बाराबंकी में उत्तम मार्दव धर्म का आयोजन, अहंकार त्यागने का संदेश
दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन श्रद्धालुओं ने विनम्रता और सरलता अपनाने का संकल्प लिया
बाराबंकी में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म का आयोजन किया गया, जिसमें मुनि श्री सौम्य सागर जी के नेतृत्व में ध्यान, अभिषेक, शांतिधारा और पूजन कार्यक्रम हुए। कार्यक्रम में श्रद्धालुओं ने अहंकार छोड़कर विनम्रता अपनाने का संकल्प लिया और धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लिया। वहीं, नगर के विभिन्न जैन मंदिरों में भी पर्यूषण पर्व के अंतर्गत मार्दव धर्म के आयोजन हुए।
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बाराबंकी। बाराबंकी में दशलक्षण पर्व के दूसरे दिन उत्तम मार्दव धर्म का आयोजन हुआ। सुबह पांच बजे मुनि श्री सौम्य सागर जी के सान्निध्य में ध्यान शिविर शुरू हुआ जो छह बजे तक चला। इसके बाद अभिषेक, शांतिधारा और पूजन के कार्यक्रम संपन्न हुए।
कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। मुनि श्री सौम्य सागर जी ने प्रवचन में कहा कि उत्तम मार्दव धर्म का अर्थ है मान, अहंकार और अभिमान का त्याग कर मन में विनम्रता और सरलता धारण करना। उन्होंने बताया कि धन, रूप, ज्ञान और पद का अभिमान क्षणभंगुर है और जीवन में झुकना सीखना चाहिए, लेकिन स्वाभिमान की रक्षा करते हुए। उन्होंने कहा, "अगर आप झुक रहे हैं तो आपका जीवन सफलता की तरफ रहेगा लेकिन झुकना भी कहा पर है अपने स्वाभिमान की रक्षा करते हुए झुकना है।"
भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा और पूजन के बाद श्रद्धालुओं ने अहंकार त्यागकर विनम्रता अपनाने का संकल्प लिया। सांयकालीन सभा में संगीतमय आरती और भावनृत्य का आयोजन हुआ। मुनि श्री ने शंका समाधान का कार्यक्रम भी कराया।
प्रवचन में ब्रह्मचारिणी पूजा दीदी ने कहा कि मार्दव धर्म मनुष्य के भीतर उत्पन्न मान व अहंकार रूपी शत्रु का नाश करता है। मनुष्य को जीवन में पद, धन, बल और प्रतिष्ठा का अभिमान न कर सदैव विनम्रता का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा, "मनुष्य को अपने जीवन में पद, धन, बल और प्रतिष्ठा का अभिमान न करना चाहिए।"
इस अवसर पर जैन यूनिटी ग्रुप की ओर से आरती प्रतियोगिता समेत विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। नगर के श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, महावीर चैत्यालय तथा श्रीचन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन बेलहरा में भी पर्यूषण पर्व के दूसरे मार्दव धर्म का आयोजन हुआ।
भगवान शांतिनाथ पर शांतिधारा विपिन जैन एवं प्रेरणा जैन परिवार की ओर से की गई। इसके पश्चात सामूहिक देव-शास्त्र-गुरु एवं दशलक्षण पूजा का आयोजन हुआ। मूलनायक चंद्रप्रभु भगवान की वेदी पर श्रद्धालुओं ने पूजन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में समाज के श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- उत्तम मार्दव धर्म का क्या अर्थ है?
- उत्तम मार्दव धर्म का अर्थ है अहंकार, अभिमान और मान का त्याग कर विनम्रता का पालन करना।
- कार्यक्रम में मुनि सौम्य सागर जी ने क्या बताया?
- उन्होंने कहा कि धन, रूप, ज्ञान और पद का अभिमान क्षणभंगुर है और जीवन में झुकना सीखना चाहिए, लेकिन स्वाभिमान के साथ।
- पर्यूषण पर्व के दौरान अन्य स्थानों पर क्या आयोजन हुए?
- श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर, महावीर चैत्यालय एवं श्रीचन्द्रप्रभु दिगम्बर जैन बेलहरा में भी मार्दव धर्म का आयोजन संपन्न हुआ।
- भगवान महावीर स्वामी की पूजा कौन-कौन सी हुई?
- भगवान महावीर स्वामी की शांतिधारा और पूजन के कार्यक्रम हुए, जिसमें श्रद्धालुओं ने अहंकार त्यागने का संकल्प लिया।
- कार्यक्रम में ब्रह्मचारिणी पूजा दीदी ने क्या कहा?
- उन्होंने कहा कि मार्दव धर्म मनुष्य के भीतर मान और अहंकार रूपी शत्रु को नष्ट करता है और विनम्रता बनाए रखना चाहिए।
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