80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के 35 साल रखरखाव का जिम्मा तय
टीटागढ़ रेल सिस्टम्स और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड का जॉइंट वेंचर बनेगा जिम्मेदार
भारतीय रेलवे ने 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के 35 साल तक रखरखाव के लिए टीटागढ़ रेल सिस्टम्स और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स के बीच 50-50 हिस्सेदारी वाली जॉइंट वेंचर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। कुल 260 वंदे भारत स्लीपर रेक बनाए जाएंगे, जिनकी मैन्युफैक्चरिंग विभिन्न कंपनियों के द्वारा की जाएगी और प्रोटोटाइप की डेडलाइन 31 मार्च 2027 कर दी गई है।
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प्रयागराज। भारतीय रेलवे ने 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण के साथ उनके 35 साल तक रखरखाव का जिम्मा तय करने के लिए टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड और भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड के बीच जॉइंट वेंचर बनाने का प्रस्ताव तैयार किया है। अप्रैल 2023 में दोनों कंपनियों ने ₹24,000 करोड़ के कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए थे।
जॉइंट वेंचर में दोनों कंपनियों की 50-50 फीसदी हिस्सेदारी होगी और यह प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के रूप में दिल्ली में पंजीकृत होगी। इसकी शुरुआती पेड-अप शेयर कैपिटल ₹50 लाख रखी गई है। बोर्ड में दोनों कंपनियों के दो-दो निदेशक होंगे, जिससे संचालन और बड़े फैसलों में बराबर भागीदारी सुनिश्चित होगी।
इस फ्रेमवर्क के तहत 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन सेट्स के ऑपरेशन रेडीनेस, सेफ्टी और विश्वसनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी संभाली जाएगी। यह व्यवस्था इन ट्रेनों के अनुमानित 35 साल के सर्विस पीरियड को ध्यान में रखकर बनाई गई है।
रेलवे की योजना के अनुसार कुल 260 वंदे भारत स्लीपर रेक बनाए जाएंगे, जिनमें से 10 BEML, 50 चेन्नई इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, 120 किनेट रेलवे सॉल्यूशंस और 80 टीटागढ़-भेल के होंगे। BEML को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए ₹5,400 करोड़ से अधिक का कॉन्ट्रैक्ट भी मिला है।
RVNL और रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग की जॉइंट वेंचर किनेट रेलवे सॉल्यूशंस 120 ट्रेनसेट बनाएगी, जिनकी मैन्युफैक्चरिंग लातूर में शुरू हो चुकी है। ICF के 24-कोच वाले सेट में पैंट्री कार भी शामिल होगी।
प्रोटोटाइप की डेडलाइन को जून 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दिया गया है। यह बदलाव रेलवे की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए किया गया है।
BEML लिमिटेड ने माइनिंग, कंस्ट्रक्शन, डिफेंस और रेलवे के लिए भारी उपकरण और कोच बनाए हैं, जिससे भारत में हाई-स्पीड रेल के स्वदेशीकरण को बढ़ावा मिलेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की कुल संख्या कितनी होगी?
- भारतीय रेलवे कुल 260 वंदे भारत स्लीपर रेक बनाएगा, जिसमें 80 टीटागढ़-भेल के होंगे।
- जॉइंट वेंचर की पेड-अप शेयर कैपिटल कितनी तय की गई है?
- इस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शुरुआती पेड-अप शेयर कैपिटल ₹50 लाख रखी गई है।
- किन कंपनियों को वंदे भारत स्लीपर रेक बनाने के लिए जिम्मेदारी मिली है?
- टीटागढ़-भेल, BEML, चेन्नई इंटीग्रल कोच फैक्ट्री और किनेट रेलवे सॉल्यूशंस को कुल 260 रेक बनाने हैं।
- BEML को किस परियोजना के लिए अतिरिक्त कॉन्ट्रैक्ट मिला है?
- BEML को मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के लिए ₹5,400 करोड़ से अधिक का कॉन्ट्रैक्ट मिला है।
- प्रोटोटाइप डेडलाइन बढ़ाने का कारण क्या है?
- डेडलाइन बढ़ाने का उद्देश्य रेलवे की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
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