दो सप्ताह में जवाब तलब किया है। सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और याचिकाकर्ता के वकील डॉ एस मुरलीधर के बीच तीखी बहस हुई।
कानूनी पहलू और पूर्व फैसले
कोर्ट ने कहा कि कानून के तहत दंड के प्रावधानों की समीक्षा संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों के संदर्भ में की जा सकती है। जस्टिस जॉयमाला बागची ने कहा कि अदालत का दायित्व राष्ट्रीय भावना या आकांक्षा से जुड़े सवालों का निर्णय करना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने 1986 के बिजो इमैनुअल बनाम केरल सरकार मामले के सिद्धांतों को लागू करने पर सहमति जताई, जिसमें धार्मिक विश्वास के कारण राष्ट्रगान न गाने पर कार्रवाई को रद्द किया गया था।
इसमें कोई संदेह नहीं कि यह हमारा राष्ट्रीय गीत है
जस्टिस बागची, सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश
धर्मनिरपेक्षता इतनी संकीर्ण नहीं हो सकती
तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- वंदे मातरम् के छह अंतरे अनिवार्य करने का कारण क्या है?
- सरकार का उद्देश्य राष्ट्रीय गीत के पूरे छः अंतरे गायन को अनिवार्य करके राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देना है।
- सुप्रीम कोर्ट ने वंदे मातरम् न गाने के दंड को किस आधार पर जांचने का फैसला किया?
- कोर्ट ने इस दंड प्रावधान को संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 के तहत मौलिक अधिकारों के संदर्भ में जांचने का निर्देश दिया है।
- याचिकाकर्ता ने वंदे मातरम् के छह अंतरे अनिवार्य करने के खिलाफ क्या तर्क दिया?
- याचिकाकर्ता टीएम कृष्णा ने दावा किया कि कुछ अंतरों में धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ हिंदू देवी-देवताओं का उल्लेख है, जो धर्मनिरपेक्ष भारत के सिद्धांतों के खिलाफ है।
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