केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कांग्रेस पर कड़ा हमला बोला
कांग्रेस को दूसरों पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं, कहा कि पार्टी ने कई दलों को खत्म किया
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी ने राजनीतिक इतिहास में क्षेत्रीय नेताओं को दबाया और गैर-कांग्रेसी सरकारों को मनमाने ढंग से बर्खास्त किया। उन्होंने भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा किया और कांग्रेस की आंतरिक फूट एवं रणनीतियों की आलोचना की।
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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा कि कांग्रेस को दूसरों पर सवाल उठाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने राहुल गांधी के आरोपों को पलटते हुए कांग्रेस के राजनीतिक इतिहास का खुलासा किया।
रिजिजू ने कांग्रेस की तुलना पौराणिक पात्र भस्मासुर से करते हुए कहा कि कांग्रेस वह पार्टी है, जिसके संपर्क में आने वाले दल जलकर भस्म हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जो किसी को तोड़कर हासिल नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसी ताकतवर पार्टियां कांग्रेस की अंदरूनी फूट से निकली हैं। शरद पवार को कांग्रेस के दबाव और गुटबाजी के कारण अपनी राह अलग करनी पड़ी।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कांग्रेस ने हमेशा अपने क्षेत्रीय नेताओं को दबाने का काम किया और जो दल कांग्रेस के साथ तालमेल में आता है, वह धीरे-धीरे अपना जनाधार खो देता है। बिहार की राजनीति में जननायक कर्पूरी ठाकुर के कद को छोटा करने के लिए कांग्रेस ने गुटबाजी को बढ़ावा दिया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पर्दे के पीछे ऐसी सियासी रणनीति अपनाई जिससे गैर-कांग्रेसी ताकतें एकजुट न रह सकें। 1977 में जनता पार्टी की पहली गैर-कांग्रेसी सरकार केंद्र में आई, लेकिन कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के लिए जोड़-तोड़ की पुरानी रणनीति अपनाई।
रिजिजू ने बताया कि कांग्रेस ने चौधरी चरण सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का लालच देकर समर्थन लिया, फिर कुछ ही महीनों में अपना समर्थन वापस खींच लिया जिससे सरकार गिर गई और देश को मध्यावधि चुनाव में जाना पड़ा।
महाराष्ट्र की राजनीति में मजबूत नेताओं को कमजोर करने के लिए कांग्रेस ने उनके ही करीबियों को उनके खिलाफ खड़ा किया। सुरेश कलमाड़ी को आगे बढ़ाकर शरद पवार के प्रभाव को कम करने की कोशिश की गई।
साल 1980 में कांग्रेस की केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 356 का इस्तेमाल कर नौ चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त किया। बिहार विधानसभा को 2005 में तत्कालीन यूपीए शासन ने भंग किया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया।
स्मृति ईरानी ने कहा कि राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं और चुनाव आयोग की मर्यादा को तार-तार कर रहे हैं। कांग्रेस का इतिहास राज्यों की चुनी हुई सरकारों को मनमाने ढंग से बर्खास्त करने से भरा है।
उन्होंने बताया कि केरल की पहली कम्युनिस्ट सरकार से लेकर पंजाब, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश तक गैर-कांग्रेसी सरकारों को बर्खास्त किया गया। स्थानीय और क्षेत्रीय दलों की आवाज को दबाने के लिए राज्यपालों के पद का राजनीतिक दुरुपयोग किया गया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कांग्रेस की अंदरूनी फूट का क्या उदाहरण दिया गया?
- तृणमूल कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी जैसी पार्टियों का उदय कांग्रेस की अंदरूनी फूट का नतीजा बताया गया है।
- कांग्रेस ने बिहार की राजनीति में क्या किया?
- कांग्रेस ने बिहार में जननायक कर्पूरी ठाकुर के कद को छोटा करने के लिए गुटबाजी को बढ़ावा दिया।
- कांग्रेस ने सत्ता बनाए रखने के लिए किस राजनीतिक रणनीति का इस्तेमाल किया?
- कांग्रेस ने गैर-कांग्रेसी ताकतों को एकजुट न होने देने और जोड़-तोड़ की पुरानी रणनीति अपनाई।
- कांग्रेस ने महाराष्ट्र की राजनीति में किस तरह की रणनीति अपनाई?
- कांग्रेस ने मजबूत नेताओं को कमजोर करने के लिए उनके निकट लोगों को उनके खिलाफ खड़ा किया, जैसे सुरेश कलमाड़ी को आगे बढ़ाकर शरद पवार के प्रभाव को कम करना।
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