सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के अवैध निर्माणों को तत्काल सील करने के निर्देश दिए
न्यायाधिकरणों के बुनियादी ढांचे पर सवाल, बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल मामले में विशेष पीठ बनेगी
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को तुरंत सील करने के निर्देश दिए हैं और अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का संकेत दिया है। साथ ही, कोर्ट ने न्यायाधिकरणों के बुनियादी ढांचे पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से 25 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में 16,726 अवैध निर्माणों को तत्काल सील करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने अवैध अतिक्रमण के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है और अवैध निर्माणों पर कार्रवाई जारी रहेगी। साथ ही न्यायाधिकरणों के बुनियादी ढांचे को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
मेरठ में अवैध निर्माणों पर सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के बाहरी इलाके गांव उल्देपुर में सैकड़ों अवैध कालोनियों की स्थिति को देखकर हैरानी जताई है। कोर्ट ने कहा कि जोन बी, सी और डी में कितने अवैध निर्माण हैं, इसका सर्वे अभी तक नहीं हुआ है। कोर्ट ने आदेश दिया कि पहले उन सभी परिसरों को सील किया जाए और उनमें रहने वालों को परिसर खाली करने का निर्देश दिया जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकार अवैध निर्माणों को लेकर गंभीर है, लेकिन पुनर्वास की जिम्मेदारी सरकार की है। जनरल तुषार मेहता ने बताया कि सरकार आर्थिक स्थिति को देखते हुए ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान मालिकों के पुनर्वास पर विचार कर रही है।
न्यायाधिकरणों के बुनियादी ढांचे पर सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से 25 सितंबर तक न्यायाधिकरणों में रिक्त पड़े पदों और बुनियादी ढांचे की रिपोर्ट मांगी है। कोर्ट ने कहा, "अगर इन्फ्रास्ट्रक्चर ही नहीं होगा तो न्यायाधिकरण कैसे काम करेंगे?" इस पर केंद्र सरकार को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल पर सुनवाई
राष्ट्रीय राजमार्गों पर बेसहारा पशुओं के आश्रय स्थल बनाने के मामले में एनएचएआई ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। एनएचएआई ने कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर जानवरों के लिए आश्रय स्थल, गौशाला या बाड़े रखने की कोई अलग जिम्मेदारी उनकी नहीं है और यह कार्य स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई के लिए तीन जजों की विशेष पीठ बनाने पर सहमति जताई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि आश्रय स्थल बनाने में लगभग 7,000 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
‘370 रुपये बिरयानी’ विवाद में नया मोड़
स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र और हरियाणा में दर्ज दोनों एफआईआर को एक साथ जोड़ने की मांग की है। उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग के सामने भी माफी की पेशकश की है और ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हैं। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित राज्यों से जवाब मांगा है। यह मामला जून 2026 में गुरुग्राम में हुए उनके स्टैंड-अप शो से जुड़ा है, जहां एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
मामले की पृष्ठभूमि
यह विवाद पांच दिन से बाजार में चर्चा में है। जून 2026 में गुरुग्राम में प्रणित मोरे के शो के दौरान एक दर्शक ने 370 रुपये की चिकन बिरयानी खरीदने का जिक्र किया और इसके बदले महिला से शारीरिक संबंध की उम्मीद जताई। वीडियो वायरल होने पर महाराष्ट्र साइबर पुलिस और गुरुग्राम पुलिस ने अलग-अलग एफआईआर दर्ज की। प्रणित मोरे ने वीडियो की मंजूरी अपनी पीआर टीम द्वारा बिना उनकी अनुमति के देने की बात कही और विवाद बढ़ने पर वीडियो डिलीट कर दिया।
यह सिर्फ शुरुआत है, अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर हमें अभी बहुत लंबा जाना है
सुप्रीम कोर्ट
सरकार ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के मकान वालों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें किसी दूसरी जगह पुनर्वासित करने पर विचार कर रही है
जनरल तुषार मेहता
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- सरकार अवैध निर्माणों के पुनर्वास के लिए क्या कर रही है?
- सरकार आर्थिक स्थिति को देखते हुए ईडब्ल्यूएस और एलआईजी मकान मालिकों के पुनर्वास पर विचार कर रही है, जिससे उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जा सके।
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