कांग्रेस के अनिल कल्ला बने बीकानेर के पांचवें महापौर
21 सितंबर को हुए चुनाव में अनिल कल्ला ने 50 वोटों से भाजपा को हराया
कांग्रेस के अनिल कल्ला बीकानेर नगर निगम के नए महापौर चुने गए हैं, जिन्होंने भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोटों से हराया। कांग्रेस के पास नगर निगम में 42 सीटें हैं और उन्होंने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी प्राप्त कर कुल 50 वोट लेकर जीत हासिल की। यह बीकानेर के पांचवें महापौर के रूप में उनकी नियुक्ति है।
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बीकानेर। बीकानेर नगर निगम के नए महापौर कांग्रेस के अनिल कल्ला चुने गए हैं। 21 सितंबर 2026 को हुए मतदान और मतगणना के बाद अनिल कल्ला ने भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत को 50 वोटों के मुकाबले 30 वोटों से पराजित किया।
बीकानेर नगर निगम में कुल 80 सदस्य हैं, जिनमें कांग्रेस के पास 42 पार्षद हैं। अनिल कल्ला ने निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भी हासिल किया और कुल 50 वोट लेकर एकतरफा जीत दर्ज की। वे बीकानेर नगर निगम के पांचवें महापौर हैं और कांग्रेस के वरिष्ठ जमीनी नेता हैं।
अनिल कल्ला बीकानेर के प्रसिद्ध 'राजीव यूथ क्लब' के अध्यक्ष हैं और सामाजिक, सांस्कृतिक तथा युवा कल्याण से जुड़े कार्यों में सक्रिय हैं। वे कैंसर पीड़ितों की मदद करने वाली संस्था के साथ वॉलंटियर के रूप में जुड़े हैं और अस्पतालों में मरीजों की सहायता करते हैं।
उन्होंने पिछले 33 वर्षों से कांग्रेस पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाई है और वर्तमान में जिला कांग्रेस कमेटी बीकानेर के महासचिव हैं। बीकानेर शहर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए भी उनका नाम दो बार चर्चा में रहा है।
बीकानेर नगर निगम को 2008 में नगर परिषद से अपग्रेड किया गया था। अब तक चार महापौर हो चुके हैं, जिनमें दो कांग्रेस और दो भाजपा के हैं। इस चुनाव के बाद कांग्रेस के महापौरों की संख्या तीन हो जाएगी।
पिछले 32 वर्षों में बीकानेर के सात नगर निकाय चुनाव हुए हैं, जिनमें कुल 445 पार्षद चुने गए। भाजपा के 198 और कांग्रेस के 165 पार्षद रहे हैं। 2026 के चुनाव में कांग्रेस ने 42 सीटें जीतकर 17 साल बाद भाजपा पर बड़ी बढ़त बनाई है।
चुनाव के दौरान कांग्रेस के 42 पार्षद जैसलमेर के लग्जरी रिजॉर्ट में और भाजपा के 27 पार्षद जोधपुर के रिजॉर्ट में बाड़ाबंदी में रहे। मतदान सुबह कड़ी पुलिस सुरक्षा के बीच गांधी म्यूनिसिपल सभागार में हुआ। मतगणना पूरी होने तक पार्षदों को सुरक्षा में रखा गया।
इस चुनाव में पार्षदों की खरीद-फरोख्त और विरोधी गुट की सेंधमारी से बचाव के लिए दोनों दलों ने कड़ी बाड़ाबंदी की। अनिल कल्ला की साफ-सुथरी छवि, राजनीतिक अनुभव और पारिवारिक पकड़ ने उन्हें कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों को एकजुट कर जीत दिलाई।
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