कांग्रेस ने यूपीआई शुल्क के विरोध में मंत्री रामकेश निषाद के आवास पर प्रदर्शन किया
बांदा में कांग्रेस नेताओं ने डिजिटल भुगतान पर नया शुल्क लगाए जाने का विरोध जताया
कांग्रेस ने यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत नया शुल्क लगाए जाने के विरोध में मंत्री रामकेश निषाद के आवास पर प्रदर्शन किया। कांग्रेस का कहना है कि यह शुल्क छोटे और मध्यम व्यापारियों और आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। विभिन्न जिलों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी की।
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बांदा। बांदा में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश निषाद के इंदिरा नगर निवास पर पहुंचकर यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत नया शुल्क लगाए जाने का विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यह कदम व्यापारियों और आम जनता पर अतिरिक्त बोझ डालेगा।
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंत्री रामकेश निषाद को ₹2,000 मूल्य की पूजा सामग्री भेंट कर अपना विरोध जताया और 'यूपीआई टैक्स वापस लो' के नारे लगाए। जिला अध्यक्ष राजेश दीक्षित ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई भुगतान पर यह नया टैक्स व्यापारियों और गरीब तबके के लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ाएगा। उन्होंने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को सरल बनाए जाने और इस शुल्क को तत्काल हटाने की मांग की।
डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बजाय इस तरह के शुल्क से व्यापारियों और डिजिटल लेन-देन पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष सीमा खान, जिला उपाध्यक्ष प्रोफेसर संजय द्विवेदी, जिला महामंत्री सत्य प्रकाश द्विवेदी, महासचिव शोएब रिजवी सहित कई नेता और कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल रहे। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाती है तो कांग्रेस पार्टी का विरोध जारी रहेगा। राहुल गांधी सड़क से सदन तक इस लड़ाई को लड़ेंगे।
कांग्रेस जिलाध्यक्ष गौरव भाटी और महानगर अध्यक्ष रंजन शर्मा के नेतृत्व में मेरठ में भी भाजपा विधायक अमित अग्रवाल के कार्यालय पर प्रदर्शन हुआ, जहां नेताओं ने विधायक के प्रतिनिधि को उपहार सौंपा। गोरखपुर में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में एकत्र होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार ने कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देते हुए लोगों को डिजिटल भुगतान की ओर प्रोत्साहित किया था, लेकिन अब ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किया गया है, जो व्यापारियों और आम जनता के लिए चिंता का विषय है। यह शुल्क सीधे ग्राहकों से वसूला नहीं जाएगा, लेकिन व्यापारियों पर इसका असर पड़ेगा।
डिजिटल भुगतान पर यह नया टैक्स छोटे और मध्यम व्यापारियों पर आर्थिक बोझ बढ़ाएगा और इससे व्यापार प्रभावित होगा। कांग्रेस का स्पष्ट संदेश है कि यूपीआई पर यह शुल्क स्वीकार नहीं किया जाएगा और व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ना चाहिए।
केंद्र सरकार द्वारा यूपीआई भुगतान पर टैक्स लगाकर व्यापारियों और गरीब तबके के लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालने का काम किया गया है।
राजेश दीक्षित, कांग्रेस जिला अध्यक्ष
भले ही यह चार्ज व्यापारियों पर लगाया गया है, लेकिन अंततः इसका पूरा बोझ दुकानदारों द्वारा सामान के दाम बढ़ाकर आम उपभोक्ताओं पर ही डाला जाएगा।
पार्टी जिलाध्यक्ष
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- कांग्रेस ने यूपीआई शुल्क विरोध प्रदर्शन में क्या किया?
- कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पूजा सामग्री भेंट कर और 'यूपीआई टैक्स वापस लो' के नारे लगाए।
- क्या यह यूपीआई शुल्क सीधे ग्राहकों से वसूला जाएगा?
- यह शुल्क सीधे ग्राहकों से वसूला नहीं जाएगा, लेकिन व्यापारियों पर इसका प्रभाव पड़ेगा।
- कांग्रेस का डिजिटल भुगतान के बारे में क्या रुख है?
- कांग्रेस डिजिटल भुगतान को सरल बनाए जाने की मांग करती है और नए शुल्क को हटाना चाहती है।
- कौन-कौन से नेता प्रदर्शन में शामिल थे?
- कांग्रेस महिला जिलाध्यक्ष सीमा खान, जिला उपाध्यक्ष प्रोफेसर संजय द्विवेदी, और कई अन्य नेता शामिल थे।
- सरकार द्वारा लगाया गया यह नया यूपीआई शुल्क किस समूह को प्रभावित करेगा?
- यह नया टैक्स छोटे और मध्यम व्यापारियों और गरीब तबके को आर्थिक दबाव में डालेगा।
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