ट्रंप ने H-1B वीजा शुल्क एक साल बढ़ाया, कंपनियों की जांच के आदेश दिए
अमेरिकी राष्ट्रपति ने विदेशी कर्मचारियों पर 1 लाख डॉलर शुल्क बढ़ाकर आईटी कंपनियों की भर्ती में 92 प्रतिशत कमी की पुष्टि की
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को लाने वाले नियोक्ताओं पर 1 लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है और कंपनियों की गहन जांच के आदेश दिए हैं। इस फैसले के बाद बड़ी आईटी कंपनियों में वीजा के लिए पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है, जो भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है। यह नया नियम 21 सितंबर 2025 से लागू होगा।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को लाने वाले नियोक्ताओं पर लगने वाला 1 लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क एक साल के लिए बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों द्वारा वीजा के लिए पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है। ट्रंप ने कंपनियों की जांच के आदेश भी जारी किए हैं।
शुल्क वृद्धि और प्रभाव
ट्रंप ने कहा कि 2025 में एक लाख अमेरिकी डॉलर का शुल्क लगाने के फैसले के बाद बड़ी आईटी कंपनियों द्वारा H-1B वीजा के लिए पंजीकरण में 92 प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने बताया कि कुछ नियोक्ताओं, तीसरे पक्ष के जरिये कर्मचारियों की नियुक्ति करने वाले समूहों और आउटसोर्सिंग कंपनियों ने अमेरिकी कुशल श्रमिकों को कम वेतन देने और उन्हें नौकरियों से निकालने के लिए इस कार्यक्रम का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया है।
नए आदेश और जांच
ट्रंप ने एक अलग घोषणा में विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय के जरिये H-1B वीजा आवेदनों की जांच और कड़ी करने का प्रावधान किया है। विदेश मंत्री, श्रम मंत्री और गृह सुरक्षा मंत्री को निर्देश दिया गया है कि वे आवेदनों पर विचार करते समय देखें कि क्या नियोक्ता ने समान पदों पर कार्यरत अमेरिकी कर्मचारियों की हाल में छंटनी की है या वह ऐसा करने की योजना बना रहा है। यह आदेश उन विदेशी नागरिकों को दिए गए वीजा पर लागू नहीं है जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं।
एच-1बी वीजा का महत्व और भारतीयों पर असर
एच-1बी वीजा के जरिए अमेरिकी कंपनियां दुनियाभर के कुशल लोगों को हायर करती हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारतीय प्रेफेशनल्स की है। यूएससीआईएस के डेटा के मुताबिक 2024 में अमेरिका में 71 प्रतिशत एच-1बी वीजा वाले लोग भारतीय थे। अमेरिकी कंपनियों ने इस शुल्क वृद्धि के बाद रजिस्ट्रेशन को 24946 से घटाकर 2055 कर दिया है। 21 सितंबर 2025 से यह फैसला लागू होगा और अब तक 700 से ज्यादा लोगों ने फीस चुकाई है।
पृष्ठभूमि
ट्रंप प्रशासन ने 2025 में H-1B वीजा पर 1 लाख डॉलर का शुल्क लगाने का आदेश दिया था, जिसकी अवधि इस महीने समाप्त होने वाली थी। इस आदेश को अदालत में चुनौती दी गई है और मामला दो संघीय अदालतों में विचाराधीन है। अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार ऐसे फैसले ले रहे हैं जिनका भारत समेत पूरी दुनिया पर असर पड़ रहा है।
2025 की घोषणा की अवधि बढ़ाने से अमेरिका के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा हितों की रक्षा जारी रहेगी, अमेरिकी कर्मचारियों और स्नातकों के लिए श्रम बाजार तक पहुंच बेहतर होगी तथा यह सुनिश्चित होगा कि नियोक्ता कार्यक्रम के मूल उद्देश्य के अनुरूप जरूरत पड़ने पर केवल अत्यधिक कुशल और जरूरी विदेशी कर्मचारियों की ही भर्ती करें
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- H-1B वीजा शुल्क बढ़ने का मकसद क्या है?
- इसका मकसद अमेरिकी कर्मचारियों के हित की रक्षा करना और सुनिश्चित करना है कि नियोक्ता केवल अत्यधिक कुशल और जरूरी विदेशी कर्मचारियों को ही भर्ती करें।
- कंपनियों की जांच कैसे की जाएगी?
- विभिन्न सरकारी एजेंसियां समन्वय कर रजिस्ट्रेशन आवेदनों की जांच करेंगी कि नियोक्ता ने अमेरिकी कर्मचारियों की हाल में छंटनी तो नहीं की या उसकी योजना नहीं बना रहे।
- क्या यह नया आदेश सभी H-1B वीजा धारकों पर लागू होगा?
- नहीं, यह आदेश उन विदेशी नागरिकों पर लागू नहीं होगा जो पहले से छात्र वीजा पर अमेरिका में रह रहे हैं।
- अद्यतन आदेश को लेकर कानूनी स्थिति क्या है?
- इस आदेश को अदालत में चुनौती दी गई है और मामला दो संघीय अदालतों में विचाराधीन है।
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