सुप्रीम कोर्ट ने CBI की तेज जांच पर उठाए सवाल
रिश्वत मामले में जांच एजेंसी की कार्रवाई से शक पैदा होने पर कोर्ट ने दी सलाह
सुप्रीम कोर्ट ने CBI की तेज जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिकायत की पुष्टि किए बिना इतनी जल्दी कार्रवाई संदेह पैदा कर सकती है। एक रिश्वत मामले में आरोपी सरकारी कर्मचारी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया और कोर्ट ने CBI को शिकायत की सच्चाई जांचने की सलाह दी।
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सुप्रीम कोर्ट ने एक रिश्वत मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी CBI की अत्यंत तेज कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने कहा कि शिकायत की पुष्टि किए बिना इतनी जल्दी जांच शुरू करने से संदेह हो सकता है। मामले में आरोपी सरकारी कर्मचारी को सबूतों के अभाव में बरी किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि CBI ने 4 अगस्त 2005 को दोपहर 2 बजे दर्ज FIR के बाद कुछ ही घंटों में जाल बिछाकर बिचौलिए को पकड़ लिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि जाल की योजना बनाने से पहले शिकायत की सच्चाई की पुष्टि कर लेनी चाहिए थी। हालांकि, जांच एजेंसी की इतनी तेजी से कार्रवाई के लिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन इससे शक पैदा हो सकता है।
कोर्ट ने बताया कि रिश्वत एक बिचौलिए ने ली थी और CBI यह साबित करने में नाकाम रही कि वह पैसा आरोपी सरकारी कर्मचारी के लिए था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा पैसा लेने से अपने आप सरकारी कर्मचारी पर आपराधिक दायित्व नहीं लगाया जा सकता।
कोर्ट ने आगे कहा कि सरकारी कर्मचारी पर आपराधिक दायित्व तय करने से पहले अभियोजन पक्ष को भरोसेमंद सबूतों से यह साबित करना होगा कि बिचौलिया आरोपी के अधिकार, निर्देश या फायदे के लिए काम कर रहा था और मांग आरोपी की ओर से की गई थी।
ट्रायल कोर्ट ने अपील करने वाले के उठाए गए शक को नजरअंदाज कर आरोपी को बरी कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को शिकायत की सत्यता जांचने की सलाह दी।
कोर्ट ने यह भी कहा कि CBI की इतनी तेज कार्रवाई से शक पैदा हो सकता है क्योंकि औपचारिक FIR दर्ज होने से पहले ही एजेंसी ने शिकायत की पुष्टि कर जांच शुरू कर दी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- CBI ने इतनी तेज जांच क्यों शुरू की?
- CBI ने FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों बाद कार्रवाई की, लेकिन शिकायत की सच्चाई जांचे बिना तेज कदम उठाने पर संदेह जताया गया।
- सरकारी कर्मचारी पर आपराधिक दायित्व क्यों नहीं लगाया गया?
- क्योंकि कोई भरोसेमंद सबूत नहीं था कि रिश्वत का पैसा सरकारी कर्मचारी के अधिकार या निर्देश में गया था।
- जांच में किस प्रकार की कमी पाई गई?
- जांच में आरोप सिद्ध करने के लिए जरूरी सबूत नहीं थे और शिकायत की पुष्टि के बिना जांच तेज़ी से शुरू की गई।
- FIR के बाद CBI ने क्या कार्रवाई की?
- FIR दर्ज होने के कुछ ही घंटों में CBI ने जाल बिछाकर बिचौले को पकड़ लिया था।
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